टीम

 

टीचर्स ऑफ इण्डिया टीम में अज़ीम प्रेमजी फाउण्‍डेशन के साथी,साझीदार संस्‍थाएँ तथा कई अन्‍य उत्‍साही व्‍यक्ति शामिल हैं। उस पर आपका साथ टीम को अधिक ऊर्जावान तथा मजबूत बनाता है।

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अरुण नाईक

शान्त, आशावादी, खुशमिजाज, मिलनसार अरुण अकादमिक और शिक्षाशास्त्र टीम के मुखिया हैं, और पोर्टल में कन्नड़ सम्पादकीय टीम के सदस्य के तौर पर अकादमिक मार्गदर्शन देते हैं। इससे पहले वे एक साल से भी अधिक समय तक टीचर्स पोर्टल के मुखिया रहे हैं। उन्हें कला, संगीत और चित्रकला में दिलचस्पी है। उनका मानना है कि, “हम सब अपने ही विकास के लिए फलते-फूलते हैं।”

उषा

जोश से भरी, प्रतिबद्ध और खुले दिमाग की उषा टीचर्स पोर्टल में अँग्रेजी सम्‍पादकीय टीम की सदस्‍य हैं। वे पोर्टल की सहभागी पत्रिका ‘टीचर प्लस’ की सम्पादक हैं। माँ, सलाहकार, प्रबन्धक और गृहणी उषा को पढ़ने-लिखने, फिल्में देखने, शब्द-खेल और यात्रा करने का शौक है। उषा अपनी एक विशेषता के बारे में कहती हैं, “मैं बहुत भुलक्कड़ हूँ लेकिन न भूलने के लिए प्रतिबद्ध हूँ।” “अगर आप में जीवन को अपनी शर्तों पर जीने की ताकत नहीं है, तो आपको जीवन द्वारा तय की गई शर्तों को स्वीकारना होगा ”,  इस कथन पर उनका पक्का विश्वास है।

जयकुमार मरियप्पा

सच्चे-खरे, मित्रवत और स्पष्टवादी जयकुमार पोर्टल के कन्नड़ सम्पादक हैं। वे संसाधनों का चुनाव करते हैं तथा उनकी प्रमाणिकता को परखते हैं। वे कविता करते हैं और लघुकथाएँ लिखते हैं। भिन्न-भिन्न विषयों के अनुवादक और साहित्य आलोचक भी हैं। उनके शौक हैं भोजन पकाना, तस्वीरें खींचना, संसार के महाकाव्य पढ़ना। उनका मानना है कि भाषा का काम लोगों को जोड़ने का होना चाहिए न कि बाँटने का। वे विश्व नागरिक और “विश्व मानव” की संस्कृति में विश्वास रखते हैं – यानी एक ऐसा इन्सान होना जो इन्सान को बाँटने वाली दीवारों की सीमाओं में न बँधा हो।

जूनी के.विल्फ़्रेड

खुले स्वभाव के, स्पष्टवादी और कल्पनाशील जूनी टीम के विजुअल डिजाइनर हैं। किताबों को दीमक की तरह चाटने वाले जूनी को फिल्में देखने, संगीत सुनने, चित्रकला और साइकिल पर घूमने का शौक है। दोपहर की नींद उनके लिए निहायत जरूरी है, उसे वे बहुत गम्भीरता से लेते हैं।

दिव्या चौधरी

‘टीचर प्लस’ पत्रिका की सम्पादकीय टीम की सदस्‍य दिव्या तर्क और कारण को ध्यान में रखते हुए अपने मन मुताबिक चलने को प्राथमिकता देती हैं। यात्रा करना, पुस्तकों में बसी दुनिया और भूगोल उन्हें आकर्षित करते हैं। वे पोर्टल के अँग्रेजी सेक्शन के सम्‍पादकीय दायित्‍व से जुड़ी हैं। वे पोर्टल के लिए सामग्री का चयन और उसकी प्रमाणिकता की जाँच करती हैं। विषयवस्तु के लिए वे अन्य साझीदारों के साथ सहयोग भी करती हैं। वे लेखक समर्सेट मॉम द्वारा जीवन के बारे में कही गई बात को सच मानती हैं , ‘यदि आप केवल सर्वोत्तम को ही स्वीकारने को तैयार हैं, तो बहुत बार आप उसे हासिल भी कर लेते हैं।’

मुजाहिद

मुजाहिद टीम के शैक्षिक टेक्नॉलजिस्ट हैं। वे शिक्षा में आसानी से उपयोग की जाने वाली प्रौद्योगिकियों के प्रारूपों के नए तरीके के इस्तेमाल पर काम कर रहे हैं। उपयोगकर्त्‍ता टीचर्स पोर्टल का प्रभावशाली उपयोग कर पाएँ इसके लिए मुजाहिद निरन्तर प्रयत्‍नशील  हैं। उनकी दिलचस्पी विशेष तौर से शिक्षा में मोबाइल तकनॉलॉजी के प्रयोग में है। व्यावहारिक सिद्धान्तवादी और सामाजिक-तकनीकी क्षेत्र में उदार परम्परावादी मुजाहिद के शौक हैं पढ़ना, नियमों को ताक पर रखकर भोजन बनाना, यात्रा करना और नए स्थानों तथा नई संस्कृतियों से जान-पहचान करना। मुजाहिद का जीवन-दर्शन है, “अपने स्वभाव और चरित्र के प्रति ईमानदार रहो, बाकी सब हो जाएगा।” 

रमणीक मोहन

रमणीक पोर्टल की हिन्दी सम्पादकीय टीम का हिस्सा हैं। वे पोर्टल के लिए इस्तेमाल होने वाली सामग्री को चिह्नित कर उसका अनुवाद और सम्पादन करने के साथ-साथ उसकी प्रमाणिकता को सुनिश्चित करते हैं। वे 25 वर्ष तक महाविद्यालय में अँग्रेजी अध्यापन के बाद स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति हासिल करके पोर्टल टीम का हिस्सा बने हैं। साक्षरता अभियानों में सक्रिय हिस्सेदारी के साथ-साथ उन्‍होंने 10 साल से अधिक समय तक हरियाणा के राज्य संसाधन केन्द्र की पत्रिका ‘हरकारा’ का सम्पादन किया है। शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाली ‘दिगन्तर’ जैसी संस्थाओं से भी जुड़ाव रहा है। वे भारत-पाकिस्तान मैत्री के लिए लोगों के बीच सौहार्द बढ़ाने की गतिविधियों से भी जुड़े हैं।

रविबाबू

रविबाबू टीम के आत्मविश्वास से भरे आशावादी “तकनीकी समस्याओं के निदानकर्ता हैं”। वे वेबसाइट बनाते हैं और स्थिर तथा गतिशील ग्राफिक्स भी। उन्हें इलियाराजा का संगीत सुनना, 1980 और 1990 के दशक की पुरानी फिल्में देखना, पढ़ना और शतरंज खेलना पसन्द है। स्वयं- अभिप्रेरित और परिश्रमी रविबाबू सप्ताह के अन्त पर पूरी नींद लेना पसन्द करते हैं। “ चूक तो इन्सान से होती है, पर सच में कोई बहुत बड़ी गड़बड़ के लिए तो कम्प्यूटर ही चाहिए” – प्रौद्योगिकी पर रविबाबू का यह मजाकिया कथन है।

राजकिशोर

स्पष्टवादी लेकिन स्वयं को ढालने को तैयार राजकिशोर ख़ुद को एक ‘स्वतन्त्र स्वच्छन्दवादी’ के रूप में देखते हैं। विषयवस्तु विशेषज्ञ के तौर पर वे पोर्टल के लिए संसाधन तैयार करते हैं और उनकी प्रमाणिकता को परखते हैं। वे भारत में संसार की सबसे लम्बी दूरी तय करने वाली मोबाइल विज्ञान-प्रदर्शनी रेल पर सवार रहे हैं। इस यात्रा के दौरान वे देश भर में व्यावहारिक गतिविधियों और प्रदर्शनों के माध्यम से विज्ञान के प्रचार-प्रसार के काम में शामिल रहे हैं। राजकिशोर लम्बी पैदल यात्राएँ करने, एनाग्राम  बनाने और पढ़ने के शौकीन हैं। उनका कहना है कि वे अतिमूर्खता से भरी फिल्‍म भी कई-कई बार देख सकते हैं। उनका विश्वास है कि, “कुछ करने से ही हम कुछ सीखते हैं।”

राजेश उत्साही

टीचर्स ऑफ इण्डिया में हिन्दी सम्पादक हैं। वे पोर्टल के लिए सामग्री तैयार करने के साथ-साथ उसका चयन और प्रमाणीकरण करते हैं। वे सामग्री प्रदान करने वाले अन्य भागीदारों के साथ सम्पर्क-तालमेल रखते हैं। वे वैज्ञानिक दृष्टिकोण और विवेचनात्मक सोच में विश्वास रखते हैं। उन्‍होंने लगभग 27 साल तक जानी-मानी शैक्षणिक संस्‍था ‘एकलव्‍य’ में काम किया है। ‘एकलव्य’ में वे लगभग 17 साल तक बाल विज्ञान पत्रिका ‘चकमक’ का सम्पादन करते रहे हैं। इसके अतिरिक्‍त उन्‍होंने मध्य प्रदेश के शिक्षा विभाग की पत्रिकाओं ‘गुल्लक’ और ‘पलाश’ का सम्‍पादन भी किया है। वे नालन्दा, रूम टू रीड तथा मध्य प्रदेश सरकार के शिक्षा विभाग के स्रोत व्यक्ति भी रहे हैं। राजेश साहित्य के क्षेत्र में भी दखल रखते हैं। उनका एक कविता संग्रह ‘वह, जो शेष है’ प्रकाशित हुआ है। वे इन्टरनेट पर ब्लॉगर के तौर पर सक्रिय हैं। उनके शब्‍दों में, ‘जीवन की सार्थकता की तलाश अभी जारी है'।

राम जी. वल्लथ

 

राम जी. वल्लथ जीवन प्रेमी हैं। व्यापक जीवन के अनुभवों के अलावा वे कॉरपोरेट जगत में काम करने का लम्बा अनुभव भी अपने साथ लाए हैं। अपने ख़ाली वक्त में जब वे गणित या भौतिकी की कोई समस्या हल नहीं कर रहे होते, तो इतिहास या पौराणिक साहित्य पढ़ने का शौक पूरा करते हैं। उन्हें बच्चों को अजीब-ओ-गरीब, सनक भरी कहानियाँ सुनाना अच्छा लगता है और हाल ही में वे लेखन के क्षेत्र में भी आए हैं - उन की एक पुस्तक प्रकाशित हुई है। राम जी. फ़ाउण्डेशन के प्रकाशन समूह का नेतृत्व करते हैं। टीचर्स पोर्टल भी इस का एक हिस्सा है।

श्रीपर्णा

कल्पनाशील, बागी, अलग ही अन्दाज की श्रीपर्णा टीम की विषय-सामग्री विशेषज्ञ हैं। वे संसाधनों की रचना करती हैं, दस्तावेजीकरण में मदद करती हैं और सामग्री देने वाले भागीदारों से ताल-मेल बैठाती हैं। शरीर और आत्मा दोनों के लिए पढ़ना, कविता लिखना, यात्रा करना, ‍फिल्में देखना, संगीत सुनना और खाना-पीना उनके शौक हैं। “आस्था वह पक्षी है जो रोशनी को भोर के अन्धकार में भी महसूस करता है,” यह कथन उन्हें बहुत भाता है।