शिक्षक विकास

अज़ीम प्रेमजी स्‍कूल,सिरोही,राजस्‍थान के शिक्षकों के अनुभवों की पत्रिका का अक्‍टूबर,2019 का अंक ।

भिन्‍न के सीखने-सिखाने में आने वाली दिक्‍कतों को समझने के लिए निदेश सोनी ने कुछ दिनों पहले एक वीडियो बनाया था, जिसमें  भिन्‍न शिक्षण और बच्‍चों को समझाने में आने वाली दिक्‍कतों पर बात की थी। इसके बाद अब दूसरा वीडियों जिसमें वे भिन्‍नों के अलग-अगल अर्थ को समझाने का प्रयास कर रहे हैं। यह वेअर्थ हैं, जो बच्‍चों व शिक्षकों में भिन्‍न की एक समग्र समझ को बनाने में मददगार है वहीं भिन्‍न को एक संख्‍या के रूप में देखने व उसकी मात्रा को समझने में हमारी मदद करते है। यहॉं पर  कुल 5 अर्थों की बात की है।

लुबना अहमद

हम सभी...और वे सब भी अच्छे शिक्षक और शिक्षिकाएँ हैं जो अच्छे विद्यार्थी भी हों...जो हमेशा नई बातें सीखने और विद्यार्थियों के प्रबन्‍धन के नए तरीकों के बारे में जानने के लिए उत्सुक रहते हों। कुछ नया खोजने की यही भावना उन्हें सतर्क और मुस्तैद रखती है और उनके कार्य को दिलचस्प बनाती है।

घोंसला बनाने में, हम यूँ मशगूल हो गए !

उड़ने को पंख भी थे, ये भी भूल गए !!

शिक्षा के सरोकार शृंखला के तहत अज़ीम प्रेमजी विश्‍वविद्यालय ,बेंगलूरु एवं शिक्षा संकाय, दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय के संयुक्‍त तत्‍तावधान में 11 से 13 अक्‍टूबर,2019 तक दिल्‍ली में एक संगोष्‍ठी का आयोजन किया गया। संगोष्‍ठी का विषय था गणित शिक्षण : अपेक्षाएँ और चुनौतियाँ। इस संगोष्‍ठी में देश भर से आए भागीदारों ने 45 से अधिक परचों को प्रस्‍तु‍त किया। उपस्थित श्रोताओं और भागीदारों ने उस पर चर्चा की। संगोष्‍ठी में आए परचों के एब्‍स्‍ट्रैक्‍ट की एक पुस्तिका 'बानगी' का इस अवसर पर जारी की गई।

पाठशाला-भीतर और बाहर :  अंक 3  अगस्‍त 2019 में

 

सम्‍पादकीय

सामयिक : राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति (प्रारूप) 2019

परिप्रेक्ष्‍य

आचार्य से गुरु, उस्‍ताद से पीर * सी.एन.सुब्रह्मण्‍यम

यहाँ मुद्दा यह नहीं है कि बच्चे कैसे सीखते हैं ? मुद्दा यह है कि  “हम बच्चों को कैसे सिखाते हैं? क्योंकि जब हम शिक्षक इस मुद्दे पर शैक्षिक विद्वता दिखाने का एक पल भी कभी नहीं छोडते कि बच्चे कैसे सीखते हैं ? तो फिर हमारे लिए यह जानना और समझना भी उतना ही जरूरी हो जाता हैं कि हम बच्चों को कैसे सिखाते हैं ?

मेरे प्यारे बच्चो,

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