कक्षा संसाधन

एक सादी प्‍लास्टिक स्‍ट्रा से मधुर आवाज निकालने वाला बाँसुरीनुमा खिलौना बनाया जा सकता है। कैसे, वह इस वीडियो में अरविन्‍द गुप्‍ता बता रहे हैं।

15 वीं शताब्दी के मध्य से लेकर 16 वीं शताब्दी के मध्य तक (लगभग 100 वर्षों में) परिस्थितियों के संयोजन ने यूरोपीयन व्यापारियों को नए मार्ग तलाशने के लिए प्रेरित किया। यह नया मार्ग स्थल मार्ग न होकर समुद्री रास्ता था। इसके प्रमुख कारण कुछ इस प्रकार से थे। पहला-14 वीं शताब्दी के अन्‍त में मंगोलों का विशाल साम्राज्य टूटना, जिस कारण पश्चिमी व्यापारियों को भूमि मार्गों के साथ सुरक्षित आचरण का आश्वासन नहीं दिया जा सकता था। दूसरा- तुर्क और वेनेशियनों ने भूमध्यसागरीय और पूर्व से प्राचीन समुद्री मार्गों तक वाणिज्यिक रूप से अपना नियन्त्रण कर ल

खूब लड़ी मर्दानी, वो तो झॉंसी वाली रानी थी' कविता की लेखिका सुभ्रदा कुमारी चौहान की एक और कविता खिलौनेवाला का ऑडियो यहाँ प्रस्‍तुत है। कविता में बालमन की उड़ान है। हो सकता है कुछ विचारों से आप सहमत न हों, पर बालमन की बात तो सुननी ही चाहिए। तो इस कविता का प्रयोग आप कक्षा में भी कर सकते हैं।

प्रमोद बक्‍शी

राष्‍ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्‍त की एक प्रसिद्ध कविता है मनुष्‍यता। इस कविता का पाठ और उसकी व्‍याख्‍या इस आॅडियो में है। यह उच्‍च कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए साहित्‍य से परिचय के क्रम में उपयोग की जा सकती है।

मुंशी प्रेमचंद की एक प्रसिद्ध कहानी है 'सवा सेर गेहूँ'। विभिन्‍न राज्‍यों के स्‍कूलों की पाठ्यपुस्‍तकों में शामिल है। यह उसी कहानी का फिल्‍मांकन है। विद्यार्थियों के बीच इसका प्रदर्शन किया जा सकता है। कहानी ग्रामीण जनजीवन को चित्रित करती है। सवा सेर गेहूँ के बदले कैसे एक ग्रामीण पंडित का बंधुआ मजदूर बन जाता है।

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कामाक्षी चौहान

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