कक्षा संसाधन

माया सभ्‍यता में किस प्रकार से संख्‍याओं को लिखा जाता था, और किन प्रतीकों का उपयोग किया जाता था। देखिये इस वीडियों में और हमारे साथ कुछ संख्‍याओं को लिखने के अभ्‍यास भी कीजिए।

 

उत्तल लेंस द्वारा उसके सम्मुख रखी वस्तु और उनके प्रतिबिम्बों की सामान्यत: 6 स्थितियां होती है|इनमें
(1) वस्तु अनंत पर स्थित हो
(2) वस्तु अनंत और 2 F के बीच हो
(3) वस्तु 2 F पर हो
(4) वस्तु 2 F और F के बीच हो
(5) वस्तु F पर हो
(6) वस्तु F और P अर्थात ध्रुव के बीच हो
इन सभी 6 स्थितियों में उत्तल लेंस द्वारा 6 अलग-अलग प्रकार से प्रतिबिम्ब बनते है|इन्हें समझने में बच्चों को काफी मुश्किल आती है|

त्रिपुरारी शर्मा वरिष्‍ठ रंगकर्मी हैं। वे नेशनल स्‍कूल ऑफ ड्रामा में प्राध्‍यापक हैं। उन्‍होंने बच्‍चों के लिए कई नाटकों का निर्देशन किया है। वे बच्‍चों के लिए कहानियाँ भी लिखती हैं। उनकी एक कहानी को रूमटूरीड ने चित्रकथा के रूप में प्रकाशित किया है। यह कहानी है भभो भैंस। इसकी पीडीएफ यहॉं से डाउनलोड की जा सकती है।

मनोहर चमोली  'मनु' शिक्षक हैं। उत्‍तराखण्‍ड के पहाड़ों में रहते हैं। वे बच्‍चों के लिए कहानियाँ भी लिखते हैं। छोटे बच्‍चों के लिए लिखी गई उनकी एक कहानी 'चलता पहाड़' को रूम टू रीड ने चित्रकथा के रूप में प्रकाशित किया है। उसकी पीडीएफ यहाँ से ली जा सकती है।

मुकेश मालवीय शिक्षक हैं। वे बच्‍चों के लिए कहानियाँ भी लिखते हैं। छोटे बच्‍चों के लिए लिखी गई उनकी एक कहानी को रूम टू रीड ने चित्रकथा के रूप में प्रकाशित किया है। उसकी पीडीएफ यहाँ से ली जा सकती है।

गणित को केवल रोचक तरीके से पढ़ाना ही पर्याप्‍त नहीं है। किसी भी अवधारणा को बच्‍चों के सामने किस तरह रखा जा रहा है, वह भी महत्‍वपूर्ण है। हरीश जे थानवी अपनी कक्षा में बच्‍चों के साथ भिन्‍न की अवधारणा पर काम कर रहे हैं।

संज्ञा उपाध्‍याय की तीन बाल कविताएँ इस वीडियो में हैं। ये प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी हैं। इनमें से एक कविता कुछ इस तरह है :

मकड़ी जाला बुनती है
नहीं किसी की सुनती है

पूरे घर को देखभाल कर
कोने-अँतरे चुनती है

दम साधे जाले में बैठी
गुर शिकार के गुनती है

मुहम्मद तुग़लक चारित्रिक विरोधाभास में जीने वाला एक ऐसा बादशाह था जिसे इतिहासकारों ने उसकी सनकों के लिए खब़्ती करार दिया। जिसने अपनी सनक के कारण राजधानी बदली और ताँबे के सिक्के का मूल्य चाँदी के सिक्के के बराबर कर दिया। लेकिन अपने चारों ओर कट्टर मज़हबी दीवारों से घिरा तुग़लक कुछ और भी था। उसमे मज़हब से परे इंसान की तलाश थी। हिंदू और मुसलमान दोनों उसकी नजर में एक थे। तत्कालीन मानसिकता ने तुग़लक की इस मान्यता को अस्वीकार कर दिया और यही ‘अस्वीकार’ तुग़लक के सिर पर सनकों का भूत बनकर सवार हो गया था।

मध्‍यप्रदेश के सागर जिले के राहतगढ़ ब्लॉक की कल्याणपुर शाला के शिक्षक रामेश्वर प्रसाद लोधी ने पर्यावरण अध्ययन को बच्चों के जीवन के अनुभवों से जोड़ने के लिए एक अनूठा प्रोजेक्ट क्रियान्वित किया है। बच्चे इस प्रोजेक्ट से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने अपने घरों में भी इस प्रोजेक्ट को तैयार किया है। इससे बच्चों में प्रश्न करने, खोज करने, अवलोकन करने, चर्चा करने, अभिव्यक्ति करने, व्याख्या करने वर्गीकरण करने, विश्लेषण करने और प्रयोग करने के कौशल विकसित हुए

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