अन्‍य

डॉ. गिफ्टी जोएल

अज़ीम प्रेमजी फाउण्‍डेशन, देहरादून द्वारा प्रकाशित पत्रिका 'प्रवाह' का दिसम्‍बर 2017 - फरवरी 2018 का अंक लोक साहित्‍य विशेषांक के रूप में आया है। लोक साहित्‍य से परिचय और उसका शिक्षा में कैसे उपयोग हो सकता है, इस संदर्भ में इसमें उपयोगी सामग्री है। अंक की पीडीएफ आप डाउनलोड कर सकते हैं।

अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय ‘पाठशाला – भीतर-बाहर’  नाम से शिक्षा पर केन्द्रित एक हिन्‍दी पत्रिका का प्रकाशन आरम्‍भ करने जा रहा है। इसका मुख्य मकसद है हिन्दी भाषा में शैक्षिक विमर्श समृद्ध हो। यह पत्रिका का लक्ष्‍य है कि वह जमीनी स्तर पर शिक्षा में काम करने वाले विभिन्न लोगों के अपने अनुभवों और उनके प्रश्नों के लिए संवाद और विवेचना का मंच बने। पत्रिका का पहला अंक जुलाई, 2018 में आने की सम्‍भावना है।

समाज का विकास उसमें निहित सम्पूर्ण मानवीय क्षमता का कुशलतापूर्वक उपभोग पर निर्भर करता है। समाज में सभी वर्ग के सहयोग के बिना पूर्ण विकास सम्भव नहीं हो सकता है। शिक्षा किसी समाज के चहुँमुखी विकास में सबसे महत्वपूर्ण कारक है। शिक्षा को व्यक्ति की दक्षता बढ़ाने का साधन ही नहीं माना जाता है बल्कि लोकतंत्र में सक्रिय भागीदारी निभाने और अपने सामाजिक जीवन-स्तर में सुधार के लिए भी शिक्षा आवश्यक है। भारत में शारीरिक रूप से चुनौती झेल रहे लोगों की संख्या अधिक है और इनके विकास के बिना देश का पूर्ण विकास संभव नहीं है। भारत की विशिष्ट शिक्षा आयामों में एक महत्वपूर्ण आयाम है-

स्‍कूल के बच्‍चों ने सांता क्‍लॉज बनाया। हालाँकि यह कोई मुश्किल काम नहीं था। पर महत्‍वपूर्ण यह है कि बच्‍चों ने उसमें दिलचस्‍प ली। अपने तमाम तरह के कौशलों का उपयोग किया। एक टीम के रूप में काम किया और काम के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई। निश्चित ही उन्‍होंने इससे कुछ और बातें भी सीखी होंगी।

घर में अगर पशु हों, खासकर दूध देने वाले पशु, तो बच्‍चों में उनकी गतिविधियों के प्रति गहरी जिज्ञासा रहती है। वे उनके बारे में ज्‍यादा से ज्‍यादा जानना चाहते हैं।

जब घर में गाय कोई बच्‍चा देने वाली होती है, तो किस तरह की हलचल होती है, इसे एक बच्‍चे ने आँखों देखे हाल की तरह अपनी भाषा में लिखा था। यह एकलव्‍य की बाल विज्ञान पत्रिका 'चकमक' में प्रकाशित हुआ था। एकलव्‍य ने इसे एक सु्न्‍दर चित्रित किताब केे रूप में प्रकाशित किया है। साथ ही इस पर एक वीडियो भी जारी किया है। 

एक बच्‍चा जो साइकिल चलाना सीखना चाहता है। लेकिन उसके पास साइकिल नहीं है। एकलव्‍य द्वारा प्रकाशित बालविज्ञान पत्रिका 'चकमक' के मेरा पन्‍ना कालम में एक बच्‍चे ने अपना यह अनुभव लिखा। इस कहानीनुमा अनुभव को एकलव्‍य ने एक सुन्‍दर चित्रात्‍मक कहानी के रूप में प्रकाशित किया है। इस कहानी को वीडियो के रूप में भी जारी किया है।

प्राथमिक कक्षाओं के बच्‍चों के बीच अभिव्‍यक्ति का महत्‍व बताने के लिए एक उपयोगी संसाधन है।

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