सामाजिक अध्‍ययन

नब्‍बे के दशक का एक मशहूर गीत जो देश की एकात्‍मकता को बहुत बेहतर ढंग से दर्शाता है। गीत बहुत जल्‍दी जबान पर चढ़ जाता है। आप भी अपनी कक्षा में बच्‍चों को सुनाइए।

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कला शिक्षा स्‍कूलों में क्‍यों जरूरी है, यह सवाल अक्‍सर उठता रहता है। राष्‍ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005 में इस बात पर पर्याप्‍त प्रकाश डाला गया है। पाठ्यचर्या कहती है कि प्राथमिक कक्षाओं में कला की शिक्षा इसलिए जरूरी नहीं है कि किसी बच्‍चे को किसी कला विशेष में पारंगत बनाना है। बल्कि कला शिक्षा अन्‍य विषयों को समझने और उनके अवधारणात्‍मक विकास में मदद करती है। अगर विषयों की दीवार तोड़ दी जाए तो उन्‍हें समझना आसान हो जाता है। यह वीडियो इस धारणा को बहुत ही प्रभावी ढंग से समझाता है।

मोहम्मद उमर   

डाॅ. अपर्णा पाण्डेय

कभी-कभी असामान्‍य को समझना या असाधारण घटनाओं की कल्‍पना करना साधारण चीजों को समझने में हमारी मदद कर सकता है। विशेष तौर पर यह तब और भी सही होता है जब बात अपने आसपास की दुनिया - गुरुत्‍वाकर्षण, सूरज आदि....को समझने की हो।
यह गतिविधि बताती है कि कैसे आप बच्‍चों को अपनी कल्‍पनाओं को व्‍यक्‍त करने और चित्र बनाने के लिए प्रेरित कर असाधारण परिदृश्‍यों के बारे में सोचने के लिए प्रोत्‍साहित कर सकते हैं।

आज हम रोजमर्रा विभिन्‍न कामों के लिए जिस कैलेण्‍डर का उपयोग करते हैं, क्‍या वह हमेशा से था ? उत्‍तर है नहीं। तो जब वह नहीं था, तो लोगों का काम कैसे चलता था ? लोग क्‍या करते थे ? असल में यह एक रोचक कहानी है। एन.सी.ई.आर.टी. के सी.आई.ई.टी. विभाग ने इस पर एक सुन्‍दर फिल्‍म बनाई है। यह उच्‍चतर माध्‍यमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए एक उपयोगी सूचना और जानकारी का स्रोत है।

शहाबुद्दीन अन्सारी

दिनेशपुर, ऊधम सिंह नगर जिले की एक छोटी-सी न्याय पंचायत है। यहाँ बंगाली लोगों की जनसंख्या बहुत अधिक है। यहाँ 2012 में अज़ीम  प्रेमजी स्कूल की स्थापना हुई, जिसमें आर.टी.ई. (शिक्षा का अधिकार) लागू है।

अमित भटनागर

काम करना सीखने से अविभाज्य रूप से जुड़ा रहता है। यदि हमारी शिक्षा व्यवस्था वाकई में सीखने (न कि सिर्फ उद्योगों के लिए कामगार शक्ति निर्मित करने) से कुछ सम्बन्ध होने का दिखावा करती है, तो उसे अपने पाठ्यक्रम में कार्य को समाहित करना होगा। यह उसकी अनिवार्य शर्त है। 

हमारे देश की सबसे महत्‍वपूर्ण नदियों में से एक है गंगा। जो अपने उद्गम से निकलकर बंगाल की खाड़ी में गिरने से पहले 2800 किलोमीटर का लंबा सफर तय करती है। इस सफर के दौरान वह देश में कई नगरों को बसाती हुई जाती है। उसके किनारों पर हमारी संस्‍कृति और सभ्‍यता बसी हुई है।

एन.सी.ई.आर.टी. के सी.आई.ई.टी. विभाग ने गंगा की यात्रा पर दो भागों में एक डाक्‍युमेंटरी बनाई है। यह उच्‍चतर माध्‍यमिक कक्षाओं के लिए एक अच्‍छी स्रोत फिल्‍म है। यहॉं प्रस्‍तुत है उसका दूसरा भाग।

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