सामाजिक अध्‍ययन

हर साल 2 अप्रैल को अन्‍तरराष्‍ट्रीय बाल पुस्‍तक दिवस मनाया जाता है।

1993 में यह पालकों द्वारा चुनी गई सर्वश्रेष्‍ठ पुस्‍तक थी।

सिपाहियों,बाड़ और रेगिस्‍तान में घिरे जापानी मूल के अमेरिकी नागरिक, नजरबन्‍द कैम्‍प मे बेसबॉल का एक मैदान तैयार करते हैं। यहाँ एक छोटा लड़का बताता है कि कैसे उस खेल के मैदान ने, उसकी अन्‍याय और अपमान से भरी जिन्‍दगी को एक नया अर्थ प्रदान किया। यह दिल को छूने वाली किताब है।

पल्लव तिवारी

जाने-माने पर्यावरणविद् और गॉंधीवादी चिंतक अनुपम मिश्र जी का 19 दिसम्‍बर,2016 को निधन हो गया। वे जल संरक्षण पर किए गए अपने काम के लिए भारत ही नहीं, पूरे विश्‍व में जाने जाते हैं। देश भर के तालाबों पर आधारित उनकी किताब 'आज भी खरे हैं तालाब' मूल रूप से हिन्‍दी में लिखी गई है। इस किताब का 39 से अधिक भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। अनुपम जी ने इस किताब को कॉपीराइट से मुक्‍त रखा है।

आदिवासी स्‍कूल : ईब बंटिंग          चित्र : इरविंग टोडी             अनुवाद : अरविन्‍द गुप्‍ता

1880 के आखिरी सालों में अमेरिका में वहाँ के आदिवासी बच्‍चों के लिए खास तरह के 25 बोर्डिंग स्‍कूल बनाए गए थे। आदिवासी बच्‍चों को न केवल उनकी, बल्कि उनके माँ-बाप की इच्‍छा के खिलाफ भी इन स्‍कूलों में पढ़ना अनिवार्य था।

भौगोलिक दृष्टि से शिक्षित एक व्‍यक्ति में स्‍थान के सन्‍दर्भ में प्रमुख प्राकृतिक व मानव निर्मित वस्‍तुओं के संघटन को देखने की और मानव जीवन के सम्‍बन्‍ध में इनके महत्‍व व निहितार्थ को समझने की क्षमता होती है। उनमें इनसे उत्‍पन्‍न होने वाली जटिलताओं को समझने की भी क्षमता होती है। ‘भूगोल का प्रभाव व महत्‍व’ न केवल उन्‍हें वर्तमान घटनाओं की जटिलता को समझने में मदद करता है बल्कि दीर्घकालिक साधनों व तरीकों के माध्‍यम से ‘भौगोलिक दृष्टि से उपयुक्‍त’ भविष्‍य की योजना बनाने में भी मददगार होगा ।

राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद ने वर्ष 2008 में एक बढ़िया कार्यक्रम हाथ में लिया था - अन्तर्राष्ट्रीय पृथ्वी ग्रह वर्ष। परिषद ने देश भर के 40 सामुदायिक विज्ञान समूहों से आव्हान किया था कि वे ऐसे प्रोजेक्ट्स व कार्यक्रम बनाएँ जिनमें स्कूली बच्चों को शामिल किया जाए। ऐसी उम्मीद की गई थी कि इन गतिविधियों से बच्चों को अपनी धरती माता को समझने व उसका आदर करने की प्रेरणा मिलेगी। समझने व सराहने की बात यह है कि एक ओर तो हमारी धरती के कुछ विशेष गुण हैं जिनके चलते वह जीवन को सहारा देती है, तथा दूसरी ओर  मानवीय व

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अखबार यानी समाचार पत्र हमारे दैनिक जीवन का एक जरूरी हिस्‍सा है। ज्‍यादातर घरों में वह सुबह-सुबह ही आ जाता है। बड़ों से लेकर छोटों तक सबके लिए उसमें कुछ न कुछ पढ़ने के लिए होता ही है। लेकिन यह अखबार बनता कैेसे है? उसके लिए खबरें कैसे जुटाई जाती हैं, उसकी छपाई कैसे होती है और वितरण कैसे होता है? यह वीडियो रोचक ढंग से इस कहानी को बताता है।

यह वीडियो निश्चित ही माध्‍यमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है।

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