सामाजिक अध्‍ययन

भोजन और हम

अंजना त्रिवेदी

बच्‍चों को गाँधी जी के बारे में बताने का एक तरीका तो पाठ्यपुस्‍तक का है। जो बेहद ऊबाउ हो सकता है। दूसरा तरीका है कि कुछ राेचक और अलग ढंग से बताया जाए। यह वीडियो एक ऐसे ही तरीके के बारे में बता रहा है।

अमेरिका के भूतपूर्व राष्‍ट्रपति अब्राहम लिंकन के पुत्र ने जब स्‍कूल जाना शुरू किया तो उन्‍हाेंने शिक्षक के नाम एक पत्र लिखा। यह पत्र पिछले कई दशकाें से चर्चा में रहा है। शिक्षक दिवस पर इसे सुना और गुना जाना चाहिए।

शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करना लगभग पाँच वर्ष पहले शुरू किया था। शुरुआत में बहुत से ऐसे दस्तावेजों को पढ़ने का अवसर मिला जो शिक्षा के लक्ष्य, अर्थात शिक्षा से किस प्रकार के समाज की पैरवी की गई है, हमारा शिक्षण कैसे संवैधानिक मूल्यों को पिरो सकता है आदि पर आधारित थे। पर जब से स्कूल में बच्चों के साथ काम करना शुरू किया तब से एक स्पष्ट तस्वीर अपने दिमाग में बना पाता हूँ क्योंकि अब सिद्धान्‍त और व्यवहार में तालमेल स्पष्टतः बनता हुआ देख पाता हूँ। शिक्षण एवं शिक्षण प्रक्रियाओं के बारे में जितने भी दस्तावेज पढ़े वे इसी बात की पैरवी कर रहे

15 वीं शताब्दी के मध्य से लेकर 16 वीं शताब्दी के मध्य तक (लगभग 100 वर्षों में) परिस्थितियों के संयोजन ने यूरोपीयन व्यापारियों को नए मार्ग तलाशने के लिए प्रेरित किया। यह नया मार्ग स्थल मार्ग न होकर समुद्री रास्ता था। इसके प्रमुख कारण कुछ इस प्रकार से थे। पहला-14 वीं शताब्दी के अन्‍त में मंगोलों का विशाल साम्राज्य टूटना, जिस कारण पश्चिमी व्यापारियों को भूमि मार्गों के साथ सुरक्षित आचरण का आश्वासन नहीं दिया जा सकता था। दूसरा- तुर्क और वेनेशियनों ने भूमध्यसागरीय और पूर्व से प्राचीन समुद्री मार्गों तक वाणिज्यिक रूप से अपना नियन्त्रण कर ल

प्रमोद बक्‍शी

चुनाव की प्रक्रिया सचमुच जटिल होती है। लिखित रूप में वह आसानी से समझ नहीं आती। लेकिन अगर उसे खुद करके देखा जाए, तो बहुत संभव है कि जल्‍द समझ आ जाए। शासकीय माध्‍यमिक विद्यालय पैंडोनी, पांढुरना जिला छिंदवाड़ा, मप्र के बच्‍चों ने इसे करके देखा। उन्‍होंने अपने स्‍कूल की बाल कैबिनेट का गठन चुनाव से किया। चुनाव की पूरी प्रक्रिया की गई। इस वीडियो में उसकी एक झलक है।

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