विज्ञान एवं तकनॉलॉजी

6 अगस्‍त,1945 दुनिया में एक तबाही के लिए जाना जाता है। तबाही जिसने जापान के हिरोशिमा नगर को परमाणु बम की आग में जलाकर भस्‍म कर दिया था। यह वीडियो उसी भयावह त्रासदी से रूबरू कराता है।

मैं जयपुर के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, नृसिंहपुरा महल में पिछले कुछ दिनों से जा रही थी। वहाँ बच्चों के साथ विज्ञान में कुछ काम करने का प्रयास कर रही थी। विज्ञान विषय का अध्ययन करते समय हम बच्चों में कुछ क्षमताओं के बारे में बात करते हैं- जैसे अवलोकन, दर्ज करना, वर्गीकरण, व्याख्या करना, प्रयोग करना, निष्कर्ष निकालना आदि। इसी को आधार बनाते हुए मैंने बच्चों के साथ एक खेल खेलने का विचार किया। मैंने अपने थैले में नाना प्रकार की चीजों को एकत्रित कर लिया। इनमें पेंसिलें, पेन, रबर, कागज, एल्युमिनियम फोइल, कटोरी, चाबी, पत्ते, फ़ूल, लकड़ी

"जुगनू क्यों चमकता है , किया उसके पास छोटी सी टोर्च होती है? या आग? जुगनू के अंडे और बच्चे भी किया इसी तरह चमकते हैं? किया अगर हम जुगनू को छूएंगे तो हाथ जल जाएंगे?" 

25 जुलाई,2017 को जाने-माने वैज्ञानिक प्रोफेसर यश्‍ापाल का निधन हो गया । उसके एक दिन पहले एक अन्‍य वैज्ञानिक प्रोफेसर यू.आर.राव का भी निधन हो गया था। प्रोफेसर यशपाल शिक्षाविद के रूप में खासे पहचाने जाते हैं। 'बस्‍ते का बोझ-कम कैसे हो' पर उनकी अध्‍यक्षता में बनी समिति ने महत्‍वपूर्ण सिफारिशें की थीं। 'राष्‍ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा -2005' की संचालन समिति के भी वे अध्‍यक्ष थे।

जाने-माने वैज्ञानिक और शिक्षाविद प्रोफेसर यशपाल का 24 जुलाई,2017 को नब्‍बे साल की आयु में निधन हो गया। वे अपने तमाम अन्‍य कामों के अलावा स्‍कूलों में बच्‍चों के बस्‍ते के बोझ पर बनी कमेटी की अध्‍यक्षता करने के लिए जाने जाते हैं।

मध्‍यप्रदेश में 'होशंगाबाद विज्ञान शिक्षण कार्यक्रम' के नाम से माध्‍यमिक विद्यालयों में विज्ञान शिक्षण का एक नवाचारी कार्यक्रम 30 साल तक लगभग 1000 विद्यालयों में सफलता पूर्वक चला। इस कार्यक्रम में बच्‍चों तथा शिक्षकों के जिज्ञासापूर्ण सवालों के जवाब देने के लिए एक चरित्र की कल्‍पना की गई थी। इसका नाम था सवालीराम । माध्‍यमिक शाला की विज्ञान की पाठ्यपुस्‍तक 'बालवैज्ञानिक' के पहले पन्‍ने पर सवालीराम की ओर से एक पत्र बच्‍चों के नाम छपा होता था। जिसमें यह अपील होती थी कि उनके मन में जो भी सवाल आते हैं, उन्‍हें वे सवालीराम से पूछ सकते हैं

सुशील जोशी

अवलोकन-आधारित दुनिया

सुशील जोशी

माध्‍यमिक विज्ञान कक्षाओं में विद्यार्थियों के शिक्षण की प्रगति किस तरह हो रही है, अगर उसका आकलन करना हो तो कैसे करेंगे। यह वीडियो इसका एक उदाहरण है।

नए सत्र में आज पहली बार कक्षा आठवीं में दाखिल हुआ। कुछ औपचारिकताओं के बाद विद्यार्थियों ने विज्ञान विषय पढ़ने की इच्छा व्यक्त की। विज्ञान का पहला पाठ ‘सूक्ष्म जीवों का संसार’ पर पूर्व ज्ञान की हल्की बातचीत से शुरू हुआ। जैसे सूक्ष्म का अर्थ, जीवों का अर्थ। व्यवहारिक उदाहरणों व अनुभवों के आधार पर चर्चा शुरू हुई तो विद्यार्थी शैवाल व कवक पर ही मोटी समझ बना पा रहे थे। अन्य उदाहरणों के बाद भी विषाणु जीवाणु व प्रोटोजोआ ‘भूत’ (जो हमें नग्न आँखों से नहीं दिखाई देते) ही बने हुए थे।

पृष्ठ

13385 registered users
5677 resources