विज्ञान एवं तकनॉलॉजी

कागज से बनाया गया, एक मजेदार खेल । खेल यह भी बताता है कि हमारा मस्तिष्‍क पहले देखी गई चीजों की अधूरी तस्‍वीर प्राप्‍त होने पर भी उनके बारे में अन्‍दाजा लगा लेता है।

अरविन्‍द गुप्‍ता ने विज्ञान की अवधारणाओं को समझाने के लिए कबाड़ से तमाम तरह के खिलौने और प्रयोग बनाए हैं। इस पर उनकी कई किताबें हैं। उनमें से ही एक यह है। इसमें पचास खिलौने/प्रयोग दिए गए हैं।

पर्यावरण अध्ययन हो या फिर विज्ञान, प्रश्न या सवाल से ही शुरू होता है और सवाल पर ही खत्‍म। तो फिर यदि इन विषयों से बच्‍चे में कौशलात्मक विकास का हो तो जाहिर है कि प्रथम कुछ कौशलों में सवाल रहेगा ही।

आग को जलाए रखने में ऑक्‍स्‍ाीजन की भूमिका होती है। जबकि उसको बुझाने में कार्बन डाय ऑक्‍साइड मदद करती है। इसे एक छोटे से प्रयोग से समझा जा सकता है।

विद्यार्थियों को स्‍ित्रयों में होने वाले मासिक धर्म के बारे में बताने में शिक्षकों को न केवल झिझक होती है,बल्कि दिक्‍कत भी होती है। यह वीडियो एनीमेशन और एक सुन्‍दर कहानी के जरिए  इसे समझाने में मदद करता है।

विपुल कीर्ति शर्मा

भौतिक शास्‍त्र में गति की अवधारणा समझने के लिए अज़ीम प्रेमजी फाउण्‍डेशन स्‍कूल,टोंक के बच्‍चों ने कुछ खिलौने और प्रयोग बनाए। सबसे दिलचस्‍प बात यह है कि केवल बनाया ही नहीं, उससे उन्‍होंने समझा भी। साथ ही औरों को भी समझाया।

पूनम मेध

सीमा वाही मुखर्जी

उत्तर है - कहानी सुनाकर! और इस लेख का उद्देश्य यह दिखाना है कि कैसे कहानी के माध्यम से प्राथमिक शाला में गणित के मापन के विषयों को सार्थक और प्रासंगिक बनाया जा सकता है।

अज़ीम प्रेमजी फाउण्‍डेशन के ब्‍लाक एक्‍टविटी सेंटर,पीपलू,टोंक ने जयकिशनपुरा के एक स्‍कूल में एक बाल मेले का अायोजन किया। इस मेले में गणित,विज्ञान तथा अन्‍य विषयों को केन्‍द्र में रखकर विभिन्‍न गतिविधियॉं की। बच्‍चों ने इनमें बढ़-चढ़कर भाग लिया। आयोजको ने इसमें शामिल शिक्षकों से भी बात की और मेले के बारे में उनकी राय जानी।

आप भी इस वीडियो को द‍ेखिए। संभव है,इसे देखकर आपको भी कुछ नए विचार सूझें।

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