विज्ञान एवं तकनॉलॉजी

अपनी बात की शुरुआत मैं कुछ बुनियादी बातों के साथ करना चाहूँगी। पहला, राजकीय कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय चिणाखोली में मेरे अलावा दो अन्य शिक्षक हैं। गणित और विज्ञान शिक्षक के रूप में मेरी तैनाती की गई है, परन्तु इसके अतिरिक्त अन्य विषय जैसे भाषा आदि भी मुझे देखने पड़ते हैं। एक शिक्षक के रूप में इन विषयों की तैयारी एवं अध्यापन एक कठिन प्रक्रिया के रूप में दिखाई देता है। समेकित कक्षा शिक्षण इसके लिए उपयोगी हो सकता है। दूसरा, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005 यह सुझाव देती है कि शिक्षक अध्यापन कार्य करते समय बच्चे के परिवेश का खूब इस्तेमाल करे ए

उत्तल लेंस द्वारा उसके सम्मुख रखी वस्तु और उनके प्रतिबिम्बों की सामान्यत: 6 स्थितियां होती है|इनमें
(1) वस्तु अनंत पर स्थित हो
(2) वस्तु अनंत और 2 F के बीच हो
(3) वस्तु 2 F पर हो
(4) वस्तु 2 F और F के बीच हो
(5) वस्तु F पर हो
(6) वस्तु F और P अर्थात ध्रुव के बीच हो
इन सभी 6 स्थितियों में उत्तल लेंस द्वारा 6 अलग-अलग प्रकार से प्रतिबिम्ब बनते है|इन्हें समझने में बच्चों को काफी मुश्किल आती है|

आज जब मैंने कक्षा में प्रवेश किया तो मेरे हाथ में कुछ सामग्री देखकर बच्चे जिज्ञासा से मेरी तरफ देखकर आपस में खुसर-फुसर करने लगे। कि आज शायद हम कुछ नए प्रयोग करेंगे मैम आज बहुत सारा सामान लाई हैं।

मुम्‍बई के होमी भाभा विज्ञान शिक्षण केन्‍द्र ने कक्षा 3 से 5 के लिए विज्ञान की कक्षाओं हेतु 'हलका-फुलका विज्ञान' शृंखला में पाठ्यपुस्‍तकें विकसित की हैं। इसमें कक्षा के लिए पाठ्यपुस्‍तक, कार्यपुस्‍तक तथा शिक्षक निर्देशिका हैं।

कक्षा 4 के लिए विकसित किताबों की पीडीएफ यहाँ मौजूद है। आप डाउनलोड कर सकते हैं।

 

माध्यमिक से लेकर हायर सेकंडरी स्तर तक उत्तल दर्पण हम पढ़ते हैं जिनमें हम उनके उपयोग भी सीखते हैं। उत्तल दर्पण के उपयोग उनके प्रतिबिम्बों की प्रकृति से निर्धारित होते हैं।प्रस्तुत विडियो में उत्तल दर्पण( कॉन्वेक्स मिरर )के उपयोग को कांसेप्ट के साथ कम समय में बताने का प्रयास किया है। इसमें एनीमेशन और पिक्चर्स के द्वारा सरल भी बनाये जाने की कोशिश की गयी है।

सुशील जोशी

पिछले भाग में हमने बात को इस सवाल पर छोड़ा था कि लैमार्क के अर्जित गुणों के हस्तान्तरण और डार्विन की विविधता में से चयन की परिकल्पनाओं के बीच फैसला जैव-विकास की अवधारणा को आगे ले जाने के लिए निर्णायक महत्व का सवाल था। हमने यह भी देखा था कि इस  दुविधा  का  समाधान  सिर्फ अवलोकनों के आधार पर नहीं हो सकता। अब आगे बढ़ते हैं।

13,14एवं 15 अक्‍टूबर,2018 को मोहाली में'विज्ञान एवं विज्ञान शिक्षा' पर संगोष्‍ठी आयोजित की गई थी। इस संगोष्‍ठी का आयोजन अज़ीम प्रेमजी विश्‍वविद्यालय, बेंगलूरु एवं भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान मोहाली,पंजाब ने मिलकर किया था। संगोष्‍ठी हिन्‍दी तथा पंजाबी में भाषाओं में थी।

इस संगोष्‍ठी में प्रस्‍तुत हिन्‍दी परचों के एब्‍स्‍ट्रैक्‍ट की एक पुस्तिका इस अवसर पर जारी की गई। इन एब्‍स्‍ट्रैक्‍ट को पढ़कर इस बात का अन्‍दाजा लगाया जा सकता है कि संगोष्‍ठी में किन विषयों पर विमर्श हुआ।

टूथपेस्‍ट ट्यूब या ऐसी ही किसी ट्यूब के खाली डिब्‍बे से आसानी से एक रेंगने वाला कीड़ा या कैटरपिलर बनाया जा सकता है। देखें कैेसे।

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