विज्ञान एवं तकनॉलॉजी

अंजू दास मानिकपुरी

 फ्रांसिस कुमार

पानी की प्‍लास्टिक बोतल से एक आसान फिरकनी बनाने का तरीका अरविंद गुप्‍ता इस वीडियो में बता रहे हैं। फिरकनी बनाने के लिए बस एक प्‍लास्टिक बोतल और कुछ रंगीन कागज चाहिए होंगे। बोतल काटने के लिए एक कैंची। तो आइए बनाते हैं, यह फिरकनी।

विज्ञान के लोकप्रियकरण के सन्‍दर्भ में अरविन्‍द गुप्‍ता ने जितना काम किया है, शायद ही किसी ओर ने किया हो। किताबें,वीडियो,अनुवाद और फिल्‍में हर विधा में उन्‍होंने ऐसी तमाम सामग्री बनाई है, जिसका उपयोग वर्षों तक होता रहेगा। एकलव्‍य से प्रकाशित उनकी किताब 'खिलौनाें का खजाना' भी इनमें से एक है। हिन्‍दी-अँग्रेजी( दो भाषाओं में एक साथ) में प्रकाशित इस किताब की लगभग दो लाख प्रतियॉं छप चुकी हैं। खिलौनों का खजाना में कबाड़ की तमाम चीजों से विज्ञान के सरल प्रयोग करने की विधियाँ संकलित हैं। इनमें ज्‍यादातर प्रयोग या खिलौने कागज से बनाने के हैं।

विज्ञान के लोकप्रियकरण के सन्‍दर्भ में अरविन्‍द गुप्‍ता ने जितना काम किया है, शायद ही किसी ओर ने किया हो। किताबें,वीडियो,अनुवाद और फिल्‍में हर विधा में उन्‍होंने ऐसी तमाम सामग्री बनाई है, जिसका उपयोग वर्षों तक होता रहेगा। एकलव्‍य से प्रकाशित उनकी किताब 'खिलौनों का बस्‍ता' भी इनमें से एक है। हिन्‍दी-अँग्रेजी( दो भाषाओं में एक साथ) में प्रकाशित इस किताब की लगभग दो लाख प्रतियॉं छप चुकी हैं। खिलौनों का बस्‍ता में कबाड़ की तमाम चीजों से विज्ञान के सरल प्रयोग करने की विधियाँ संकलित हैं।

हमारे शरीर का कवच त्‍चचा,नाखून तथा बालों से मिलकर बनता है। इन तीनों की ही शरीर की रक्षा में बहुत महत्‍वपूर्ण भूमिका होती है। यह पुस्तिका स्‍कूल के विद्यार्थियों तथा शिक्षकों को ध्‍यान में रखकर तैयार की गई है। इसकी भाषा जटिल नहीं है, उसे सहज और सरल रखने की कोशिश की गई है। आप अपने विद्यार्थियों के साथ इसका उपयोग कर सकते हैं।

इसे एकलव्‍य ने प्रकाशित किया है। वहॉं से इसकी छपी हुई प्रति भी खरीदी जा सकती है।

विज्ञान के दो घटक होते हैं - एक ज्ञान का संगठन (विषय वस्तु), और दूसरा, वह प्रक्रिया जिसके द्वारा उस ज्ञान का उत्पादन किया जाता है। विज्ञान के इस दूसरे घटक ‘वैज्ञानिक प्रक्रिया’ से हमें सोचने और दुनिया के बारे में जानने के एक तरीके की समझ मिलती है। लेकिन आमतौर पर, हम केवल विज्ञान का ‘ज्ञान का संगठन’ घटक देखते हैं। वैज्ञानिक अवधारणाएँ हमारे सामने एक कथन के रूप में प्रस्तुत की जाती हैं जैसे - पृथ्वी गोल है, इलेक्ट्रॉनों पर ऋणात्मक आवेश पाया जाता है, हमारे आनुवंशिक कोड हमारे डीएनए में निहित हैं, ब्रह्माण्ड 13.7 अरब साल पुराना है। लेकिन

5 से 7 वर्ष की उम्र के बच्‍चों के लिए समय का शिक्षण : एक ऐसी अवधारणा है जो मानव द्वारा प्रतिदिन इस्‍तेमाल की जाती है और सम्‍भवत: जानवरों व पौधों के जीवन में भी सहज रूप से इसका इस्‍तेमाल होता है। मुर्गे को पता होता है कि उसे बाँग कब देनी है। फूलों को पता होता है कि उन्‍हें कब अपनी पंखुडि़याँ खोलनी हैं। पेड़ों को पता होता है कब अपने पत्‍ते झड़ाने हैं।

स्‍कूल आने से ठीक पहले एक महत्‍वपूर्ण घटक के रूप में समय की अवधारणा से बच्‍चों का सामना होता है।

6 अगस्‍त,1945 दुनिया में एक तबाही के लिए जाना जाता है। तबाही जिसने जापान के हिरोशिमा नगर को परमाणु बम की आग में जलाकर भस्‍म कर दिया था। यह वीडियो उसी भयावह त्रासदी से रूबरू कराता है।

मैं जयपुर के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, नृसिंहपुरा महल में पिछले कुछ दिनों से जा रही थी। वहाँ बच्चों के साथ विज्ञान में कुछ काम करने का प्रयास कर रही थी। विज्ञान विषय का अध्ययन करते समय हम बच्चों में कुछ क्षमताओं के बारे में बात करते हैं- जैसे अवलोकन, दर्ज करना, वर्गीकरण, व्याख्या करना, प्रयोग करना, निष्कर्ष निकालना आदि। इसी को आधार बनाते हुए मैंने बच्चों के साथ एक खेल खेलने का विचार किया। मैंने अपने थैले में नाना प्रकार की चीजों को एकत्रित कर लिया। इनमें पेंसिलें, पेन, रबर, कागज, एल्युमिनियम फोइल, कटोरी, चाबी, पत्ते, फ़ूल, लकड़ी

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