विज्ञान एवं तकनॉलॉजी

माध्‍यमिक विज्ञान कक्षाओं में विद्यार्थियों के शिक्षण की प्रगति किस तरह हो रही है, अगर उसका आकलन करना हो तो कैसे करेंगे। यह वीडियो इसका एक उदाहरण है।

नए सत्र में आज पहली बार कक्षा आठवीं में दाखिल हुआ। कुछ औपचारिकताओं के बाद विद्यार्थियों ने विज्ञान विषय पढ़ने की इच्छा व्यक्त की। विज्ञान का पहला पाठ ‘सूक्ष्म जीवों का संसार’ पर पूर्व ज्ञान की हल्की बातचीत से शुरू हुआ। जैसे सूक्ष्म का अर्थ, जीवों का अर्थ। व्यवहारिक उदाहरणों व अनुभवों के आधार पर चर्चा शुरू हुई तो विद्यार्थी शैवाल व कवक पर ही मोटी समझ बना पा रहे थे। अन्य उदाहरणों के बाद भी विषाणु जीवाणु व प्रोटोजोआ ‘भूत’ (जो हमें नग्न आँखों से नहीं दिखाई देते) ही बने हुए थे।

पिछले कुछ समय से विभिन्न प्रशिक्षणों व कार्यशालाओं में सतत् एवम् व्यापक मूल्यांकन की अवधारणा पर चर्चा होती रही है। राष्ट्रीय पाठ्यचर्या-2005 की संस्तुतियों से इस विचार को बल मिला है। सामान्यतः हम सभी मूल्यांकन प्रक्रिया को प्राप्त दिशा-निर्देशों के अनुसार सम्पन्न करते रहते हैं लेकिन मूल्यांकन व शिक्षण हेतु बार-बार पुनः सोचने समझने की आवश्यकता है। पूर्व में शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में समझा जाता था कि शिक्षक सर्वज्ञाता है, शिक्षक एक ज्ञान से भरा बर्तन है और विद्यार्थी एक खाली बर्तन है या कोरी स्लेट है जिसे शिक्षक को अप

मुकेश मालवीय

कुछ अवलोकन एवं चुनौतियाँ

बाड़मेर में विज्ञान मेले का आयोजन किया जाना था।  इसकी तैयारी ग्‍यारह दिन पहले शुरू की गई। इस दौरान जो अनुभव हुए उन्‍हें मैंने दिनवार दर्ज करने की कोशिश की है।

गम्‍भीर शिक्षकों ने हमेशा ही यह सवाल उठाया है कि पैसों और साधनों के अभाव में भारत में क्रियाओं द्वारा विज्ञान कैसे संभव होगा। दुनिया भर का यही अनुभव है - रेडीमेड विज्ञान की किट्स कभी उपयोग में नहीं लाई जातीं। उन पर धूल जमती है। जो मॉडल बच्चे और शिक्षक खुद मिलकर बनाते हैं वही अधिक उपयोगी होते हैं। सस्ते साज सामान से विज्ञान के सरल मॉडल बनाने की अपार संभावनाएँ हैं। द्वितीय महायुद्ध में तमाम देश तबाह हुए। आर्थिक तंगी में कई देशों ने स्कूल इमारतों के निर्माण का काम तो पूरा किया, परन्तु उसके बाद उनके पास विज्ञान की प्रयोगशालाएँ रचने के ल

घर के कबाड़ से बहुत आसानी से एक छोटी पवनचकरी बनाकर पवनऊर्जा का महत्‍व समझाया जा सकता है। तो खिलौने का खिलौना और विज्ञान का प्रयोग भी।

विज्ञान शिक्षण के क्रम में विज्ञान की गतिविधियाँ करना और सीखना – यह तो कोई नई बात नहीं है, परन्तु यह पढ़कर और देखकर आपको जरूर आश्चर्य हो सकता है कि एक मेले में विज्ञान की गतिविधियों के माध्यम से बच्चों ने 15 से 20 वैज्ञानिक अवधारणाओं को समझा और अपने ज्ञान का सृजन किया।

माध्‍यमिक विज्ञान की एक कक्षा में शिक्षिका अपने पाठ को कुछ तरह पढ़ा रही हैं कि विज्ञान की अवधारणाऍं सभी विद्यार्थियों को स्‍पष्‍ट हो सकें। शिक्षिका इस दौरान विद्यार्थियाें के समूह बनाकर भी काम करवाती हैं।

आप भी देखें...शायद यह तरीका आपके काम का भी हो।

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