भाषा

घोंसला बनाने में, हम यूँ मशगूल हो गए !

उड़ने को पंख भी थे, ये भी भूल गए !!

कहानी : “गाँव का लड़का” l

लेखक जेन कोवेन–फ्लैचर (हमारे देश की तरह अफ्रीका के गाँवों में भी लोग मिल-जुलकर रहते हैं। पूरा गाँव एक परिवार की तरह होता हैं। यह उसी भाई चारे की कहानी है)।

इस कहानी को चुनने का उद्देश्य विद्यार्थियों के साथ मिलकर उनके परिवेश के विषय में जानना।

हर बार की तरह इस बार भी नया शिक्षा सत्र अप्रैल में शुरु हुआ। पर यह सत्र कुछ विशेष था। उत्तराखण्ड सरकार ने इसी साल से सभी शासकीय विद्यालयों में कक्षा एक  से  लेकर  आठवीं  तक एन.सी.ई.आर.टी.

हिन्दी शिक्षण

By kku | अगस्त 9, 2019

मेरा यह मानना है कि हिन्दी के अध्यापक को अग्रेज़ी भाषा और साहित्य का भी ज्ञान होना चाहिए तभी वह अपने विद्यार्थियों को वैश्विक जगत से जोड़ पाएगा और विद्यार्थियों में हिन्दी भाषा के प्रति रुचि विकसित करने में सक्षम हो पाएगा ।

त्रिपुरारी शर्मा वरिष्‍ठ रंगकर्मी हैं। वे नेशनल स्‍कूल ऑफ ड्रामा में प्राध्‍यापक हैं। उन्‍होंने बच्‍चों के लिए कई नाटकों का निर्देशन किया है। वे बच्‍चों के लिए कहानियाँ भी लिखती हैं। उनकी एक कहानी को रूमटूरीड ने चित्रकथा के रूप में प्रकाशित किया है। यह कहानी है भभो भैंस। इसकी पीडीएफ यहॉं से डाउनलोड की जा सकती है।

मनोहर चमोली  'मनु' शिक्षक हैं। उत्‍तराखण्‍ड के पहाड़ों में रहते हैं। वे बच्‍चों के लिए कहानियाँ भी लिखते हैं। छोटे बच्‍चों के लिए लिखी गई उनकी एक कहानी 'चलता पहाड़' को रूम टू रीड ने चित्रकथा के रूप में प्रकाशित किया है। उसकी पीडीएफ यहाँ से ली जा सकती है।

मुकेश मालवीय शिक्षक हैं। वे बच्‍चों के लिए कहानियाँ भी लिखते हैं। छोटे बच्‍चों के लिए लिखी गई उनकी एक कहानी को रूम टू रीड ने चित्रकथा के रूप में प्रकाशित किया है। उसकी पीडीएफ यहाँ से ली जा सकती है।

अज़ीम प्रेमजी फाउण्‍डेशन, देहरादून, उत्‍तराखण्‍ड द्वारा प्रकाशित पत्रिका का फरवरी-अप्रैल 2019 अंक।

संज्ञा उपाध्‍याय की तीन बाल कविताएँ इस वीडियो में हैं। ये प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी हैं। इनमें से एक कविता कुछ इस तरह है :

मकड़ी जाला बुनती है
नहीं किसी की सुनती है

पूरे घर को देखभाल कर
कोने-अँतरे चुनती है

दम साधे जाले में बैठी
गुर शिकार के गुनती है

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