सिरोही

अज़ीम प्रेमजी स्‍कूल, सिरोही, राजस्‍थान की पत्रिका 'समय' के जनवरी,2019 अंक की  पीडीएफ यहाँ उपलब्‍ध है। पत्रिका में स्‍कूल के शिक्षकों के लेख तथा स्‍कूल की गतिविधियों को प्रकाशित किया गया है।

अज़ीम प्रेमजी स्‍कूल, सिरोही, राजस्‍थान हर दो माह में एक पत्रिका का प्रकाशन करता है। इसमें स्‍कूल के शिक्षक साथियों के अनुभव प्रकाशित होते हैं। इसका ताजा अंक यहॉं है।

वर्ष 2009 में राजस्‍थान में अपने शैक्षिक काम के प्रति गम्भीर शिक्षकों को प्रोत्‍साहित करने के लिए ‘बेहतर शैक्षणिक प्रयासों की पहचान’ शीर्षक से राजस्‍थान प्रारम्भिक शिक्षा परिषद तथा अज़ीम प्रेमजी फाउण्‍डेशन द्वारा संयुक्‍त रूप से एक कार्यक्रम की शुरुआत की गई। 2010 तथा 2011 में इसके तहत सिरोही तथा टोंक जिलों के लगभग 50 शिक्षकों की पहचान की गई। इसके लिए एक सुगठित प्रक्रिया अपनाई गई थी। विष्‍णुगोपाल साध वर्ष 2010-11 में बेहतर शैक्षणिक प्रयास के लिए चुने गए हैं।  टीचर्स ऑफ इण्डिया पोर्टल टीम ने विष्‍णुगोपाल साध से उनके काम तथा शि

वर्ष 2009 में राजस्‍थान में अपने शैक्षिक काम के प्रति गम्भीर शिक्षकों को प्रोत्‍साहित करने के लिए ‘बेहतर शैक्षणिक प्रयासों की पहचान’ शीर्षक से राजस्‍थान प्रारम्भिक शिक्षा परिषद तथा अज़ीम प्रेमजी फाउण्‍डेशन द्वारा संयुक्‍त रूप से एक कार्यक्रम की शुरुआत की गई। 2010 तथा 2011 में इसके तहत सिरोही तथा टोंक जिलों के लगभग 50 शिक्षकों की पहचान की गई। इसके लिए एक सुगठित प्रक्रिया अपनाई गई थी। नारायण सिंह देवड़ा वर्ष 2010-11 में बेहतर शैक्षणिक प्रयास के लिए चुने गए हैं।  टीचर्स ऑफ इण्डिया पोर्टल टीम ने नारायण सिंह

वर्ष 2009 में राजस्‍थान में अपने शैक्षिक काम के प्रति गम्भीर शिक्षकों को प्रोत्‍साहित करने के लिए ‘बेहतर शैक्षणिक प्रयासों की पहचान’ शीर्षक से राजस्‍थान प्रारम्भिक शिक्षा परिषद तथा अज़ीम प्रेमजी फाउण्‍डेशन द्वारा संयुक्‍त रूप से एक कार्यक्रम की शुरुआत की गई। 2010 तथा 2011 में इसके तहत सिरोही तथा टोंक जिलों के लगभग 50 शिक्षकों की पहचान की गई। इसके लिए एक सुगठित प्रक्रिया अपनाई गई थी। मुकेश कुमार सोनी वर्ष 2010-11 में बेहतर शैक्षणिक प्रयासके लिए चुने गए हैं।  टीचर्स ऑफ इण्डिया पोर्टल टीम ने मुकेश से उनके काम तथा शिक्षा से सम्‍बन्धित म

कान्ति लाल मीणा का कहना है कि, 'अध्‍यापन में नए तरीकों को आजमाना चाहिए और उनकी सफलता को आँकते हुए उन्‍हें अपने पढ़ाने के तरीकों में शामिल कर एक और नए तरीके की खोज में जुट जाना चहिए।'

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एकल अध्‍यापक विद्यालय में शिक्षक की मंशा सचमुच विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास की हो, तो वह अपने सीमित संसाधनों तथा क्षमता का उपयोग करते हुए इसे अंजाम दे सकता है। सिरोही जिले के कूकड़ीखेड़ा प्राथमिक विद्यालय के नेतीराम मीणा ने ऐसा ही हौसला दिखाया है।

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गोविन्‍द राम सिरोही ,राजस्‍थान जिले के एक सुदूर कस्‍बे में अपने विद्यालय के अदद दो अध्‍यापकों में से एक हैं। अपने विद्यालय के विद्यार्थियों को अँग्रेजी सिखाने के लिए जो प्रयास उन्‍होंने किए, उन्‍हें जानकर यह कहा जा सकता है कि अगर चाहे तो एक अकेला चना भी भाड़ फोड़ सकता है।

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शिक्षण की समस्याएँ हों, विद्यालय में संसाधनों की कमी हो या फिर समुदाय से जुड़ने की बात हो इन सबसे जूझने तथा हल करने के नए तरीके ढूँढना एक शिक्षक होने के नाते मुकेश पुरोहित का जुनून है।

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आमतौर पर हम सभी अव्‍यवस्‍थाओं और समस्‍याओं के बारे में ही बात करते रहते हैं। किन्‍तु जब भी कोई इनसे टकराने या इनके समाधान के बारे में सोचता है तो वह जरूर सफल होता है। तलसाराम मीणा ने भी अपने विद्यालय में एक ऐसा छोटा ही सही पर सकारात्‍मक कदम उठाया और उन्‍हें इसमें सफलता भी मिली और हौसला भी। वे कहते हैं, ‘मैं शैक्षिक नवाचारों के लिए हमेशा प्रयासरत रहूँगा।’ आइए जानते हैं उनके प्रयास के बारे में।

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