सत्‍यों स्‍कूल

इस स्कूल तक पहुँचने की राह आसान नहीं है। इसके बावजूद शिक्षक अल्मोड़ा से रोज यहाँ पढ़ाने आते हैं। मेरे ख्याल में शहर के केन्‍द्र में बैठा कोई व्यक्ति इस परिदृश्य की कल्पना भी नहीं कर सकता है, जब तक वह यहाँ ना आए और पहाड़ों के बीच गूँजती इन बच्चों की खिलखिलाहटों को ना सुने।

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