संख्याएँ

‘दिगन्तर शिक्षा एवं खेलकूद समिति’, जयपुर ने गणित बोध पर 15 पुस्तिकाओं की एक शृंखला तैयार की है। ये पुस्तिकाएँ प्राथमिक स्तर की शिक्षा के शुरुआती लगभग तीन साल के समयकाल के लिए प्रयोग में लाई जा सकती हैं। इन में गणित की चार मूलभूत संक्रियाओं तथा सरल समस्या-समाधान में उन के प्रयोग को केन्द्र में रखा गया है। ध्यान रहे कि ये पुस्तिकाएँ ही अभ्यास-पुस्तक भी हैं। शिक्षक इस सामग्री और इस के विचारों को आत्मसात कर लेने के बाद अपनी कक्षा में प्रयोग कर सकते हैं, या फिर इस में प्रस्तुत तरीकों को आधार बना कर शिक्षण कर सकते हैं।
आइए देखें, शृंखला की पुस्तक-3 किस बारे में है।

प्राथमिक स्कूल के स्तर पर गणित की वैज्ञानिक समझ बच्चों को ठोस नींव प्रदान करती है। इससे वे अपनी शिक्षा के बाद के चरणों में ऊँचे दर्जे के, ज़्यादा जटिल और निराकार गणित तथा विज्ञान को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं। यह कैसे सम्भव है, यही दर्शाता है यह लेख।

अपना यह अनुभव हमें होशंगाबाद (मध्य प्रदेश) से महेश कुमार बसेड़ि‍या ने भेजा है। इस अनुभव में गणित की अवधारणा पर हो रही चर्चा तो महत्वपूर्ण है, साथ ही यह भी ध्‍यान देने योग्‍य है कि वे चर्चा किस तरह करा रहे हैं। उनका तरीका संवादात्‍मक है और कोशिश है कि वहाँ उपस्थित शिक्षक चर्चा में पूरी तरह भागीदार हो सकें।

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