शिक्षार्थी

विद्यालय की अवधारणा में बहुत सारी बातों, विचारों व प्रक्रियाओं को शामिल किया गया है। अक्सर उन पर शिक्षक समाज में हर अवसर पर बात करने के अवसर भी निकाले जाते रहे हैं। विद्यालय की संरचना को और ठोस रूप देने या यूँ कहा जाए, कि विद्यालय के आदर्श स्वरूप को परिभाषित करने को हर शिक्षक तत्पर भी दिखाई देता है क्योंकि शिक्षक तभी शिक्षक है जब विद्यालय है। नहीं तो शिक्षक का अपना कोई स्वरूप समाज में बनता दिखाई नहीं देता। एक समय था जब शिक्षक का स्वरूप समाज में अलग तरह का था। विद्यालय के भौतिक स्वरूप व संसाधनों का इतना महत्व नहीं था

हमारे देश में शिक्षा के क्षेत्र में कई जगह प्रेरणादायी काम हो रहे हैं । इनमें से बहुत से ऐसे हैं जो हमारे सामने नहीं आ पाते। ऐसा ही उल्‍लेखनीय काम हरियाणा के पानीपत जिले के समालखा ब्लॉक में होता रहा है। यहाँ स्कूली शिक्षा बीच में ही छोड़ गए या पूर्ण रूप से उससे वंचित बच्चों के लिए अनौपचारिक शिक्षा की एक परियोजना ‘जीवनशाला’ के नाम से 1997 में प्रारम्भ की गई थी। इसमें पानीपत के साक्षरता अभियान

19439 registered users
7743 resources