शिक्षक डायरी

किसी कार्य को सुचारू रूप से करने के लिए अभिलेखीकरण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। बिना अभिलेखीकरण के किसी कार्य को पूरी प्रमाणिकता के साथ करना लगभग असम्भव हो जाता है। एनसीएफ 2005 में अध्यापकों से की गईं अपेक्षाएँ बिना अध्यापक डायरी के पूरी नहीं हो सकती। बिना डायरी की सहायता के विद्यार्थियों को उनकी आवश्यकतानुसार शिक्षित नहीं किया जा सकता है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि अध्यापक डायरी अध्यापक की विश्वसनीय सहयोगी होती है। एनसीएफ 2005 की अपेक्षाओं को पूरा करने में अध्यापक डायरी “मील का पत्थर” साबित हो रही है।

कल्‍याणसिंह मनकोटी उत्‍तराखण्‍ड के एक सुदूर गॉंव के युवा अध्‍यापक हैं। अपने विद्यालय में सीमित संसाधनों और समुदाय के सहयोग से वे जो कुछ कर रहे हैं,उसके बारे में जानकर लगता है कि हम गिजुभाई के प्रतिरूप से मिल रहे हैं। वास्‍तव में हमें तो ऐसा कहने में कोई संकोच नहीं है। बाकी आप उनकी यह डायरी पढ़कर खुद ही तय कर सकते हैं। -सम्‍पादक

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हम सब जानते हैं कि ऐसे शिक्षकों की कमी नहीं है जो अपने विषयों के अच्छे ज्ञाता होते हैं और कक्षाओं में मन लगाकर बहुत अच्छा पढ़ाते भी हैं। शिक्षण काल में इस सन्दर्भ में बहुत बार सुख-दुख भी पाते हैं। शिक्षकों, अभिभावकों और विद्यार्थियों के सम्पर्क में उन्हें कई प्रकार के खट्टे-मीठे अनुभव भी होते हैं। लेकिन अनुभवों का स्वरूप ठीक से पहचानने वाले, उनकी उपयोगिता, आवश्यकता और महत्ता को समझकर दूसरों तक पहुँचाने का काम करने व

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