विज्ञान

अपने आस-पास ‘दिगन्तर’ द्वारा प्राथमिक स्तर के बच्चों के लिए प्रकाशित पुस्तकों की लड़ी है।
इस लड़ी की चौथी पुस्तक में बच्चों को कुछ-कुछ विज्ञान सम्बन्धी बातों की ओर ले जाया गया है। इन पुस्तकों में दिए गए अभ्यास और प्रश्न करते हुए बच्चे अपनी भाषा सम्बन्धी दक्षताओं पर भी काम कर रहे होते हैं, क्योंकि उन्हें चर्चा करने और लिखने, दोनों तरह का मौका मिलता है।

विज्ञान में खोज का अर्थ क्‍या है ? क्‍या खोजने की कोई विधि या प्रक्रिया होती है ? वह कैसे काम करती है?

विज्ञान क्‍या और उसकी प्रक्रिया में कौन-से चरण शामिल हैं ? क्‍या विज्ञान की कोई सर्वमान्‍य परिभाषा हो सकती है ?

विज्ञान सीखने की एक प्रक्रिया है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण हमें अपने परिवेश को समझने और परखने का अवसर देता है।

क्या विज्ञान के शिक्षक को चाहिए कि वह स्वयं को केवल विषय के शिक्षण तक सीमित रखे या उसे विषय की सीमाओं को भी लांघना चाहिए? यह लेख इस प्रश्न और इसी प्रकार के अन्य प्रश्नों से जूझता है और हमें सोचने पर मजबूर करता है।
विज्ञान-शिक्षण में तथ्य महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं, उन की अहमियत होती है। लेकिन जिस कक्षा में रटन्त को हतोत्साहित किया जाता है, उस कक्षा में ज्ञानार्जन एक दिलचस्प गतिविधि बन जाता है। बच्चों को प्रकृति के आधारभूत सम्बन्धों और सामंजस्य की कद्र करने की सीख मिलनी चाहिए, ताकि वे इस के रोमांच को महसूस कर सकें। चुनौती प्रश्न उठाने और जवाब ढूँढने की है। उद्देश्य होना चाहिए कि विज्ञान को प्रस्थान बिन्दु बना कर यह दर्शाया जाए कि सीमाओं में बन्धे प्रश्नों के जवाब भी सीमाओं में ही बन्धे होंगे और इस के नतीजे में इन्सान भी सीमाओं में बन्ध जाते हैं। बच्चों को इस काबिल बनाना चाहिए कि वे सम्पूर्ण तस्वीर को देख-समझ पाएँ, और उस से भी आगे तक जा पाएँ।

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