विज्ञान

आज जब मैंने कक्षा में प्रवेश किया तो मेरे हाथ में कुछ सामग्री देखकर बच्चे जिज्ञासा से मेरी तरफ देखकर आपस में खुसर-फुसर करने लगे। कि आज शायद हम कुछ नए प्रयोग करेंगे मैम आज बहुत सारा सामान लाई हैं।

मुम्‍बई के होमी भाभा विज्ञान शिक्षण केन्‍द्र ने कक्षा 3 से 5 के लिए विज्ञान की कक्षाओं हेतु 'हलका-फुलका विज्ञान' शृंखला में पाठ्यपुस्‍तकें विकसित की हैं। इसमें कक्षा के लिए पाठ्यपुस्‍तक, कार्यपुस्‍तक तथा शिक्षक निर्देशिका हैं।

कक्षा 4 के लिए विकसित किताबों की पीडीएफ यहाँ मौजूद है। आप डाउनलोड कर सकते हैं।

 

सुशील जोशी

पिछले भाग में हमने बात को इस सवाल पर छोड़ा था कि लैमार्क के अर्जित गुणों के हस्तान्तरण और डार्विन की विविधता में से चयन की परिकल्पनाओं के बीच फैसला जैव-विकास की अवधारणा को आगे ले जाने के लिए निर्णायक महत्व का सवाल था। हमने यह भी देखा था कि इस  दुविधा  का  समाधान  सिर्फ अवलोकनों के आधार पर नहीं हो सकता। अब आगे बढ़ते हैं।

13,14एवं 15 अक्‍टूबर,2018 को मोहाली में'विज्ञान एवं विज्ञान शिक्षा' पर संगोष्‍ठी आयोजित की गई थी। इस संगोष्‍ठी का आयोजन अज़ीम प्रेमजी विश्‍वविद्यालय, बेंगलूरु एवं भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान मोहाली,पंजाब ने मिलकर किया था। संगोष्‍ठी हिन्‍दी तथा पंजाबी में भाषाओं में थी।

इस संगोष्‍ठी में प्रस्‍तुत हिन्‍दी परचों के एब्‍स्‍ट्रैक्‍ट की एक पुस्तिका इस अवसर पर जारी की गई। इन एब्‍स्‍ट्रैक्‍ट को पढ़कर इस बात का अन्‍दाजा लगाया जा सकता है कि संगोष्‍ठी में किन विषयों पर विमर्श हुआ।

पूनम मेध

अज़ीम प्रेमजी फाउण्‍डेशन के ब्‍लाक एक्‍टविटी सेंटर,पीपलू,टोंक ने जयकिशनपुरा के एक स्‍कूल में एक बाल मेले का अायोजन किया। इस मेले में गणित,विज्ञान तथा अन्‍य विषयों को केन्‍द्र में रखकर विभिन्‍न गतिविधियॉं की। बच्‍चों ने इनमें बढ़-चढ़कर भाग लिया। आयोजको ने इसमें शामिल शिक्षकों से भी बात की और मेले के बारे में उनकी राय जानी।

आप भी इस वीडियो को द‍ेखिए। संभव है,इसे देखकर आपको भी कुछ नए विचार सूझें।

एक पॉंच साल का बच्‍चा जब विज्ञान का प्रयोग करता है, तो न केवल वह उसे समझता है, बल्कि साथ में उसे औरों को भी समझाता है। ऐसा ही एक मजेदार वीडियो।

राष्‍ट्रीय विज्ञान दिवस पर कुछ करें न करें, अरविन्‍द गुप्‍ता को जरूर सुना जाना चाहिए। इस बरस उन्‍हें पद्मश्री से सम्‍मानित किया गया है। उनसे बेहतर विज्ञान का प्रचारक शायद ही आज कोई हो। वे केवल विज्ञानकर्मी नहीं हैं, उनमें एक चिंतक और सजग शिक्षाविद भी है।

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