वरदेनहल्‍ली

हमारे सरकारी स्कूलों के साथ हजारों लोग कार्य कर रहे हैं जो विद्यार्थियों के लिए अधिगम की परिस्थितियों और मनोवैज्ञानिक परिणामों में सुधार लाने में लगे हुए हैं। इन समर्पित लोगों के लिए मेरे हृदय में गहरी सराहना और प्रशंसा है। मैं खुद एक गैर-औपचारिक निजी स्कूल सेण्टर फॉर लर्निंग (सी.एफ.एल.) में पढ़ाती हूँ और हममें से अधिकांश शिक्षक और विद्यार्थी शहरी पृष्ठभूमि के हैं। सी.एफ.एल. के अनेक उद्देश्यों में से एक है - अपने जीवन से बाहर के जीवन और दुनिया के साथ जुड़ना, समय-समय पर अपनी सुख-सुविधा की स्थिति और इच्छा-सन्तुष्टि के भाव से बाहर निकलना। इस कार्य को हम कई प्रकार से करते हैं जिनमें से एक है पास के गाँव के प्राथमिक स्कूल के विद्यार्थियों के साथ जुड़ना। शुरू से ही हमने देखा है कि वरदेनहल्ली स्कूल के बच्चे भी इन अन्तःक्रियाओं को महत्त्वपूर्ण समझते हैं और इसलिए हम हर साल उनके साथ मिल-जुलकर कार्य करते हैं। इन विविध और समृद्ध मुलाकातों में हमने जो देखा और सीखा, आशा है कि मैं इस लेख में उनमें से कुछ अनुभव आपके साथ साझा कर पाऊँगी। लेकिन यह तय है कि हम सरकारी स्कूलों के साथ पूर्णकालिक कार्य करने वालों के अनुभवों की न तो गहनता को साझा कर सकते हैं और न ही व्यापकता को। इसलिए मैं बड़ी विनम्रता के साथ इन बिन्दुओं को आपके समक्ष रख रही हूँ।

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