राजेश जोशी

जिन्‍दगी ने कभी इतना वक्त ही नहीं दिया कि वो क्या चाहते हैं, यह सोचा जा सके। बस जो सामने आता गया, उसी रास्ते पर चलते गए। ‘मैं यह नहीं कह रहा कि मैं टीचर नहीं बनना चाहता था लेकिन मुझे यह भी नहीं पता था कि मैं टीचर बनना चाहता हूँ।’

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