राजसमन्‍द

साल 2016 के सर्वे पर आधारित ‘असर’ की रिपोर्ट यह दावा कर रही है कि राजस्थान में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 6 से 14 साल की उम्र के बच्चों नामांकन बढ़ा है। यही रिपोर्ट यह दावा भी कर रही है कि साल 2014 की तुलना में निजी स्कूलों में जाने वाले बच्चों की संख्या कम हुई है। इन दावों में अगर सच्चाई है तो इसका श्रेय सरकारी प्रयासों को तो जाता ही है, लेकिन इन प्रयासों को जमीन पर लागू करने वाले मुरारी जी और उनके साथियों जैसे हजारों शिक्षकों को भी जाता है। जो अपने स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को मुफ्त की बोलरो में बैठकर निजी स्कूलों की तरफ जाने से रोकने के लिए अपनी ओर से अतिरिक्त प्रयास कर रहे हैं।

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