रश्मि वर्मा

अपने पढ़ाने के तरीकों के बारे में रश्मि बताती हैं कि वे बच्चों को पहले मौखिक रूप से बोलना और बातें करना सिखाती हैं, फिर लिखना और पढ़ना साथ-साथ सिखाती हैं। अक्षर ज्ञान कराने के लिए तरह-तरह के कार्ड बनाकर रखे गए हैं। कविताएँ और कहानियाँ तो रोज ही सुनाती हैं, इसके अलावा कुछ कविताओं के जरिये गिनती या अन्य बातें भी सिखाती हैं। बच्चों को गणित सिखाने के लिए आड़ू-खुबानी की गुठलियों का पयोग किया जाता है। इस विद्यालय में कक्षा एक से ही बच्चों को जोड़, घटाव, गुणा और भाग करना सिखाया जाता है। यहाँ के लगभग सभी बच्‍चों की लिखावट आश्चर्यजनक रूप से साफ और बहुत सुंदर है। शिक्षण विधि को रुचिकर तथा अधिक उपयोगी बनाने के लिए स्थानीय परिवेश पर आधारित शिक्षण सहायक सामग्री विकसित की गई जिससे बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि और अधिक प्रगाढ़ हुई है। बाल अखबार तथा बाल पुस्तकालय को संकलित कर तथा स्थानीय तीज-त्योहारों को आधार मानकर शिक्षण कार्य को नवीनता प्रदान की गई। ‘सर्व शिक्षा’ परियोजना के अन्‍तर्गत विद्यालय में शिक्षिकाओं, बच्चों तथा समुदाय के कुछ उत्साही व्यक्तियों द्वारा मिलकर अपने परिवेश से बालोपयोगी और पाठ सहयोगी सामग्री तैयार की गई।

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