यूनीसेफ

बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए यूनीसेफ ने मीना नामक एक चरित्र की रचना की है।
स्‍कूलों में मीना मंच बनाए गए हैं। मीना को केन्‍द्रीय पात्र के रूप में रखकर विभिन्‍न चित्रकथाएं रची गई हैं। वीडियो भी बनाए गए हैं। ये सब बहुत लोकप्रिय हुए हैं।

ऐसा ही एक उपयोगी वीडियो यहॉं प्रस्‍तुत है। सहज और सरल कहानी के माध्‍यम से यह बताने की कोशिश है कि लड़कियों को पढ़ना चाहिए, चाहे वे अपने घर में हों या कहीं और।

इतनी सुन्‍दर फिल्‍म मैंने आज तक नहीं देखी। 12 मिनट में शिक्षा का वह दर्शन इसमें फिल्‍माया गया है, जिसे शायद किसी और को समझाने में 12 घण्‍टे लगें। इसे वर्षों पहले, इतने पहले कि जब ब्‍लैक एंड व्‍हाइट का जमाना था, तब एनसीईआरटी के शिक्षा प्रौद्योगिकी केन्‍द्र ने यूनिसेफ और यूनेस्‍को की मदद से बनाया था। यूटयूब पर इसे जाने-माने जनविज्ञानी अरविन्‍द गुप्‍ता ने अपलोड किया है।
 

यूनीसेफ की एक परियोजना के तहत देश के कई राज्‍यों में प्राथमिक विद्यालयों में मीना मंच की स्‍थापना की गई है। इसका उद्देश्‍य बालिका शिक्षा को प्रोत्‍साहित करना है। मीना को केन्‍द्रीय पात्र बनाकर कई कहानियों तथा फिल्‍मों की रचना भी की गई है। उत्‍तराखण्‍ड में देवलथल के राजकीय इण्‍टर कालेज के अध्‍यापक महेश चन्‍द्र पुनेठा ने मीना मंच पर आयोजित एक प्रशिक्षण  शिविर में भाग लिया। शिविर के अनुभवों को उन्‍होंने अपनी डायरी में लिपिबद्ध किया। यहाँ प्रस्‍तुत हैं उनकी डायरी के कुछ सम्‍पादित अंश।

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