महावीर प्रसाद जोशी

यह देखने में आता है कि सरकार अपने स्‍तर पर विद्यालय तथा शिक्षा के लिए विभिन्‍न परियोजनाएँ संचालित करती है। लेकिन जमीनी स्‍तर पर उनको लागू करने में किसी की रुचि नहीं होती है। अगर वे लोग जिनकी जिम्‍मेदारी लागू करने की है इसमें रुचि लें तो बदलाव में देर तो होगी, पर अंधेर नहीं होगा। ऐसा ही एक उदाहरण बनता है महावीर जोशी के काम से। उनका कहना है,' इन सब प्रयासों की वजह से समुदाय का लगाव शाला के प्रति बढ़ने लगा। शाला द्वारा सहयोग माँगने पर एस.डी.एम.सी. सदस्यों द्वारा धनराशि एकत्रित कर किसी काम को पूर्ण करने की भावना का विकास हुआ। आज शाला भौतिक संसाधनों से परिपूर्ण है। समुदाय का शाला से जुड़ाव व सहयोगात्मक रवैया बना है। वे बच्चों को नियमित शाला भेजने लगे हैं। शाला द्वारा आयोजित बैठकों में समय-समय पर भाग लेकर अपने सुझाव व सहयोग देने लगे हैं।'

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