बेहतर शैक्षणिक प्रयास

जब किसी कार्य को पूरी मेहनत व लगन से किया जाए तो उस कार्य में सफलता अवश्य हासिल होती है। अध्ययन कार्य करवाते समय हमें समस्त बच्चों का सहयोग लेते हुए एवं बच्चों की भावना को समझते हुए शिक्षण कार्य करवाना चाहिए।

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मेरा यह मंतव्य है कि यदि शिक्षक चाहे तो विद्यार्थियों को बहुत ही योग्‍य बना सकता है। कहते हैं कि जिस शिक्षक का लक्ष्य स्पष्ट है उसको सफलता मिलना असम्भव नहीं है।

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वर्ष 2009 में राजस्‍थान में अपने शैक्षिक काम के प्रति गम्भीर शिक्षकों को प्रोत्‍साहित करने के लिए ‘बेहतर शैक्षणिक प्रयासों की पहचान’ शीर्षक से राजस्‍थान प्रारम्भिक शिक्षा परिषद तथा अज़ीम प्रेमजी फाउण्‍डेशन द्वारा संयुक्‍त रूप से एक कार्यक्रम की शुरुआत की गई। 2010 तथा 2011 में इसके तहत सिरोही तथा टोंक जिलों के लगभग 50 शिक्षकों की पहचान की गई। इसके लिए एक सुगठित प्रक्रिया अपनाई गई थी। विष्‍णुगोपाल साध वर्ष 2010-11 में बेहतर शैक्षणिक प्रयास के लिए चुने गए हैं।  टीचर्स ऑफ इण्डिया पोर्टल टीम ने विष्‍णुगोपाल साध से उनके काम तथा शि

वर्ष 2009 में राजस्‍थान में अपने शैक्षिक काम के प्रति गम्भीर शिक्षकों को प्रोत्‍साहित करने के लिए ‘बेहतर शैक्षणिक प्रयासों की पहचान’ शीर्षक से राजस्‍थान प्रारम्भिक शिक्षा परिषद तथा अज़ीम प्रेमजी फाउण्‍डेशन द्वारा संयुक्‍त रूप से एक कार्यक्रम की शुरुआत की गई। 2010 तथा 2011 में इसके तहत सिरोही तथा टोंक जिलों के लगभग 50 शिक्षकों की पहचान की गई। इसके लिए एक सुगठित प्रक्रिया अपनाई गई थी। नारायण सिंह देवड़ा वर्ष 2010-11 में बेहतर शैक्षणिक प्रयास के लिए चुने गए हैं।  टीचर्स ऑफ इण्डिया पोर्टल टीम ने नारायण सिंह

नासिर जी कहते हैं, 'प्राथमिक विद्यालयों में अध्यापक का ठहराव कम से कम चार या पाँच वर्ष आवश्यक है ताकि वे अर्जित लक्ष्यों की प्राप्ति कर सकें। बच्चों को सहज बनाने के लिए अनवरत प्रयास की आवश्यकता होती है। इसलिए राज्य सरकार को इस बात पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। बच्चा कक्षा एक में प्रवेश लेकर सीखने की प्रक्रिया से जुड़ता है और चार-पाँच साल तक उस विद्यालय में ही सीखने की प्रक्रिया से गुजरता रहता है। एक सक्रिय अध्यापक का अन्तिम लक्ष्य चार-पाँच साल में जाकर ही पूरा हो पाता है क्योंकि बच्चा कक्षा 5 के बाद अन्य विद्यालय में चला जाता है।'

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एक सफल एवं अनुभवी शिक्षक की यही पहचान है कि वह विद्यार्थियों के स्‍तर तक जाकर, उनके बालमन की जिज्ञासाओं को सरल तरीके से, हर सम्‍भव रूप से शान्‍त करने का प्रयास करता है। विद्यार्थियों में आए सकारात्‍मक परिवर्तन एवं सुधार द्वारा स्‍वयं शिक्षक भी आत्‍म संतुष्टि का अनुभव करता है।

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मोहम्‍मद फहीम कहते हैं,' अगर आप अपने प्रयास को नियमितता के साथ करते हैं तो आपके कार्यों में और निखार आएगा तथा विद्यार्थियों का आप में मजबूत विश्वास जागृत होगा। बच्चे अगर अपने शिक्षक में अनुशासन एवं परिश्रम करने की आदत देखते हैं तो वह स्वयं भी इसके लिए उत्साहित होते हैं।'

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मैंने अँग्रेजी विषय को रुचिकर, सरल, सुगम बनाने के लिए सर्वप्रथम कक्षा-कक्ष वातावरण पर ध्यान दिया। मैंने आकर्षक, चमकीले रंगों का प्रयोग कर स्वनिर्मित चार्ट एवं पोस्टर द्वारा कक्षा-कक्ष को सजाया। चार्टों के विषय विद्यार्थियों के स्तरानुसार ही लिए जैसे- शरीर के अंगों के नाम, सप्ताह के दिन, गिनती, महिनों के नाम, रंगों के नाम आदि। सप्ताह के दिनों को सूर्य और फूलों के द्वारा दर्शाया। रंगों के लिए अलग-अलग रंग के गुब्बारे एक लड़की के हाथ में दिखाए। गिनती के अक्षरों को फूलों के बीच आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया। महिनों के नाम लिए एक लड़के के हाथ में लिखे।

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वर्ष 2009 में राजस्‍थान में अपने शैक्षिक काम के प्रति गम्भीर शिक्षकों को प्रोत्‍साहित करने के लिए ‘बेहतर शैक्षणिक प्रयासों की पहचान’ शीर्षक से राजस्‍थान प्रारम्भिक शिक्षा परिषद तथा अज़ीम प्रेमजी फाउण्‍डेशन द्वारा संयुक्‍त रूप से एक कार्यक्रम की शुरुआत की गई। 2010 तथा 2011 में इसके तहत सिरोही तथा टोंक जिलों के लगभग 50 शिक्षकों की पहचान की गई। इसके लिए एक सुगठित प्रक्रिया अपनाई गई थी। धन्‍नालाल वर्मा वर्ष 2010-11 में बेहतर शैक्षणिक प्रयास में के लिए चुने गए हैं। उनका मानना है कि कक्षा एक व दो में बेहतर शिक्षण ही आगे की सभी कक्षाओं का आधार है। इन कक्षाओं में भी वि

वे कहते हैं,'सभी बच्चों की ध्यान केन्द्रित करने की शक्ति एवं ग्रहण क्षमता कई कारणों से भिन्न हो सकती है। मुख्य रूप से बच्चों का ठहराव बच्चों सीखने की क्षमता को प्रभावित करता है।'

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