बुनियादी शाला

गाँधी जी ने कभी भी अक्षर ज्ञान को शिक्षा नहीं माना। वे हमेशा कहते थे कि शिक्षा वह प्रक्रिया है, जो मनुष्य के जीवन में सतत चलती रहती है। जीवन की कठिन परिस्थितियों में उत्पादक काम मनुष्य का सबसे बड़ा शिक्षक होता है, जिससे न केवल ज्ञानार्जन होता है, बल्कि मनुष्य की क्षमता और मूल्यों का विकास भी होता है। झाबुआ जिले के पेटलावद तहसील में सम्पर्क संस्था ,द्वारा चलाई जा रही बुनियादी शाला में गाँधी प्रणीत शिक्षा-दर्शन की बानगी देखने को मिलती है। यहाँ वास्तविक शिक्षा के मायने क्या हैं और शिक्षा का दैनंदिन जीवन में क्या उपयोग है, जैसे विचारों को स्कूल-शिक्षण की प्रक्रियाओं से जोड़कर मूर्त रूप दिया जा रहा है। इस अनूठे प्रयोग को संचालित कर रहे हैं- झाबुआ जिले की पेटलावाद तहसील में सामाजिक कार्य कर रहे निलेश देसाई और उनकी पत्नी प्रक्षाली देसाई।

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