बाबूलाल नायक

'टीचर में अगर जज्‍बा है तो फोरम चलेगा ही। जब बीस-पच्‍चीस शिक्षक मिलकर अपना कार्यक्रम कर रहें हैं तो अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन के लोग पहुंचें या नहीं पहुंचें फोरम चल सकता है। असल में टीचर में तो बहुत क्षमता है, उसे दिशा निर्देश देने वाला व्‍यक्ति चाहिए। हर शिक्षक की अपनी खासियत होती है। शिक्षक को जोड़ने के लिए हम उसकी खासियत को पहचानकर उसे फोरम में लाने की कोशिश कर सकते हैं, ताकि अन्‍य शिक्षकों तथा बच्‍चों को उसकी कला का लाभ मिल सके। ' यह प्रतिक्रिया है बाबूलाल नायक की जो स्‍वैच्छिक शिक्षक मंच,टोंक के सक्रिय सदस्‍य हैं।

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