प्रबन्‍धन

विद्या भवन सोसायटी, उदयपुर, राजस्‍थान में 23 से 25 फरवरी, 2009 तक शिक्षक विकास एवं प्रबन्‍धन पर एक अन्‍तरराष्‍ट्रीय सेमीनार का आयोजन किया गया था। इस सेमीनार नीति व कामकाज सम्‍बन्‍ध्‍ाी चचाएँ  हुईं, सुझाव आए। सेमीनार की विस्‍तृत रिपोर्ट यहाँ प्रस्‍तुत है।

राजकीय प्राथमिक विद्यालय मीणा व बैरवा बस्ती कुरेडा टोंक जिले में बनास नदी के ऊपरी एवं पश्चिमी भाग में स्थित है। शाला के प्रधान अध्‍यापक मोहम्‍मद असलम का कहना है कि ‘ विद्यालय में शाला प्रधान की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। उचित प्रबन्धन के बिना विद्यालय, किसी भी प्रकार का विकास नहीं कर पाता है। विद्यालय एक उद्यान है, जिसकी सुन्‍दरता को माली (शिक्षक) अपने प्रयासों से निखारता है। यदि माली की देखभाल और प्रयासों में कमी हो तो बाग उजड़ जाता है।’

हिन्दी

यह देखने में आता है कि सरकार अपने स्‍तर पर विद्यालय तथा शिक्षा के लिए विभिन्‍न परियोजनाएँ संचालित करती है। लेकिन जमीनी स्‍तर पर उनको लागू करने में किसी की रुचि नहीं होती है। अगर वे लोग जिनकी जिम्‍मेदारी लागू करने की है इसमें रुचि लें तो बदलाव में देर तो होगी, पर अंधेर नहीं होगा। ऐसा ही एक उदाहरण बनता है महावीर जोशी के काम से। उनका कहना है,' इन सब प्रयासों की वजह से समुदाय का लगाव शाला के प्रति बढ़ने लगा। शाला द्वारा सहयोग माँगने पर एस.डी.एम.सी. सदस्यों द्वारा धनराशि एकत्रित कर किसी काम को पूर्ण करने की भावना का विकास हुआ। आज शाला भौतिक संसाधनों से परिपूर्ण है। समुदाय का शाला से जुड़ाव व सहयोगात्मक रवैया बना है। वे बच्चों को नियमित शाला भेजने लगे हैं। शाला द्वारा आयोजित बैठकों में समय-समय पर भाग लेकर अपने सुझाव व सहयोग देने लगे हैं।'

हिन्दी
18796 registered users
7333 resources