नानकमता

आम तौर पर सरकारी स्कूलों के बारे में मन में यही दृश्य उभरता है कि होगी कोई ऐसी बिल्डिंग जो बिना रंगाई-पुताई की होगी। बाउण्‍ड्री वाल नहीं होगी, चारों तरफ गन्‍दगी फैली होगी। बच्चे इधर-उधर घूम रहे होंगे। स्कूल में एक अध्यापक होगा। किसी तरह बच्चों को घेरे होंगे। प्रशासन को भेजने के लिए जानकारी बना रहे होंगे। मिड डे मील के लिए गन्‍दी-सी रसोई होगी आदि-आदि।

लेकिन गत दिनों उत्तराखण्ड के ऊधमसिंह नगर जिले के सितारगंज ब्लॉक में एक ऐसे सरकारी प्राथमिक विद्यालय में जाने का मौका मिला जो इस छवि के बिलकुल उलट, कुछ अलग है-कुछ खास है।

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