धीरज

2012 में बी.टी.सी. करने के पश्चात मैंने खूब विज्ञान मेले आयोजित किए। इसी बीच मुझे राजकीय प्राथमिक विद्यालय तोलिख्वा कोट, ब्लॉक कनालीछीना में सहायक अध्यापक के रूप में नियुक्ति मिली और बच्चों के साथ, उनके परिवेश से जुड़ने का मौका मिला। इसी दौरान एक दिन मुझे डायट डीडीहाट से श्रीमती सुनीता पाण्डेय का फोन आया कि आपको मुख्य सन्दर्भदाता के प्रशिक्षण हेतु देहरादून जाना है। मैंने कहा, “मैडम मेरी उम्र तो बहुत कम है और इस क्षेत्र में अनुभव न के बराबर है, मैं कैसे कर पाऊँगा।” उनका जवाब सुन मैं भौंचक्का रह गया। वे बोलीं, “तुम्हारी पहचान उम्र से नहीं तुम्हारे काम से है। तुम्हारी इस कला को जिले के शिक्षकों के बीच पहुँचाने का इससे अच्छा मौका नहीं मिलेगा, तैयार हो जाओ।”

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