तुलाराम बुआचा शाला

कोई सौ कदमों की दूरी से एक सुन्‍दर और छोटी शाला का भवन दिखने पर हमें खुशी होती है, लेकिन इस जिज्ञासा के साथ कि यहाँ पढ़ने के लिए कितने बच्चे आते होंगे? नजदीक आने पर शाला के शिक्षक सुनील गायकवाड़ हमारा स्वागत करके शाला के भीतर के एक कमरे में ले जाते हैं। इस कमरे में कुल 12 बच्चे पढ़ाई में तल्लीन हैं, जबकि दूसरे कमरे में 8 बच्चे बिना शिक्षक के पढ़ रहे हैं। 20 बच्चे और दो कमरों की शाला में सुनील गायकवाड़ अकेले शिक्षक हैं। यह जब एक कमरे में साथ बैठे दो कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाते हैं तो दूसरे कमरे में बैठे दो अलग-अलग कक्षाओं के बच्चे एक साथ बगैर शिक्षक के अनुशासित ढंग से खुद पढ़ना-लिखना सीख रहे होते हैं।

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