गिजुभाई

गिजु भाई बधेका भारत के प्रथम प्रयोगशील शिक्षक कहे जाते हैं। उनका जन्‍म 15 नवम्‍बर 1885 में हुआ था। उनकी कर्मभूमि गुजरात के भावनगर के करीब रही है। 1939 में जून में उनका निधन हो गया था।

बच्‍चों के साथ विद्यालय में उन्‍हाेंने जो काम किया, वह उनके द्वारा लिखी गई कई सारी किताबों के रूप में सामने अाया है। उनकी सबसे प्रसिद्ध किताब है 'दिवास्‍वप्‍न' । इस किताब में एक प्रयोगशील शिक्षक समाज और व्‍यवस्‍था से किस तरह संघर्ष करता है, उसका विवरण दर्ज है।

यहाँ बच्चे बन्‍धन से मुक्त होने आते हैं।
यह गिजु भाई का स्कूल है ,जहाँ उन्होंने शिक्षा के अपने सारे प्रयोग किए, देश भर से ढेरों कहानियाँ इकट्ठी कीं और बच्चों को सुनाई। कईयों को बच्चों ने नापसन्‍द कर दिया और सैकड़ों जो बच्चों को पसन्‍द आईं उन्‍हें गिजु भाई ने लिख डाला। यह वही स्कूल है जहाँ शिक्षा में किए प्रयोगों को गिजुभाई ने दिवास्वप्न में भी लिखा है।

हिन्दी

मैं खेलूँ कहाँ?

मैं कूदूँ कहाँ ?

मैं गाऊँ कहाँ?

मैं किसके साथ बात करूँ?

बोलता हूँ तो माँ को बुरा लगता है।

खेलता हूँ तो पिता खीजते हैं।

मैं खेलूँ कहाँ?

मैं कूदूँ कहाँ ?

मैं गाऊँ कहाँ?

मैं किसके साथ बात करूँ?

बोलता हूँ तो माँ को बुरा लगता है।

खेलता हूँ तो पिता खीजते हैं।

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