गणित शिक्षण

शिक्षा के सरोकार शृंखला के तहत अज़ीम प्रेमजी विश्‍वविद्यालय ,बेंगलूरु एवं शिक्षा संकाय, दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय के संयुक्‍त तत्‍तावधान में 11 से 13 अक्‍टूबर,2019 तक दिल्‍ली में एक संगोष्‍ठी का आयोजन किया गया। संगोष्‍ठी का विषय था गणित शिक्षण : अपेक्षाएँ और चुनौतियाँ। इस संगोष्‍ठी में देश भर से आए भागीदारों ने 45 से अधिक परचों को प्रस्‍तु‍त किया। उपस्थित श्रोताओं और भागीदारों ने उस पर चर्चा की। संगोष्‍ठी में आए परचों के एब्‍स्‍ट्रैक्‍ट की एक पुस्तिका 'बानगी' का इस अवसर पर जारी की गई।

अज़ीम प्रेमजी फाउण्‍डेशन, देहरादून, उत्‍तराखण्‍ड की त्रैमासिक पत्रिका 'प्रवाह' का नया अंक जून-सितम्‍बर,2016 गणित पर केन्द्रित है।

इस अंक में

गणित के प्रति माहौल

यह वीडियो है गणित की नवाचारी शिक्षिका रश्मि कथूरिया से साक्षात्‍कार का। वे 2016 के सर्वश्रेष्‍ठ ग्‍लोबल टीचर अवार्ड के पहले पचास दावेदारों में एक रही हैं। 2007 में उन्‍हें पूर्व राष्‍ट्रपति अब्‍दुल कलाम आजाद के हाथों सर्वश्रेष्‍ठ ई-टीचर का सम्‍मान भी मिला है।

वे मानती हैं कि गणित के शिक्षण में टैक्‍नोलॉजी का उपयोग किया जाना चाहिए। वे स्‍वयं कक्षा-कक्ष में गणित के शिक्षिण में विभिन्‍न तरह की टैक्‍नोलाॅजी का उपयोग करती हैं, जिनमें उनका अपना ब्‍लाग भी शामिल है।

शिक्षक धन्नालाल जी राजकीय उच्‍च प्राथमिक विद्यालय जयसिंहपुरा,टोंक में विगत 11 वर्षों से कार्यरत हैं। वे ऐसे शिक्षक है जो विद्यालय में जाने के बाद कभी खाली बैठना पसन्‍द नहीं करते। लंच के दौरान भी जब आमतौर पर शिक्षक आपसी चर्चाओं में संलग्न रहते हैं धन्नालाल जी या तो कुछ पढ़ने-लिखने का कार्य कर रहे होते हैं या फिर बच्चों के द्वारा किए गए कार्य की जाँच कर रहे होते हैं। विगत कुछ वर्षो से विद्यालय में गणित का शिक्षण भी करवा रहे हैं। चूँकि विद्यालय में गणित का कोई शिक्षक नहीं है अत: इन्हें ही कक्षा 1 से 8 तक सभी कक्षाओं को गणित पढ़ाना पड़त

बच्‍चे जो कक्षा में पढ़ते हैं, उसका रोजमर्रा की जिन्‍दगी में कैसे उपयोग किया जा सकता है या होता है, यह नाटक के माध्‍यम से बच्‍चे इस वीडियो में प्रस्‍तुत कर रहे हैं।
सूत्रधार की कमेंट्री वीडियो में उभर रहे मुद्दों को भी सामने रखती है।

के.

हृदयकांत दीवान

गणित कैसे पढ़ाएँ: दो दृष्टिकोण

हृदयकांत दीवान ►शुरू करने से पहले “अध्यापन-कला (पेडागॉजी)” शब्द के साथ गुंथे हुए कुछ मुद्दों को स्पष्ट करके उनके विस्तार में जाना जरूरी है। इस सुविधाजनक शब्द में सामान्यतः एक गठरी की तरह सब कुछ समेट लिया जाता है, पर इसके बावजूद कुछ परिस्थितियों में इसके अपने निहितार्थ पर पूरा विमर्श किया जा सकता है।

गुलाबजामुन से जुड़ा हुआ मेरे कॉलेज का एक मजेदार किस्सा है। गुलाबजामुन भारत की एक लोकप्रिय मिठाई है जिसे प्राय: अकेले, दो-दो में या तीन-तीन भी बेचा जाता है। कॉलेज की कैंटीन में भी गुलाबजामुन मिलते हैं जो कि हम लोगों के बीच में काफी लोकप्रिय हैं। कॉलेज की कैंटीनवाला गोल कटोरी में दो गुलाबजामुन देता है और एक गुलाबजामुन का दाम छह रुपए होता है।

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