गणित

स्वाती सरकार

शैक्षिक पत्रिका 'पाठशाला - भीतर और बाहर' अंक 1, जुलाई,2018 में यह एक रोचक संवाद प्रकाशित हुआ है। इस संवाद में दिल्‍ली सरकार द्वारा संचालित प्राथमिक स्‍कूल के दो शिक्षकों, माध्‍यमिक स्‍तर के एक शिक्षक, डाइट की एक प्राध्‍यापिका और दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय के शिक्षा संकाय द्वारा संचालित प्रायोगिक स्‍कूल की शिक्षिका ने भागीदारी की है।

इस संवाद को पढ़ने के लिए नीचे दी गई लिंक से पीडीएफ डाउनलोड कर सकते हैं।

आनन्‍द निकेतन स्कूल एक ऐसा स्कूल है जहाँ सभी को सोचने-विचारने और तर्क करने की आजादी है। यह आजादी क्लासरूम से लेकर प्लानिंग बोर्ड तक और किचन से लेकर झूले तक दिखाई और सुनाई पड़ती है। ऐसी ही एक गणितीय आजादी का जिक्र में अपने इस लेख में करने वाला हूँ। इस लेख का नाम दायाँ और बायाँ क्यों है वो आप इस लेख को पढ़ते हुए समझ पाएँगे।
कक्षा 4 की गणित की कक्षा में सभी बच्चे तीन अंकों के गुणा के सवाल को हल करने में लगे हैं। सभी बच्चे अपने सवालों को जैसा उन्होंने हल किया वैसा ही ब्लैक बोर्ड पर समझाते हैं।

इस वीडियो में  'जादुई नदियाँ, मन्दिरऔर फूल' पहेली का उत्‍तर है। जैसा हमने कहा था, सबसे पहले हम यहां पर 3 मंदिर व नदियों के लिये फूलों की संख्‍या को बीजगणितीय तरीके से निकालने का प्रयास कर रहे है, फिर 2 मंदिर, 3 मंदिर , 4 मंदिर की पहेली को हल करने के बाद उसके उत्‍तरों से निकले पैटर्न को देखेंगे। और इस पैटर्न का सामान्‍यीकरण करके हम एक सूत्र बनाने की ओर बढ़ेंगे।

 

सत्रह हजार सत्रह सौ सत्रह को अंकों में कैसे लिख‍ेंगे ? पहले लिखकर देखिए। फिर निदेश सोनी के इस वीडियो में इस पहेली का हल भी मिलेगा। सामान्‍य सी लगने वाली यह पहेली, अपने में गहरी बात छिपाए हुए है।

माया सभ्‍यता में किस प्रकार से संख्‍याओं को लिखा जाता था, और किन प्रतीकों का उपयोग किया जाता था। देखिये इस वीडियों में और हमारे साथ कुछ संख्‍याओं को लिखने के अभ्‍यास भी कीजिए।

गणित को केवल रोचक तरीके से पढ़ाना ही पर्याप्‍त नहीं है। किसी भी अवधारणा को बच्‍चों के सामने किस तरह रखा जा रहा है, वह भी महत्‍वपूर्ण है। हरीश जे थानवी अपनी कक्षा में बच्‍चों के साथ भिन्‍न की अवधारणा पर काम कर रहे हैं।

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