कैलाश गुसांई

पहले तो विचार आया कि बच्चों को स्वतंत्रता देकर हम अनुशासनहीनता को तो नहीं बढ़ा रहे, पर कुछ ही समय बाद हमें अकादमिक सन्‍दर्भ समूह में सदस्य के रूप में बैठकों में प्रतिभाग करने और कई जगहों के भ्रमण का अवसर मिला। कई बातें बच्चों और वर्तमान शिक्षा के बारे में जानने को मिली। जैसे यह भी धारणा हमारे बीच है कि नौकरी के बाद क्या पढ़ना? तो मैंने भी नौकरी पाने के बाद पढ़ना लगभग बन्‍द ही कर दिया था। तो इस भ्रमण ने दो महत्वपूर्ण सीखें दी, एक तो बच्चों को देखने के प्रति नजरिया, दूसरा पढ़ने की इच्छा होना।

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