एनसीईआरटी

राष्‍ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद द्वारा प्रकाशित त्रैमासिक पत्रिका ‘प्राथमिक शिक्षक में प्रारम्भिक शिक्षा से सम्‍बन्धित विभिन्‍न पहलुओं  पर आधारित ऐसे लेख प्रकाशित किए जाते हैं जो एक शिक्षक के लिए उपयोगी हों। इस पत्रिका में कुछ महत्वपूर्ण सरोकार हैं –

राष्‍ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद द्वारा प्रकाशित त्रैमासिक पत्रिका ‘प्राथमिक शिक्षक में प्रारम्भिक शिक्षा से सम्‍बन्धित विभिन्‍न पहलुओं  पर आधारित ऐसे लेख प्रकाशित किए जाते हैं जो एक शिक्षक के लिए उपयोगी हों। इस पत्रिका में कुछ महत्वपूर्ण सरोकार हैं –

मैं खेलूँ कहाँ?

मैं कूदूँ कहाँ ?

मैं गाऊँ कहाँ?

मैं किसके साथ बात करूँ?

बोलता हूँ तो माँ को बुरा लगता है।

खेलता हूँ तो पिता खीजते हैं।

इतनी सुन्‍दर फिल्‍म मैंने आज तक नहीं देखी। 12 मिनट में शिक्षा का वह दर्शन इसमें फिल्‍माया गया है, जिसे शायद किसी और को समझाने में 12 घण्‍टे लगें। इसे वर्षों पहले, इतने पहले कि जब ब्‍लैक एंड व्‍हाइट का जमाना था, तब एनसीईआरटी के शिक्षा प्रौद्योगिकी केन्‍द्र ने यूनिसेफ और यूनेस्‍को की मदद से बनाया था। यूटयूब पर इसे जाने-माने जनविज्ञानी अरविन्‍द गुप्‍ता ने अपलोड किया है।
 

प्रोफेसर कृष्ण कुमार संविधान में रखे गए शिक्षा के उद्देश्य को बहुत सरल और सहज तरीके से सामने रखते हैं। शिक्षा के उद्देश्य की चर्चा करते हुए वे हमारी मौजूदा शिक्षा व्यवस्था और उसमें शिक्षक तथा विद्यार्थी के रिश्ते की व्याख्या करते हैं। वे इस सन्दर्भ में राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005 की चर्चा भी करते हैं। उनकी व्याख्या हमें सोचने के लिए एक नई दिशा देती है।
सी.ई.आई.टी., जो एन.सी.ई.आर.टी. का एक विभाग है, ने प्रोफेसर कृष्ण कुमार के इन विचारों का एक वीडियो बनाया है। वे उस समय एन.सी.ई.आर.टी. के निदेशक थे। यह वीडियो दो भागों में यू-ट्यूब पर उपलब्ध है।
यहाँ इस वीडियो में व्यक्त विचारों का भाग-2 लेख के रूप में प्रकाशित किया जा रहा है। साथ ही दूसरे भाग की वीडियो की लिंक भी है। लिंक पर जाकर आप वीडियो को स्वयं भी देख सकते हैं और कृष्ण कुमार जी को सुन सकते हैं।

प्रोफेसर कृष्‍ण कुमार संविधान में रखे गए शिक्षा के उद्देश्‍य को बहुत सरल और सहज तरीके से सामने रखते हैं। शिक्षा के उद्देश्‍य की चर्चा करते हुए वे हमारी मौजूदा शिक्षा व्‍यवस्‍था और उसमें शिक्षक तथा विद्यार्थी के रिश्‍ते की व्‍याख्‍या करते हैं। वे इस सन्‍दर्भ में राष्‍ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005 की चर्चा भी करते हैं। उनकी व्‍याख्‍या हमें सोचने के लिए एक नई दिशा देती है।

सी.ई.आई.टी., जो एन.सी.ई.आर.टी. का एक विभाग है, ने प्रोफेसर कृष्‍ण कुमार के इन विचारों का एक वीडियो बनाया है। वे उस समय एन.सी.ई.आर.टी. के निदेशक थे। यह वीडियो दो भागों में यू-ट्यूब पर उपलब्‍ध है।

यहाँ इस वीडियो में व्‍यक्‍त विचारों को लेख के रूप में प्रकाशित किया जा रहा है। साथ ही वीडियो की लिंक भी है। लिंक पर जाकर आप वीडियो को स्‍वयं भी देख सकते हैं और कृष्‍ण कुमार जी को सुन सकते हैं।

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