उदय सामुदायिक शाला

ग्रामीण शिक्षा केन्‍द्र द्वारा संचालित उदय सामुदायिक पाठशाला, जगनपुरा को निकट से देखना एक सुखद और अविस्मरणीय अनुभूति रही। 11 शिक्षकों और 200 विद्यार्थियों के कलरव में खपरैल से ढके आठ अष्टभुजाकार कक्षों विद्यालय में पहला कदम रखते ही आपको एहसास हो जाता है कि यह समाज तथा गाँव की व्यापक परिधि का ही एक हिस्सा है। यह एक ऐसा विद्यालय है जहाँ जेंडर-सेंसिटिविटी मुद्दा नहीं रह गया है (सकारात्मक सन्‍दर्भों में)। जहाँ आधी दुनिया की संख्या आधे से भी कहीं ज्यादा है। एक ऐसा विद्यालय जिसे कक्षा-कक्ष में भी बच्चों को बाहरी दुनिया से जोड़े रखने की चिन्‍ता है, और जो उनके चेहरों पर पड़ने वाली ताजी हवा को ताजे मध्याह्न भोजन से भी ज्यादा जरूरी समझता है। ऐसा विद्यालय जिसके दीवारों के रंगरोगन वहाँ के बच्चों और अध्यापकों के सम्मिलित हस्ताक्षर हैं। एक ऐसा विद्यालय जहाँ गाँधी चित्रों में नहीं चरखों में जीवित हैं। और जहाँ कला पंचतत्वों के संयोग से आकार ग्रहण करती है।

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