विचार और अनुभव

पाठशाला – भीतर और बाहर  मार्च, 2021 अंक में

सम्पादकीय

शिक्षणशास्त्र

1. विज्ञान शिक्षण करके सीखना और शिक्षक की भूमिका : हुमा नाज सिद्दीकी

2. भाषा शिक्षण और भाषाई खेल : कुसुमलता

शैक्षिक दख़ल : कोरोना काल में शिक्षा की पड़ताल और विमर्श पर केन्द्रित

शैक्षिक सरोकारों को समर्पित शिक्षकों तथा नागरिकों का साझा मंच द्वारा प्रकाशित पत्रिका ‘शैक्षिक दख़ल’ का नवीनतम अंक प्रकाशित हो चुका है। जनवरी 2021 का यह अंक कोरोना काल में शिक्षा पर केन्द्रित है। आवरण जवाहर मुकेश ने तैयार किया है। आवरण (भीतर) में संजीत ‘समवेत’ की कविता है।

अज़ीम प्रेमजी फाउण्‍डेशन, देहरादून द्वारा प्रकाशित चौमासिक पत्रिका 'शैक्षिक प्रवाह' का अगस्‍त अंक लॉकडाउन के दौरान हुए शैक्षिक अनुभवों पर आधारित है। पत्रिका की पीडीएफ नीचे दी गई लिंक से डाउनलोड की जा सकती है।

पाठशाला भीतर और बाहर अंक 6, दिसम्बर 2020  : अनुक्रम

शिक्षणशास्‍त्र

अज़ीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी लर्निंग कर्व

हिन्दी अंक 22 सितम्बर,2020

विकलांग बच्‍चों के शिक्षण का परिप्रेक्ष्‍य

‘शैक्षिक प्रवाह’ अज़ीम प्रेमजी फाउण्‍डेशन द्वारा प्रकाशित होने वाली पत्रिका है जिसका प्रकाशन शिक्षक साथियों और शिक्षा के सरोकारों से जुड़े लोगों को, उनके विचारों और कार्यों को एक सूत्र में बाँधने के उद्देश्य से किया जाता है।  पत्रिका  निशुल्क वितरण हेतु प्रकाशित होती है।  आप सभी के साथ इस पत्रिका के रजत जयन्‍ती अंक को साझा करते हुए हमें बेहद हर्ष है। इस पत्रिका ने नन्हे-नन्हे क़दमों से चलते हुए कई मोड़ों से मुड़ते हुए आज 25 वें पायदान पर कदम रखा है। इस पत्रिका की विशेषता है इसका पूरी तरह से फील्ड के अनुभवों को संजोना। शिक्षक साथियों के अनुभव, चुनौतियाँ, किस्से, प्रक

कोरोना महामारी काल अत्यधिक लम्बा और अनिश्चितकालीन होता जा रहा था। लोग सामान्य स्थिति को देखने के लिए तरसने लगे हैं। हालाँकि काम कुछ समय तक प्रभावित तो रहे मगर हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहना प्रगतिशील मानव को अनुकूल कब तक लग सकता है?

पाठशाला - भीतर और बाहर

अंक 5 अगस्त 2020 में

परिप्रेक्ष्य

बच्चों के सवाल हल्के मत लीजिए * कालू राम शर्मा

शिक्षकों का अनुभव लेखन : शिक्षक–शिक्षा में जगह और सम्भावनाएँ * अमित कोहली

शैक्षिक पत्रिका 'पाठशाला - भीतर और बाहर' अंक 1 जुलाई, 2018 में प्रकाशित यह लेख वर्तमान परिप्रेक्ष्‍य में गुणवत्‍ता के विभिन्‍न आयामों की बात करता है। गुणवत्‍ता के मायने क्‍या हैं ?  क्‍या हर क्षेत्र के लिए गुणवत्‍ता के मानदण्‍ड और उसके एक ही होने चाहिए या क्षेत्र विशेष के हिसाब से इससे फर्क हो सकते हैं ? इन प्रश्‍नों पर विचार नहीं किया जाता। यह लेख शिक्षा और सामाजिक सेवाओं के क्षेत्र में गुणवत्‍ता तय करने के लिएएद्योग जगत के मानदण्‍ड अपनाने के सन्‍दर्भ में विश्‍लेषण प्रस्‍तुत करता है।
इसे पूरा पढ़ने के लिए पीडीएफ डाउनलोड करें। लिंक नीचे है।

शैक्षिक पत्रिका 'पाठशाला - भीतर और बाहर' अंक 1 जुलाई, 2018 में प्रकाशित  महमूद खान का यह लेख कक्षा में संवाद की महत्‍ताके बारे में है। अपनी पर्यावरण की कक्षा का अनुभव साझा करते हुए वे बताते हैं कक्षा में संवाद बच्चों को सीखने में किस तरह मददगार होता है। लेखक सुकरात को उद्धृत करते हुए संक्षेप में यह बताता है कि संवाद क्‍या है, इसकी प्रक्रिया कैसी हो, प्रन कैसे हों, किन पर विमर्श हो, किन पर नहीं, शिक्षक की क्‍या तैयारी हो, शिक्षक की क्‍या भूमिका हो और बच्चों की इसमें क्‍या जगह हो।

इसे पूरा पढ़ने के लिए पीडीएफ डाउनलोड करें। लिंक नीचे है।

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