खेल एवं शारीरिक शिक्षा

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नाटक एक ऐसी विधा है जिसे खेलने वालों में विभिन्‍न कौशलों का विकास होता है। इनमें अभिनय, संप्रेषण,अभिव्‍यक्ति और मिलकर काम करने की भावना प्रमुख हैं। पर नाटक खेलने से पहले उसकी तैयारी भी काफी कुछ सिखाती है। और अगर नाटक बच्‍चों के लिए हो और उसमें भाग लेने वाले भी बच्‍चे हों, तो वे इसका पूरा आनन्‍द उठाते हैं।

नाटक की तैयारी कैसे की जा सकती है, यह इस वीडियो की कथावस्‍तु है। इस तैयारी को कुछ बातचीत और कुछ नाटक करके मज़ेदार अन्‍दाज में बताया गया है।

कभी-कभी असामान्‍य को समझना या असाधारण घटनाओं की कल्‍पना करना साधारण चीजों को समझने में हमारी मदद कर सकता है। विशेष तौर पर यह तब और भी सही होता है जब बात अपने आसपास की दुनिया - गुरुत्‍वाकर्षण, सूरज आदि....को समझने की हो।
यह गतिविधि बताती है कि कैसे आप बच्‍चों को अपनी कल्‍पनाओं को व्‍यक्‍त करने और चित्र बनाने के लिए प्रेरित कर असाधारण परिदृश्‍यों के बारे में सोचने के लिए प्रोत्‍साहित कर सकते हैं।

प्रकृति में कुछ चीजें होती हैं, जो हमें दिखाई कुछ और देती हैं, लेकिन वास्‍तव में होती कुछ और हैं। इसे दृष्टिभ्रम कह सकते हैं। दृष्टिभ्रम पर आधारित कई पहेलियॉं हो सकती हैं। ये पहेलियॉं हल करने में खासी माथापच्‍ची करनी पड़ सकती है। जिसमें त‍ार्किकता के साथ-साथ कई अन्‍य कौशलों की परीक्षा भी हो सकती है। दूसरे शब्‍दों में अभ्‍यास भी हो सकता है। एकलव्‍य ने माचापच्‍ची सीरीज के तहत 'नजर का फेर' नाम से ऐसी ही पहेलियों का संग्रह प्रकाशित किया है। यह प्राथमिक कक्षाओं में बच्‍चों के बीच विभिन्‍न गतिविधियॉं क

टेसू राजा बीच बाजार

टेसू राजा बीच बाजार, खड़े हुए ले रहे अनार।

इस अनार में कितने दाने ?
जितने हो कंबल में खाने।

कितने हैं कंबल में खाने ?
भेड़ भला क्‍यूँ लगी बताने।
एक झुँड में भेड़ें कितनी ?
एक पेड़ पर पत्ती जितनी।

एक पेड़ पर कितने पत्ते?
जितने गोपी के घर लत्ते।

भाषा की पाठ्य पुस्तक में कहानी के अभ्यास प्रश्नों में एक प्रश्न होता है -इस कहानी का नाट्य रूपान्तरण कीजिए। पहले-पहल जब इस प्रश्न को पढ़ा तो लगा काफी तामझाम व तैयारी वाला श्रमसाध्य काम होगा और इसे सिर्फ एक विधा के तौर पर ही समझा। पाठ्यपुस्तकों में आए नाटकों को भी उसी तरह पढ़ाया जैसे कभी मुझे पढ़ाया गया था। एक बार पूरा पाठ मैंने पढ़ा फिर कुछ बच्चों को पात्र बनाया और उन पात्रों ने अपनी-अपनी बारी आने पर अपने-अपने संवाद पढ़े और हो गया पाठ पूरा।

"घर में कुछ भी होता है तो स्त्रियों को उसका दोषी माना जाता है। लड़का पैदा नहीं हुआ, खाना जल्दी नहीं दिया, खाने में नमक ज्‍यादा हो गया, कपड़े ढंग से नहीं धुले या खाना बनाने के लिए तेल ज्‍यादा इस्तेमाल कर लिया, कभी-कभी तो घर में उनके साथ हिंसा होती है।"

भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय के तहत कार्यरत एडसिल का टेक्निकल सर्पोट ग्रुप डीपीईपी में उपयोग के लिए 'प्राथमिक शिक्षा के मुद्दे' नाम से एक पत्रिका का प्रकाश्‍ान करता था।
पत्रिका का एक अंक 'प्राथमिक कक्षाओं में कहानी सुनाने की जरूरत' पर केन्द्रित था। इस अंक में उपयोगी सामग्री है।
यहॉं इस अंक की पीडीएफ प्रस्‍तुत है।

एक साधारण सा छाता भी कक्षा में विभिन्‍न विषयों की अवधारणाओं को समझाने का एक शैक्षिक संसाधन हो सकता है।

विज्ञान,गणित,भाषा या अन्‍य किसी भी विषय को अपने परिवेश में मौजूद संसाधनों की मदद से बच्‍चों को पढ़ाया जा सकता है। जरूरत केवल थोड़े से सोच-विचार और नवाचारी नजरिए की है।

TESS India  द्वारा बनाए गए ऐसे ही 4 से 5 मिनट की अवधि के  6 उपयोगी वीडियो यहॉं प्रस्‍तुत हैं।

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