पर्यावरण अध्‍ययन

पूनम मेध

अज़ीम प्रेमजी फाउण्‍डेशन के ब्‍लाक एक्‍टविटी सेंटर,पीपलू,टोंक ने जयकिशनपुरा के एक स्‍कूल में एक बाल मेले का अायोजन किया। इस मेले में गणित,विज्ञान तथा अन्‍य विषयों को केन्‍द्र में रखकर विभिन्‍न गतिविधियॉं की। बच्‍चों ने इनमें बढ़-चढ़कर भाग लिया। आयोजको ने इसमें शामिल शिक्षकों से भी बात की और मेले के बारे में उनकी राय जानी।

आप भी इस वीडियो को द‍ेखिए। संभव है,इसे देखकर आपको भी कुछ नए विचार सूझें।

बच्‍चों में अपने परिवेश का अवलोकन एवं उसके बारे में लिखने की क्षमता बढ़ाने के लिए इस तरह के प्रयास भी किए जा सकते हैं। उत्‍तराखण्‍ड के एक अखबार अक्‍कड़-बक्‍कड़ ने यह अनोखा प्रयास किया है। नीचे दिया अखबार का यह पन्‍ना विभिन्‍न स्‍कूलों में बँटवाया गया।

प्राथमिक स्तर पर पर्यावरण अध्ययन विषय का मुख्य लक्ष्य बच्चों को उनके परिवेश की वास्तविक परिस्थितियों से अनुभव कराना है। बच्चों को उनके परिवेश से जोड़ने के कारण बच्चे परिवेश के प्रति सजग होंगे तथा उसके महत्व को समझेंगे। बच्चे अपने परिवेश के प्राकृतिक, भौतिक,सामाजिक,सांस्कृतिक और वर्तमान पर्यावरणीय मुद्दों के प्रति संवेदनशील बनें, यही पर्यावरण अध्ययन विषय का उद्देश्य है।  

अनुराग मुद्गल

स्‍कूल के बच्‍चों ने सांता क्‍लॉज बनाया। हालाँकि यह कोई मुश्किल काम नहीं था। पर महत्‍वपूर्ण यह है कि बच्‍चों ने उसमें दिलचस्‍प ली। अपने तमाम तरह के कौशलों का उपयोग किया। एक टीम के रूप में काम किया और काम के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई। निश्चित ही उन्‍होंने इससे कुछ और बातें भी सीखी होंगी।

हिन्दी

बच्चों की समझ और सोच को हम सामान्यतः नकार देते हैं। ये तो बच्चे है ये क्या समझेंगे; तुम बच्चे हो अभी तुम्हारी समझ कम है; तुम बच्चे हो तुम हमें सही गलत सिखाओगे? हम कहते हैं, “तुम जानते ही कितना हो?”

भागेन्द्र सिंह नेगी

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