पर्यावरण अध्‍ययन

मनोहर चमोली  'मनु' शिक्षक हैं। उत्‍तराखण्‍ड के पहाड़ों में रहते हैं। वे बच्‍चों के लिए कहानियाँ भी लिखते हैं। छोटे बच्‍चों के लिए लिखी गई उनकी एक कहानी 'चलता पहाड़' को रूम टू रीड ने चित्रकथा के रूप में प्रकाशित किया है। उसकी पीडीएफ यहाँ से ली जा सकती है।

मध्‍यप्रदेश के सागर जिले के राहतगढ़ ब्लॉक की कल्याणपुर शाला के शिक्षक रामेश्वर प्रसाद लोधी ने पर्यावरण अध्ययन को बच्चों के जीवन के अनुभवों से जोड़ने के लिए एक अनूठा प्रोजेक्ट क्रियान्वित किया है। बच्चे इस प्रोजेक्ट से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने अपने घरों में भी इस प्रोजेक्ट को तैयार किया है। इससे बच्चों में प्रश्न करने, खोज करने, अवलोकन करने, चर्चा करने, अभिव्यक्ति करने, व्याख्या करने वर्गीकरण करने, विश्लेषण करने और प्रयोग करने के कौशल विकसित हुए

भोजन और हम

अब्‍दुल कलाम

बच्चे अपने परिवेश और आसपास घट रही घटनाओं से निरन्तर कुछ न कुछ सीखते रहते हैं। वे कुछ अनुमान लगाते हैं,स्वयं से अनुभव करते हैं और बड़ों से संवाद करते हुए अपनी समझ को विकसित करते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में उनके भीतर की जिज्ञासा, कौतूहल, आनन्‍द की अनुभूति व मन में उठ रहे प्रश्न उन्हें कुछ नया खोजने की ओर प्रेरित करते हैं।

हिन्दी

टूथपेस्‍ट ट्यूब या ऐसी ही किसी ट्यूब के खाली डिब्‍बे से आसानी से एक रेंगने वाला कीड़ा या कैटरपिलर बनाया जा सकता है। देखें कैेसे।

वर्धा के सेवाग्राम के अानन्‍द निकेतन स्‍कूल में नई तालीम की शिक्षा दी जाती है। उसमें खेती भी एक विषय है। लेकिन खेती को अन्‍य विषयों से कैसे जोड़ा जा सकता है,यह भी एक अभ्‍यास है।

यहाँ इसी स्‍कूल की एक पाँचवी कक्षा की पाठ्यपुस्‍तक का एक अध्‍याय 'मेथी की खेती' प्रस्‍तुत है। इस पाठ की पीडीएफ भी साथ है। उसे डाउनलोड किया जा सकता है।

 

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