किसी 'खास' की जानकारी भेजें। श्रीमती कपोतरी देवी

श्रीमती कपोतरी देवी

धर्मशास्त्री कहते हैं कि पृथ्वी शेषनाग के फन पर टिकी है।  
अर्थशास्त्री मानते हैं कि दुनिया पैसे से चलती है।
राजनीतिशास्त्री फरमाते हैं कि राजनीति संसार की एकमात्र शक्ति है।
वैज्ञानिक सिद्द करते हैं कि विज्ञान ही जगत का एक मात्र सत्य है।

नहीं जानता कि कौन कितना सच बोल रहा है।

श्रीमती कपोतरी देवी (70 वर्ष),बाल विधवा हैं। उन्होंने न धर्मशास्त्र पढ़े, न अर्थशास्त्र के सिद्धान्‍त रटे, न उनका राजनीति से कोई वास्ता है, न ही वो विज्ञान की व्याख्या समझती हैं। वो जानती हैं अपनी धरती को, पहचानती हैं अपने गाँव को, समझती हैं अपने समाज को।  

सरकार की दृष्टि में एक अनपढ़-अनगढ़ बुढ़िया। पर इन अनपढ़-अनगढ़ देवी ने जो सिखाया है वह निसन्‍देह मुझे संसार के बड़े से बड़े विश्विद्यालय मिलकर नहीं समझा सकते।  

आज पूरे साढ़े तीन वर्ष हो गए मुझे इस विद्यालय में, तब से आज तक देख रहा हूँ इनको निरन्‍तर,अथक,निस्वार्थ,निष्काम विद्यालय में आते हुए, बच्चों और हमसे से बात करते हुए।  

विद्यालय हित में कपोतरी देवी जी एक बार शासन के समक्ष निर्जल-निराहार व्रत पर बैठ गयी थीं। शासन, जैसा कि उसका स्वभाव होता है-कुछ सुनी कुछ नहीं,जो सुना वो तो किया नहीं,जो नहीं सुना उसे करने का प्रश्न ही नहीं।  ठीक ऐसी कु-संतान की तरह जो अपने माता,पिता,पूर्वजों की उपेक्षा-अवहेलना को ही धर्म समझता हो।  वो शक्ति,धन,पद की भाषा तो जानता है पर ममत्व की मूक वाणी नहीं समझता।

माता ने जब देखा कि बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ रहे हैं, तो अपनी अल्प पेंशन की बचत से इस माता ने विद्यालय को 98 हजार रुपए दिए ताकि बच्चों के लिए कुर्सी-मेज आ सके।  

गत तीन वर्षो में हमारे विद्यालय के कुछ बच्चों ने विभिन्न जनपद /राज्य/राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग किया ।  सीईओ/बीईओ और अन्य अधिकारियों की फौज ने इस बात की कभी जरूरत ही नहीं समझी कि इन बच्चों को प्रोत्साहित किया जाए।  सही भी है, उन्हें वेतन बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए नहीं मिलता, उनके पास और भी अन्य महत्वपूर्ण कार्य हैं, जिनके सामने बच्चे और उनका विद्यालय गौण हैं ।  

पर माता का ममत्व इसकी अनदेखी भला कैसे कर सकता है।  

हर बार माता ने बच्चो को प्रोत्साहन दिया।  

विद्यालय परिवार ने माता को भेंट के रूप शाल दिया।

हम सब आपके ऋणी रहेंगे माते ।  

आपने हमें बोध कराया कि धरती का आधार क्या है।

हर गाँव,हर विद्यालय को ऐसी माता मिले यही कामना है।


मुकेश प्रसाद बहुगुणा, शिक्षक, राजकीय इन्‍टरमीडियेट कॉलेज मुण्‍डनेश्‍वर,पौड़ी गढ़वाल, उत्‍तराखण्‍ड की फेसबुक वॉल से साभार।

 

टिप्पणियाँ

pramodkumar का छायाचित्र

शिक्षा के लिए समर्पित मां को बहुत बहुत प्रणाम।

17587 registered users
6689 resources