किसी 'खास' की जानकारी भेजें। लक्ष्‍मी सेवडियाँ : जुझारू प्रबन्‍धक, कुशल अध्‍यापिका

'मैं शिक्षिका हूँ । लेकिन एक महिला होने के नाते परिवार की सम्‍पूर्ण जिम्‍मेदारी भी होती है। घर को भी सुव्‍यवस्थित तरीके से चलाना होता है। बच्‍चों की देखभाल व परवरिश भी करनी होती है। साथी शिक्षक सोचते थे कि यह स्‍कूल तथा परिवार दोनों की जिम्‍मेदारी कैसे उठा पाएगी ? इसका तो पूरा ध्‍यान परिवार में ही लगा रहेगा। दूसरी बात कि यह महिला है तो मीटिंग या ट्रेनिंग में कैसे जाएगी? देर-सवेर अकेले आने-जाने में परेशानी होगी, तो सारी स्‍कूल की व्‍यवस्‍था कैसे सम्‍भालेगी?' यह कहना था मेरे साथियों का लेकिन जो मैंने किया वह आपके सामने है। 

विद्यालय एवं परिसर

हमारा विद्यालय जो कि बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय है यह नांदिया गाँव में स्थित है। नांदिया गाँव जिला मुख्यालय से लगभग 30 कि.मी. तथा ब्लॉक मुख्यालय से 15 कि.मी. दूरी पर स्थित है। एक तरफ प्राचीन जैन मन्दिर स्थित है जिसके कुछ ही दूरी पर तालाब है। विद्यालय के एक तरफ पहाड़ है तथा शेष दोनों तरफ पक्की ऊँची चार दिवारी है। विद्यालय के सामने ही राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय है। विद्यालय की भौतिक स्थिति इतनी आकर्षक है कि आगन्तुक मन्त्रमुग्ध हो जाते हैं।

विद्यालय में कुल ग्यारह कमरे तथा एक हॉल है। इनमें कार्यालय कक्ष, कम्प्यूटर कक्ष, स्टोर कक्ष, लहर कक्ष तथा रसोईघर सम्मिलित हैं। पीने के पानी के लिए ट्यूब वैल तथा नल कनेक्शन हैं। विद्यालय में बिजली है तथा प्रत्येक कक्षा-कक्ष में पंखे लगे हैं। भामाशाह श्री रमेश प्रजापत की तरफ से पीने के पानी के लिए टंकी बनवाई गई है। बालिकाओं के लिए शौचालय बने हुए हैं। विकलांग छात्राओं के लिये विशेष शौचालय का निर्माण सर्व शिक्षा अभियान में करवाया गया है। परिसर में चारों तरफ पौधे तथा वृक्ष हैं जिससे हरियाली दिखाई देती है। इनमें नीम, बरगद, पीपल, अशोक, शीशम, बोगनवेलिया व अन्य पौधे हैं। बच्चों के लिए फिसल पट्टी व झूले हैं। विद्यालय प्रांगण में एक बड़ा खेल मैदान है जहाँ बालिकाएँ, खो-खो, बैडमिंटन खेलती हैं। विद्यालय में 2 साईकिल, 3 कम्प्यूटर, 12 सिलाई मशीन व अन्‍य खेल सामग्री उपलब्ध है। बालिकाओं के बैठने के लिए दरियाँ हैं। विद्यालय भौतिक सुविधाओं से सम्पन्न हैं। विद्यालय में वर्तमान में 5 शिक्षक तथा 2 शिक्षिकाएँ कार्यरत हैं। विद्यालय में में 247 बालिकाएँ नामांकित हैं। छात्राओं का शैक्षणिक स्तर बेहतर है।

समस्याएँ जो मैंने पाईं

  • बालिकाओं का शैक्षिक स्तर पिछड़ा हुआ था। जैसे उन्‍हें हिन्दी के कठिन शब्द पढ़ने व लिखने नहीं आते थे। अधिकांश बालिकाओं को वाक्य पढ़ने नहीं आते थे। अँग्रेजी विषय में बालिकाओं की रुचि कम थी।
  • विद्यालय परिसर में ढंग से सफाई का अभाव था। बालिकाएँ स्वच्छता से विद्यालय नहीं आती थीं।
  • बालिकाओं को पढ़ाई या स्वच्छता से सम्बन्धित बातें समझाने पर शुरू में उन पर कोई असर नहीं होता था। ज्यादा जोर देने पर वे अपने अभिभावकों मुख्यतः माताओं को विद्यालय में साथ ले आती थीं।
  • पोषाहार खाने के समय बालिकाओं में जाति भेदभाव होता था।

किए गए प्रयास और उनके परिणाम

सर्वप्रथम उपर्युक्त समस्याएँ साथी शिक्षिका सुश्री रागिनी यादव को बताईं। उन्होंने भी इन समस्याओं को महसूस किया। हम दोनों ने साथी शिक्षकों से विद्यालय परिसर व बच्चों की साफ-सफाई के बारे में चर्चा की। और निम्‍न कदम उठाए-

  • बच्चों को अपने कक्षाध्यापक से विशेष स्नेह होता है। अतः यह तय किया कि प्रत्येक कक्षाध्यापक अपनी कक्षा की बालिकाओं को स्वच्छता के लिए रोज कहेंगे।
  • प्रार्थना सभा में स्वच्छता का महत्व समझाया जाने लगा। सफाई से आने वाली बालिकाओं को प्रार्थना सभा में खड़ा करके उनकी स्वच्छता की प्रशंसा की जाती तथा उनके लिए तालियाँ बजवाई जाने लगी।
  • जब बालिकाएँ स्वयं की सफाई के लिए जागरूक हुई तब उन्हें कक्षाकक्ष सफाई तथा विद्यालय परिसर की सफाई की जानकारी देना शुरू किया।
  • शुरु में मैं तथा साथी शिक्षिका रागिनी यादव बालिकाओं के साथ मिलकर सफाई करते थे। जब आने वाले लोग विद्यालय परिसर की सफाई की प्रशंसा करने लगे तब साथी शिक्षकों ने भी रुचि दिखाई और वो भी सफाई पर ध्यान देने लगे।
  • प्रत्येक गुरुवार को सभी ने मिलकर सफाई करने का नियम बना लिया। बालिकाओं को समझाया जाता कि विद्यालय भी उनके परिवार का हिस्सा है। उनका भी विद्यालय पर अधिकार है। बालिकाएँ कचरा दूर खड्ड़े में डालने लगी जिससे स्वतः ही सफाई रहने लगी।
  • विद्यालय परिसर में आने वाले जानवरों जैसे गाय व कुत्तों को बाहर निकाला जाने लगा। बालिकाओं में आदत डाली गई कि विद्यालय में अन्दर आने व बाहर जाने पर गेट बन्द करें जिससे जानवरों का आना बहुत कम हो गया।
  • बालिकाओं को स्थानीय भाषा के साथ ही हिन्दी बोलने के लिए कहा जाने लगा जिससे हिन्दी के शब्दों का उच्चारण सही तरीके से कर पाएँ। शब्दों का उच्चारण सही होने पर वे शब्दों को सही लिख सकेंगे तथा वाक्य पढ़ सकेंगे।
  • साथी शिक्षक जो कि अधिकतर स्थानीय भाषा में बात करते थे उन्हें भी चर्चा करके स्थानीय भाषा के साथ हिन्दी में बात करने के लिए समझाया गया।

बालिकाओं को अँग्रेजी विषय से डर लगता था। वे सोचती थी कि अँग्रेजी, गणित व विज्ञान विषय कठिन है। अतः वे इन विषयों में रुचि नहीं लेती थीं। बालिकाओं के इस डर को समाप्त करने के लिए सभी शिक्षकों ने मिलकर निम्न बिन्दुओं पर चर्चा की और उन्‍हें अमल में लाए-

  • बालिकाओं को यह न कहा जाए कि ये विषय कठिन हैं, इनमें बहुत ज्यादा मेहनत की आवश्यकता है। यदि ज्यादा नहीं पढ़ोगी तो इन विषयों में फेल हो जाओगी।
  • इन विषयों को पढ़ाने वाले विषयाध्यापक जो पाठ या विषय-वस्तु बच्चों को रुचिकर लगे तथा सरल हो वह पहले पढ़ाया जाए। ऐसा करने से वह बालिकाओं को याद कराने पर वह याद रहने लगा तथा इन विषयों में थोड़ी-थोड़ी रुचि उत्पन्न होने लगी।
  • अँग्रेजी में बालिकाओं को छोटी-छोटी Spellings लिखवाई तथा उन्हें याद करवाकर बोलचाल में प्रयुक्त करवाने लगे। जैसे School, Dog, Cow, Cat, Rat, Tea, Water, Student, Chair, Table, Door, Window। शुरुआत में बालिकाओं को संकोच होता था कि हमारा मजाक बनाया जाएगा, परन्तु जब हम भी इन शब्‍दों को उनके सामने प्रयुक्त करते थे तब उनका आत्मविश्वास बढ़ा तथा वे पढ़ाई में रुचि लेने लगीं।

अभिभावकों, समुदाय, अधिकारियों तथा साथियों का सहयोग

  • बालिकाओं को पढ़ने या सफाई के लिए जोर देकर कहते तब वे अपने अभिभावकों को विद्यालय में ले आती थीं। अभिभावक आकर बालिकाओं के कहे अनुसार बात करते थे तब उन्हें समझाया जाता कि शिक्षा बालिकाओं के स्वयं के लिए, भावी जीवन के लिए तथा आने वाली पीढ़ी के लिए आवश्यक है। एक बालिका के शिक्षित होने से दो घरों में सुधार होगा। अभिभावक भी इस कार्य को सराहने लगे।
  • विद्यालय आते-जाते समय या जब भी अभिभावकों से सम्पर्क होता तो उनसे उनकी बेटी के शैक्षिक स्तर व स्वच्छता की बात आवश्यक रूप से करने लगे जिससे कि वे भी अपनी बेटी को पढ़ाई के लिए अधिक समय देने लगे तथा बालिकाओं के नियम समय व नियमित रूप से विद्यालय भेजने लगे।
  • समय-समय पर ब्लॉक शिक्षा अधिकारी साथी शिक्षिका सुश्री रागिनी यादव, गाँव के उपसरपंच श्री सांकलाराम, एस.डी.एम.सी.सदस्य श्री राजेश खण्डेलवाल, श्री शिवलाल जी से विद्यालय से सम्बन्धित कार्यो के बारे में उचित मार्गदर्शन प्राप्त किया कि विद्यालय का शैक्षिक वातावरण कैसे बढ़ाया जाए।
  • मासिक नोडल बैठक में नियमित रूप से उपस्थित होकर दिए गए दिशा-निर्देशों को नोडल के अन्तर्गत आने वाले विद्यालयों को सुचारू रूप से दिए जाने लगे। नोडल के अन्तर्गत आने विद्यालयों के Head Master की माह में दो बार स्थानीय विद्यालय में बैठक बुलाई जाने लगी। एस.डी.एम.सी. की बैठकों का आयोजन नियमित रूप से किया जाने लगा। कम्प्यूटर को व्यवस्थित करके सभी प्रकार की डाक कम्प्यूटर से तैयार की जाने लगी। पुस्तकालय को व्यवस्थित किया गया। कक्ष में तार बाँधकर पुस्तकें उन पर लटका दी गईं। जिससे छोटे बच्चे रुचि की पुस्तक निकालकर पढ़ सकें तथा पुनः लटका दें।

प्रयासों से आए कुछ महत्‍वपूर्ण परिवर्तन

  • सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तन बालिकाओं के व्यवहार में आया है। जहाँ पहले बालिकाएँ सामने आने व बोलने में संकोच करती थी अब वे स्वयं आकर शिक्षकों से नमस्ते/"Good Morning" करती हैं।
  • बालिकाओं के साथ मित्रतापूर्ण व्यवहार से उनका आत्मविश्‍वास बहुत बढ़ गया है। अब वे कक्षा में अपनी सभी तरह की समस्याएँ बतलाती है। सभी बालिकाएँ गुरुवार को छोड़कर प्रत्येक दिन विद्यालय गणवेश में 2 चोटी फीता बाँधकर तथा चुन्नी को व्यवस्थित पिनअप करके आती हैं।
  • अधिकांशतः बाल संसद की बालिकाएँ सारा काम अपने देख-रेख में करती हैं। पोषाहार खाने के दौरान सभी बालिकाएँ दरी पर बैठकर भोजन मन्त्र बोलकर खाना खाती हैं।
  • हरियालो राजस्थान कार्यक्रम के तहत वृक्षारोपण किया गया जिसमें बालिकाओं के समूह बनाकर उन्‍हें पौधा दिया गया तथा उनका नामकरण करके पौधे की सुरक्षा व पानी की जिम्मेदारी समूहों को दी गई। पूर्व में विद्यालय में पौधों की संख्या 60 थी जो अब लगभग 110 हो गई है।

कुछ उल्‍लेखनीय उपलब्धियाँ

  • प्रोत्‍साहन अवार्ड विज्ञान प्रदर्शनी में कक्षा आठ की छात्रा किंजल खण्डेलवाल ने ब्लॉक स्तर पर द्वितीय स्थान तथा जिला स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया।
  • मेरे आने से पूर्व कक्षा आठ की बोर्ड परीक्षा का परिणाम 44.11 प्रतिशत था जो सत्र 2008-09 में 87 प्रतिशत तथा 2009-10 में 75 प्रतिशत हो गया है।
  • अगस्त 2009 में सत्रारम्भ वाक्पीठ का सफल आयोजन किया गया जिसमें एस.डी.एम.सी. सदस्यों तथा बालिकाओं की भूमिका प्रशंसनीय थी।
  • विद्यालय में लहर कक्षा-कक्ष का निर्माण ब्लॉक में सर्वप्रथम करवाया गया जिसमें मैनें स्वयं पेन्टिंग की है।
  • यूनिसेफ के द्वारा घोषित 2008-09 स्वच्छता वर्ष में विद्यालय ने ब्लॉक में द्वितीय स्थान प्राप्त किया।

श्रीमती लक्ष्मी सेवडियाँ 

  • एम.एससी. (वनस्‍पतिशास्‍त्र),बी.एड.  
  • राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय, नांदिया पंचायत समिति- पिण्डवाडा, जिला सिरोही
  • नियुक्ति तिथि : 23 जनवरी, 2001 
  • रुचियाँ : पेन्टिंग, बागवानी

 

 

 


वर्ष 2009 में राजस्‍थान में अपने शैक्षिक काम के प्रति गम्भीर शिक्षकों को प्रोत्‍साहित करने के लिए 'बेहतर शैक्षणिक प्रयासों की पहचान’ शीर्षक से राजस्‍थान प्रारम्भिक शिक्षा परिषद तथा अज़ीम प्रेमजी फाउण्‍डेशन द्वारा संयुक्‍त रूप से एक कार्यक्रम की शुरुआत की गई। 2009 तथा 2010 में इसके तहत सिरोही तथा टोंक जिलों के लगभग 50 शिक्षकों की पहचान की गई। इसके लिए एक सुगठित प्रक्रिया अपनाई गई थी। लक्ष्‍मी सेवडियाँ वर्ष 2010 में ' विद्यालय प्रबन्‍धन एवं नेतृत्‍व' श्रेणी में चुनी गईं  हैं। यह लेख पहचान प्रक्रिया में उनके द्वारा दिए गए विवरण का सम्‍पादित रूप है। लेख में आए विवरण उसी अवधि के हैं। हम लक्ष्‍मी सेवडियाँ,राजस्‍थान प्रारम्भिक शिक्षा परिषद तथा अज़ीम प्रेमजी फाउण्‍डेशन, सिरोही के आभारी हैं। 


 

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