किसी 'खास' की जानकारी भेजें। राजकीय प्राथमिक विद्यालय, मोरवन, चित्तौड़गढ़,राजस्थान

‘मोरवन’ मतलब मोरों का वन, ऐसा वन जहाँ मोर रहते हों। जी हाँ, चित्तौड़गढ़ जिले की डूडंला पंचायत में मोरवन गाँव के लोगों का ऐसा ही कुछ मानना है अपने गाँव के बारे में। गाँव के प्राथमिक विद्यालय को देखकर यकीन हो जाता है कि इस गाँव का यही नाम होना चाहिए।

सन् 2007 में जब महावीर जी को यहाँ पर प्रधानाध्यापक के पद पर नियुक्त किया गया था, तब विद्यालय की हालत अच्छी नहीं थी। यह आम सरकारी विद्यालयों जैसा ही हुआ करता था। मात्र 84 बच्चों का नामांकन था, जिनमें से कई तो लगातार अनुपस्थित रहा करते थे। विद्यालय के बाहर खेल के मैदान के नाम पर उबड़-खाबड़ पथरीली जमीन और कंटीली झाडि़याँ थीं। खेल खेलना तो क्या, वहाँ से होकर विद्यालय तक पहुँचने में भी बच्चों को परेशानी होती थी। महावीर जी तथा अन्य शिक्षकों ने अपने इस विद्यालय को सुन्‍दर बनाने और अच्छी पढ़ाई-लिखाई का माहौल तैयार करने का प्रयास शुरू किया। इस तरह के प्रयासों की चर्चा जब शिक्षक पालक संघ की बैठकों में रखी जाने लगीं तो पालकों का सहयोग भी मिलने लगा।

ललित जी शिक्षक पालक संघ के अध्यक्ष हैं। उनके परिवार से कुछ बच्चे इसी स्कूल में पढते हैं। महावीर जी तथा ललित जी और अन्य कुछ लोगों ने मिलकर विद्यालय विकास के लिए गाँव के संपन्न घरों से चन्‍दा एकत्रित किया। उनके इस तरह के प्रयासों में जिले के वरिष्ठ अधिकारियों का योगदान भी मिलता गया।

कंटीली झाडि़याँ साफ करके मैदान को समतल किया गया और उसमें पेड़  पौधे तथा झूले लगवाए गए। विद्यालय तथा मैदान को सुरक्षित रखने के लिए चारों तरफ एक चारदिवारी का निर्माण भी करवाया गया। बालकों तथा बालिकाओं के लिए शौचालय बनवाया गया तथा वहाँ तक पहुँचने के लिए पक्का रास्ता तैयार किया गया। अब बारिश के मौसम में भी पाँवों में बिना कीचड़ लगे बच्चे शौचालय तक जाकर आ सकते हैं। बगीचा, फिसलपट्टी तथा झूले लग जाने के बाद यह स्कूल आसपास के कई गाँवों में अपनी नई पहचान के साथ जाना जाने लगा। साफ सफाई और स्वास्थ्य के मुददों पर बच्चों और अभिभवाकों को जागरूक किया गया। इससे बच्चों के बीमार पड़ने की संख्या तेजी से कम हुई साथ ही अभिभावकों में भी विद्यालय के प्रति भरोसा बढ़ गया। इस तरह बच्चों की नामांकन संख्या में तेजी से इजाफा हुआ।

कक्षा-कक्ष की प्रक्रियाओं में भी बदलाव लाने का प्रयास हुआ। पुस्तक के पाठों को पढाने के लिए कंम्प्यूटर का प्रयोग किया जाने लगा। अज़ीम प्रेमजी फाउण्डेशन द्वारा उपलब्ध कराई गई ई-लर्निगं सामग्री को प्रयोग करने से बच्चों में रुचि बढ़ी।

महावीर जी को 2015 के राष्‍ट्रपति पुरस्‍कार से सम्‍मानित होने के लिए बहुत बहुत बधाई।

स्‍कूल में शासन के सहयोग से और कमरे भी बनवाए गए। आज एक बड़े से कक्ष में संगीत का साजो सामान मौजूद है। रोज सुबह की प्रार्थना सभा सुर और ताल के साथ होती है। इसी कक्ष में एक तरफ की दीवार पर बड़ा सा सफेद परदा देख आश्‍चर्य हुआ। विद्यालय में प्रोजैक्टर भी है। इस बड़े से परदे पर ई-सामग्री के पाठ, मीना की कहानियाँ, पंचतंत्र की कहानियाँ  तथा अच्छी बाल फिल्में भी बच्चों को दिखाई जाती हैं। शिक्षकों ने बताया कि बड़े परदे पर कार्यक्रम देखने में बच्चों को बहुत आनन्द आता है।

सडक से गुजरने वाले प्रत्येक राहगीर को विद्यालय का मुख्यद्वार आकर्षित करता है। गेट से विद्यालय तक पहुँचने के रास्ते को आकर्षक रंगों से रंगा गया है। इस रास्ते के दोनों तरफ झूमते नीम के पेड़ की छाँव बहुत अच्छी लगती है।

मैदान के दूसरे हिस्से में एक गणित पार्क भी तैयार किया गया है। तत्‍कालीन जिला शिक्षा अधिकारी ने स्वयं इस गणित पार्क के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाई थी। गोला,आयत, शंकु, पिरामिड आदि के बड़े-बड़े माडल बने हुए हैं। बच्चे इनको छूकर देख सकते हैं। आकारों की बनावट तथा सूत्रों को समझाने के लिए गणित के शिक्षक बच्चों को इसी पार्क में लेकर आते हैं। गाँव के बच्चे छुट्टी वाले दिन भी यहाँ आकर खेलना पसन्‍द करते हैं। शाम के समय गाँव के वयस्‍क भी यहाँ आकर वक्त गुजारते हैं। विद्यालय के बच्चों ने खेलकूद में भी अपना नाम किया है। खो खो टीम ने जिला स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया है।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी इस विद्यालय के बच्चों का नाम है। मैदान के एक हिस्से में आकर्षक मंच बना हुआ है। पिछली 26 जनवरी को गाँव के लोगों ने बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनन्द लिया। समुदाय की तरफ से तमाम किस्म के पुरस्कार बच्चों को दिए गए। मंच के फर्श को पक्का करने के लिए 21000 रूपए का सहयोग समुदाय ने प्रदान किया है।

आज राजकीय प्राथमिक विद्यालय मोरवन की ख्याति का परिणाम यह है कि यहाँ कुल नामांकन संख्या 173 तक पहुँच गई है। गाँव के आसपास दो अन्‍य सरकारी तथा एक निजी विद्यालय भी हैं, लेकिन अब अभिभावक अपने बच्चों को वहाँ से निकालकर प्राथमिक विद्यालय मोरवन में दाखिला दिला रहे हैं।

राजकीय प्राथमिक विद्यालय मोरवन के शिक्षक तथा शिक्षिकाएँ अपने इस स्कूल को सर्वश्रेष्ठ विद्यालय बनाना चाहते हैं। उनकी लगन,मेहनत तथा समुदाय की सहयोग की भावना देखकर लगाता है कि जल्द ही वे अपने मकसद में कामयाब होगें।


मोहम्मद उमर,अज़ीम प्रेमजी फाउण्डेशन, चित्‍तौड़गढ़,राजस्‍थान  

 

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