किसी 'खास' की जानकारी भेजें। यतीन्‍द्रसिंह खंगारोत : अँग्रेजी विषय को रुचिकर बनाने के प्रयास

मैं राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, नारेड़ा, पंचायत समिति टोडारायसिंह (टोंक) में जनवरी 2008 से कार्यरत हूँ। इस विद्यालय की स्थापना 1962 में एक प्राथमिक विद्यालय के रूप में हुई थी। यह टोंक जिले का सुदूरतम गाँव है। 2007 में इसे उच्च प्राथमिक स्तर पर क्रमोन्नत किया गया। अध्यापक संख्या 4 है। विद्यालय का भौतिक वातावरण अच्छा है। विद्यालय में 4 हॉल 4 कमरे, एक प्रधानाध्यापक कक्ष, रसोई घर, भण्डार, शौचालय है। परिसर में पेड़-पौधे लगाकर ग्रीन कॉर्नर तैयार किए जा रहे हैं। पानी के लिए हैण्डपम्प लगा हुआ है, जिससे शाला स्वच्छता व वृक्षारोपण कार्य में काफी सहायता मिली है। ग्राम नारेड़ा की जनसंख्या लगभग 700 है। इस विद्यालय में आसपास के गाँवों के विद्यार्थी उच्च प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ने आते हैं। गाँव में कोई निजी विद्यालय नहीं है, इसका प्रमुख कारण राजकीय विद्यालय में अच्छी पढाई का होना है। विद्यालय में बच्चों की औसत उपस्थिति अच्छी रहती है। प्रति माह औसत 118 से 120 तक रहता है। विद्यालय का वातावरण इतना अच्छा है कि आँगनवाड़ी के बच्चे भी स्कूल में आ जाते हैं एवं दिन भर यहीं रहते हैं। विद्यालय में आने के लिए बच्चे उत्साहित रहते हैं। विद्यालय के अन्य अध्यापक भी नियमित आते हैं और अच्छे से शिक्षण कार्य सम्पादित करते हैं।

अँग्रेजी शिक्षण

अँग्रेजी विद्यालयों में द्वितीय भाषा के रूप में पढ़ाई जाती है। भारतीय परिवेश में जहाँ 60 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या ग्रामीण पृष्ठभूमि से जुड़ी है, वहाँ के परिवारों में अँग्रेजी भाषा का प्रयोग नगण्य है। आज भी भारतीय परिवारों में अपनी क्षेत्रीय भाषा का प्रयोग ज्यादा किया जाता है। चूँकि क्षेत्रीय भाषा एवं हिन्दी में बहुत समानताएँ होती हैं, अतः हिन्दी भाषा सीखने में बच्चों को इतनी समस्या उत्पन्न नहीं होती, जितनी अँग्रेजी भाषा।

मेरे सम्मुख प्रमुख समस्या बच्चों में अँग्रेजी के प्रति रुचि का अभाव था। द्वितीय भाषा होने के कारण अवांछित एवं अनजाना भय था। उनसे वार्तालाप किया तो यह बात सामने आई कि बच्चे अँग्रेजी को एक हौव्वा समझते हैं।

मैंने अँग्रेजी विषय को रुचिकर, सरल, सुगम बनाने के लिए सर्वप्रथम कक्षा-कक्ष वातावरण पर ध्यान दिया। मैंने आकर्षक, चमकीले रंगों का प्रयोग कर स्वनिर्मित चार्ट एवं पोस्टर द्वारा कक्षा-कक्ष को सजाया। चार्टों के विषय विद्यार्थियों के स्तरानुसार ही लिए जैसे- शरीर के अंगों के नाम, सप्ताह के दिन, गिनती, महिनों के नाम, रंगों के नाम आदि। सप्ताह के दिनों को सूर्य और फूलों के द्वारा दर्शाया। रंगों के लिए अलग-अलग रंग के गुब्बारे एक लड़की के हाथ में दिखाए। गिनती के अक्षरों को फूलों के बीच आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया। महिनों के नाम लिए एक लड़के के हाथ में लिखे।

बच्चों को प्ले कार्डस् के माध्यम से पढ़ाना शुरू किया। अँग्रेजी वर्णमाला के अक्षरों को थर्मोकॉल पर चिपकाकर प्ले कार्डस् बनाए। खेल-खेल में वे इन्हें क्रम से जमाने में सफल हुए। नए शब्द बनाना सीखा जैसे HUT (झोंपड़ी) की spelling बनाने को कहा तो जिस बच्चे के पास H वाला कार्ड है वह खड़ा हुआ। फिर क्रमशः U एवं T कार्ड वाले बच्चों ने खड़े होकर HUT को पूरा किया।

बच्चों को अधिक से अधिक अँग्रेजी शब्दों को बोलने के लिए प्रेरित किया। जैसे-सामान्य अभिवादन के शब्द Good morning, Good evening, Good Afternoon, Welcome to you, Stand up, Sit Down, Hello, How are you, Please give me etc.

बहुत सारे दैनिक जीवन में वार्तालाप वाले वाक्यों का अभ्यास करवाया जैसे- What is your name, Father's, Mother's name etc, Where are you live, How old are you etc.

दैनिक जीवन में प्रयुक्त होने वाली वस्तुओं को अँग्रेजी में ही बोलने को प्रेरित किया। बच्चे जिन वस्तुओं के नाम अँग्रेजी में नहीं जानते, उनके नाम पूछने लगे। जैसे- School bag, Pen, Note book, Books, Sharpner, Eraser, Tooth Brush, Paste, Plate, Bowl, Spoon, Mug etc. और भी बहुत सारे शब्द जो उनको आसपास के वातावरण में दिखाई दिए।

बच्चों का शब्दकोश अच्छा करने के दिशा में भी प्रयास किए । रोजाना कम से कम पाँच मीनिंग (अपनी पाठ्य पुस्तक से शुरू करके) याद करने की आदत का विकास किया। यह प्रक्रिया सरल से जटिल की ओर के सिद्धान्त को ध्यान में रखकर की। जैसे पहले छोटे-छोटे मीनिंग के शब्द जैसे- Ass, Gum, Hen,  Bell, Rose, Finger, Plumber etc.

इन शब्दों को चार लाईन की अभ्यास पुस्तिका में लिखवाना शुरू किया। जिससे उनकी हस्तलिपि में भी सुधार हुआ। प्रयास किया कि प्रत्येक विद्यार्थी की अभ्यास पुस्तिका जाँचकर उनसे याद किए मीनिंग को पूछे। इसमें कक्षा के बच्चों को भी शामिल कर दिया। विद्यार्थी आपस में ही एक-दूसरे को मीनिंग सुनाते और पूछते। इस प्रक्रिया से और भी अधिक अच्छे नतीजे आए। बच्चों को अपने याद किए हुए पाँच मीनिंग के अलावा दूसरे बच्चों द्वारा याद किए हुए मीनिंग भी सुनने को मिले, जिससे उनकी रुचि शब्दकोष में बनी।

इसी तरह बच्चों को टाइम देखना सिखाया, जिसमें दीवार घड़ी की मदद ली गई। ब्लैकबोर्ड पर चॉक की सहायता से घड़ियाँ बनाकर टाईम देखने का अभ्यास करवाया। टाईम को सिर्फ अँग्रेजी में ही बताने पर जोर दिया । बीच-बीच में कभी अलग-अलग बच्चों को ऑफिस में भेजकर टाईम देखकर आने को कहा। अब बच्चे It is ten o'clock, It is quarter past ten, It is ten minutes to ten आदि तरह से समय बताने में सक्षम हुए इसका सबसे अधिक फायदा यह हुआ कि इन बच्चों को इस तरह अँग्रेजी में बोलते देखकर बड़ी कक्षाओं के बच्चों में रुचि पैदा हुई एवं वे भी सीखकर इसी तरह बोलने लगे। उनकी कक्षा कार्य की अभ्यास पुस्तिका में भी घड़ियाँ बनाकर उनके सामने टाईम लिखना शुरू किया।

बच्चों को सामान्य Structure की मदद से अलग-अलग वाक्य बनाना सिखाया। इसके साथ वे Artcles, Numbers भी सीख गए। कक्षा-कक्ष टेबिल पर बहुत सारी चीजों को इकट्ठाकर इन Structure का अभ्यास करवाया। वस्तुओं के पास व दूर खड़े होकर प्रश्न करने पूछने पर वे अब उत्तर बताने में सक्षम हुए। वे अब वस्तुओं को देखकर This is a pen, that is a hundpump, these are charts etc.  वाक्य बोलने में सक्षम हुए।

उच्चारण में सुधार के लिए पहले मैंने सही Phonetic, Stress का ध्यान रखकर वाचन किया गया। फिर एक-एक कर बच्चों को दोहराने के लिए कहा। उनके अशुद्ध उच्चारण को ब्लैक बोर्ड पर लिख दिया । फिर उनकी गलतियों में सुधार करवाया।

बच्चे पहले हिन्दी की तरह अँग्रेजी वाक्यों को भी लाईन के नीचे लिखते थे। अब धीरे-धीरे वे जब मीनिंग चार लाईन में लिखकर लाने लगे तो उनको लाईन के ऊपर लिखने को प्रेरित किया। कक्षा कार्य की अभ्यास पुस्तिका में कार्य करते समय कक्षा में घूमकर प्रत्येक छात्र की अभ्यास पुस्तिका ध्यान देकर उनके लिखने में हो रही त्रुटियों को दूर करने का प्रयास किया गया। वार्तालाप वाले पाठों में किरदारों का बच्चों द्वारा अभिनय करवाया। जैसे किसी अध्याय में किरदार अनिल, सुरेश, ममता है तो यह किरदार बच्चों द्वारा निभाए गए एवं उनके संवादों को बच्चों द्वारा बोला गया। कक्षा 3, 4 व 5 की पाठ्य पुस्तक में ऐसे कई अध्याय सम्मिलित हैं।

रेडियो कार्यक्रम की मदद

रेडियो पर अँग्रेजी शिक्षण पर केन्द्रित कार्यक्रम आता था। मैंने अँग्रेजी शिक्षण में उसकी मदद ली। प्रसारण के समय बच्चों को एक साथ बिठाकर रेडियो सुनने का माहौल बनाया। जिस दिन जो पाठ रेडियो पर आना वाला होता उससे सम्बन्धित तथ्यों को ब्लैकबोर्ड पर प्रसारण शुरू होने से पहले ही लिख देता। इसके लिए रेडियो मार्गदर्शिका पुस्तिका की सहायता ली। रेडियो से पढ़ने का अनुभव बच्चों के लिए नया था। रेडियो की कविता बच्चे लय के साथ गाते। दिए जा रहे निर्देश को समझकर बच्चे अनुकरण करते। जैसे- रेडियो में आता स्टेण्ड अप बॉयज, तो केवल लड़के ही खड़े होते और वन लिटिल फिंगर तो बच्चे अपनी एक अँगुली खड़ी करते। ऐसे ही खेल-खेल में उन्हें अँग्रेजी पढ़ना रुचिकर लगने लगा। बच्चे रेडियो प्रसारण का इन्तजार करते। समय होते ही वे अपने निहित स्थान पर जा बैठते। इससे उनका शब्दकोश भी अच्छा हुआ क्योंकि इसमें शब्दों के विलोम, बहुवचन आदि भी बताए जाते।

रेडियो प्रसारण के पश्चात् कविता द्वारा अँग्रेजी के विविध विषयों का अभ्यास करवाया जाता। बच्चों को यह सब खेल लगता है और खेल-खेल में वे बहुत सारी चीजें सीखते।

मूल्यांकन

बच्चों ने जो सीखा है उसका सतत् मूल्यांकन भी किया जाता रहा है। साप्ताहिक कक्षा टेस्ट का आयोजन किया जाता उनको अंक के स्थान पर ग्रेड प्रदान किए गए। त्रुटियों को सुधारने का प्रयास किया जाता उन्हें अन्य तरीकों से समझाया जाता। आवश्यकता होती तो उनके लिए अलग उनके स्तर का टेस्ट रखा जाता।

इस तरह से मूल्यांकन करने से उनमें अपेक्षित सुधार दृष्टिगत हुए। विद्यार्थियों के व्यवहार से लगा, उनमें अँग्रेजी शिक्षण में रुचि जाग्रत हुई है, वे कक्षा में अधिक प्रश्न पूछने लगे। उनके आपसी वार्तालाप से भी उन्होंने जो सीखा है उसकी झलक मिलती है।

यतीन्द्र सिंह खंगारोत

  • राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, नारेडा ,टोडारायसिंह, टोंक
  • 2008 से शिक्षक हैं।

    वर्ष 2009 में राजस्‍थान में अपने शैक्षिक काम के प्रति गम्भीर शिक्षकों को प्रोत्‍साहित करने के लिए ‘बेहतर शैक्षणिक प्रयासों की पहचान’ शीर्षक से राजस्‍थान प्रारम्भिक शिक्षा परिषद तथा अज़ीम प्रेमजी फाउण्‍डेशन द्वारा संयुक्‍त रूप से एक कार्यक्रम की शुरुआत की गई। 2010 तथा 2011 में इसके तहत सिरोही तथा टोंक जिलों के लगभग 50 शिक्षकों की पहचान की गई। इसके लिए एक सुगठित प्रक्रिया अपनाई गई थी। यतीन्द्र सिंह खंगारोत वर्ष 2010-11 में बेहतर शैक्षणिक प्रयास  के लिए चुने गए हैं। यह टिप्‍पणी पहचान प्रक्रिया में उनके द्वारा दिए गए विवरण का सम्‍पादित रूप है। लेख में आए विवरण उसी अवधि के हैं। टीचर्स ऑफ इण्डिया पोर्टल टीम ने यतीन्द्र सिंह खंगारोत से उनके काम तथा शिक्षा से सम्‍बन्धित मुद्दों पर बातचीत की। वीडियो इस बातचीत का सम्‍पादित अंश हैं। हम यतीन्द्र सिंह खंगारोत, राजस्‍थान प्रारम्भिक शिक्षा परिषद तथा अज़ीम प्रेमजी फाउण्‍डेशन, टोंक के आभारी हैं।


     

17370 registered users
6658 resources