किसी 'खास' की जानकारी भेजें। बेहतर बनता घाड़ का स्कूल

विद्यालय में 6 कमरे हैं। वह हमेशा साफ-सुथरे रहते हैं। टायलैट्स भी साफ रहते हैं। रसोईघर भी साफ रहता है। विद्यालय की समस्त सामग्रियाँ निश्चित स्थान पर रहती है। बच्चों से जुडी सामग्रियाँ उनकी पहुँच में होती है। उनको उपयोग में भी लिया जाता है और वापस वहीं रख दिया जाता है। शिक्षण में गतिविधियों का प्रयोग अधिकतम किया जाता है। टी.एल.एम. का उपयोग किया जाता है तथा इसे शिक्षक व बच्चों के द्वारा बनाया भी जाता है। स्कूल के शिक्षकों का अधिकतर समय बच्चों के साथ में व्यतीत होता है। बच्चे निसंकोच अपनी बातें सभी शिक्षकों के साथ कर लेते हैं। अभिभावक स्कूल में हो रहे शिक्षण कार्य से संतुष्ट नजर आते हैं।

एक स्कूल के बारे में अगर ऐसा कुछ कहा जा रहा है, तो यह साफ है कि वह आज के परिदृश्‍य में एक ठीक-ठाक स्कूल है। लेकिन अगर किसी स्कूल में ऐसा कुछ हो भी रहा है, तो उसके कुछ कारण भी अवश्‍य होते हैं। यहाँ हम बात कर रहे हैं, राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय, घाड़, ब्लॉक देवली, जिला टोंक (राजस्‍थान) की। स्कूल की स्थापना सन् 1962 में हुई। स्कूल की दूरी देवली से उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर लगभग चालीस किलोमीटर है। 2005 में यह स्‍कूल क्रमोन्नत होकर उच्‍च प्राथमिक  हुआ। वर्तमान में यहाँ प्रधानाध्यापक सहित कुल आठ शिक्षक/शिक्षिकाओं का स्टॉफ कार्यरत है और 202 बालिकाएँ नामांकित हैं। शिक्षा विभाग की ओर से 2013-14 में स्कूल को नोडल बनाया गया है। गाँव की आबादी 9000 (800 घर) के लगभग है। तीन सरकारी स्कूल (रा.प्रा., रा.बा.उ.प्रा., रा.उ.मा.वि) हैं। दो प्राईवेट स्कूल भी हैं। इन सबके बाद भी दूनी तहसील के कुछ प्राईवेट स्कूलों की बसें भी गाँव से बच्चों को लेने आती हैं।

इन सब परिस्थितियों के बाद भी पहली बात यह कि इस विद्यालय में गाँव से 202 बालिकाएँ नामांकित हैं। दूसरी बात, अधिकतर अभिभावक इस विद्यालय में बच्चों के साथ शिक्षकों द्वारा किए जा रहे कार्यों से खुश हैं। तीसरी और मुख्य बात यह कि विद्यालय की सभी बालिकाएँ यहाँ अपने आपको सहज महसूस करती हैं, उनका मत है कि वह यहाँ अच्छे से सीख रही हैं।

आखिर ऐसा इस विद्यालय में अलग क्या हो रहा है ? वह बहुत कुछ विचित्र तो नहीं ! सामान्य ही है, लेकिन थोड़ा अलग अवश्‍य है, जिसे हम निम्न बिन्दुओं में देख व समझ सकते हैं -

  • विद्यालय में सभी कमरे (कक्षा-कक्ष, रसोई कक्ष, प्रधानाध्यापक कक्ष, टॉयलैट्स आदि) हमेशा साफ-सुथरे रहते हैं।
  • सभी कक्षों में सम्‍बन्धित सामग्रियों का स्थान निश्चित है और बालिकाओं की पहुँच में है।
  • सभी कक्षा-कक्ष या स्कूल में सभी जगह चप्‍पल आदि निश्चित स्थान पर ही रखी जाती हैं।
  • विद्यालय में लगभग 50 से 65 प्रतिशत बालिकाओं का स्तर काफी बेहतर है।

इस सबके पीछे स्कूल स्टॉफ के योगदान को निम्न बिन्दुओं में देखा जा सकता है :

  • प्रधानाध्यापक सहित सभी स्टॉफ के सदस्य हर बार नामांकन की वृद्धि पर विमर्श कर कुछ विशेष योजना के तहत अभिभावकों से घर-घर सम्‍पर्क करते हैं। हर बार उसकी समीक्षा भी की जाती है।
  • दो शिक्षक घाड़ गाँव में ही रहते हैं। वे बालिकाओं के अभिभावकों से निरन्‍तर सम्पर्क बनाए रखने के साथ-साथ बालिकाओं की शैक्षणिक स्थिति पर भी सतत चर्चा करते रहते हैं।
  • विद्यालय में हर शिक्षक द्वारा का विषय तय किया है, वह शिक्षक कक्षा एक से आठ तक वही विषय पढ़ाता है। जिन बालिकाओं का स्तर कम होता है, उनका एक समूह बनाया जाता है तथा उनके स्तर को सुधारने के प्रयास किए जाते हैं।
  • स्कूल के शिक्षक/शिक्षिकाएँ नियमित बालिकाओं की स्थितियों पर तथा कक्षा-कक्ष में किए जा रहे कार्यों के अनुभवों को एक-दूसरे से साझा करते हैं।
  • सभी स्टॉफ के सदस्य स्कूल में बच्चों के साथ अधिक से अधिक समय व्यतीत करते हैं।
  • स्टॉफ के जिस भी शिक्षक को शिक्षण से जुड़ा कुछ नया मिलता हैं, या कोई शिक्षक किसी कार्यशला से जुड़ता है, तो वह अपने अनुभव अपने स्कूल स्टॉफ सदस्यों के साथ विस्तार से साझा करता है।
  • विद्यालय में उपलब्ध गणित किट व विज्ञान किट का उपयोग शिक्षण के दौरान किया जाता हैं।
  • बालिकाओं को कम्प्युटर शिक्षण भी सतत करवाया जा रहा है।
  • विद्यालय में गतिविधियों के साथ शिक्षण करवाया जाता है। टी.एल.एम. का सतत प्रयोग किया जाता है तथा टी.एल.एम. के रूप में छोटी कक्षाओं में ठोस चीजों जैसे कंकड़, चित्र आदि का उपयोग किया जाता हैं।
  • प्रार्थना सभा में सभी (बालिकाओं और समस्त स्टॉफ) की भागीदारी रहती है। इस सभा पर पर्याप्त समय (लगभग 30-35 मिनट) दिया जाता है।
  • सभा में प्रार्थनाओं के अलावा अखबार वाचन, सामान्य ज्ञान से जुड़ी बातें, हाव-भाव के साथ गीत,कविताओं का प्रस्तुतिकरण आदि गतिविधियाँ की जाती हैं। इन सबमें सभी बालिकाओं (कक्षा एक से आठ तक) को अवसर प्रदान किए जाते हैं।
  • स्कूल में सभी दिवसों को मनाया जाता है, उस पर विस्तार से चर्चाएँ की जाती हैं।
  • स्कूल स्टॉफ के सदस्यों द्वारा नियमित अन्तराल के बाद बालिकाओं को खेल भी खिलाए जाते हैं।

अनिल नापित, अज़ीम प्रेमजी फाउण्डेशन, देवली, टोंक, राजस्‍थान

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विद्यालय परिवार के सभी सदस्यों को मेरी ओर से बधाई स्वीकर हों

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