किसी 'खास' की जानकारी भेजें। बदलाव का गरूड़

बिपिन जोशी

उत्तराखण्ड के जनपद बागेश्वर, ब्लॉक गरूड़, के जूनियर हाईस्कूल पिंगलों की, विकास खण्ड से 12 किलोमीटर दूर ग्वालदम-गरूड़ मार्ग से लिंक रोड द्वारा पिंगलो घाटी तक कच्ची-पक्की सड़क है। दूर-दूर छिटके घर, चारों ओर कम ऊँचे पहाड़ और खेतों की कतार जिसे कुमॉउनी बोली में स्यार कहा जाता है, इस क्षेत्र की खूबसूरती बयां करने को काफी हैं।

जूनियर हाईस्कूल पिंगलों के आसपास एक इण्टर कॉलेज, एक प्राइवेट स्कूल और सरकारी प्राथमिक विद्यालय हैं। सड़क से 200 मीटर दूर चढ़ाई में चीड़ के जंगल के बीच स्कूल मजबूत चाहरदीवारी और बड़े से गेट के कारण दूर से ही पहचाना जाता है। चढ़ाई चढ़ जैसे ही स्कूल गेट पार कर पहला कदम स्कूल के प्रांगण में पड़ता है तो सरकारी शिक्षा व्यवस्था के प्रति बनी तमाम मान्यताएँ उड़नछू हो जाती हैं। सफेद कंकड़ों से बड़े से पत्थर पर बड़े करीने से स्वागतम् लिखा है। प्रांगण के चारों ओर पुष्प वाटिका लगी हैं। वाटिका की सुरक्षा के लिए ईंट और लकड़ी से बाड़ की गई है। पुराने कनस्तर, पानी की बोतलों, मिट्टी के गमलों और लोहे की बाल्टियों का उपयोग बरामदे के किनारे फूल उगाने के लिए किया गया है। स्कूल सिर्फ पुष्प वाटिका और सजावट तक सीमित नहीं हैं बालमन की कल्पना और शिक्षकों की लगन वृक्षा रोपण से पर्यावरणीय संरक्षण की ओर भी गई है। विभिन्न किस्म के छायादार-फलदार वृक्ष स्कूल में रोपे गए हैं। उनको समय-समय पर बारी-बारी से पानी दिया जाता है।

स्कूल पहुँचा तो बच्चे प्रार्थना सभा के बाद कक्षा-कक्ष में बैठ चुके थे। कक्षा-कक्ष में बैठक व्यवस्था शानदार है। कक्षा की दीवारें जैसे अभी बोल उठें। बड़ी सुन्दर कलाकृतियाँ उकेरी गई हैं। दीवार के एक बड़े हिस्से में बच्चों की रचनात्मकता और उनकी विषयगत दक्षता का जीवन्त प्रमाण दीवार पत्र भी चस्पा है।

दो अलग-अलग हिस्सों में बैठने की बजाय लड़के-लड़कियाँ सामूहिक रूप में बैठे हैं। इससे एक स्तर की समानता का पुट दिखता है। बच्चों में आपसी सम्मान और धैर्य की समझ भी विकसित हो रही है। इस बात का पता कैसे चला? मैं पहले से कोई खास तैयारी करके नहीं गया था। क्योंकि कक्षा में बच्चों के साथ बात करने की योजना नहीं थी। बहरहाल बातों-बातों में परिचय के दौरान गाँव और शहर के स्कूली वातावरण पर एक बच्चे ने पूछ लिया कि गाँव का सरकारी स्कूल अच्छा या शहर का प्राइवेट स्कूल? क्या वहाँ भी यही पढ़ाया जाता है जो हमें गुरुजी यहाँ  पढ़ाते हैं? सवाल को आगे खोलते हुए मैने बच्चों से ही सुनना चाहा कि उनका स्कूल क्यों अच्छा है ? बच्चे बारी-बारी से हाथ उठा कर अपनी-अपनी बात रखते जाते ऐसा हुआ ही नहीं कि सब एक साथ उत्सुकता से बोल पड़ें और अपनी बात किसी ओर से पहले रखने की होड़ में हों। इस बीच दो बच्चों ने एक साथ हाथ खड़ा किया और दोनों साथ में बोल उठे। पहले बच्चे को जैसे ही यह लगा कि सामने वाले ने पहले हाथ उठाया तो वह रूक गया और बड़े अदब से उसने अपने साथी से कहा तुमने पहले हाथ उठाया मुझसे पहले तुम बोलो। यह एक छोटी सी घटना है लेकिन इस घटना ने बच्चों के बीच मौजूद मूल्यों की बानगी दिखा दी थी।

कक्षा-कक्ष के बाहर भी कुछ बच्चे छोटे-छोटे समूहों में बैठे हैं। इनके पास एक-एक चार्ट पेपर है। कुछ स्कैच पैन हैं। बच्चे रीडिंग पढ़कर उस पर चर्चा कर रहे हैं। चर्चा के बाद स्वयं ही किसी एक को चुनते हैं जो बड़े समूह में प्रस्तुतिकरण देगा। सामूहिक रूप से सीखने की परम्परा भी बन रही है जिसमें रोज नए प्रयोग और तरीके जुड़ते जाएँगे। कोई बच्चा चार्ट में लिख रहा है। तो कोई बातचीत को स्वयं पहल लेकर आगे बढ़ा रहा है। सामूहिक रूप से सीखने की दिशा में यह एक अभिनव प्रयोग कहा जा सकता है। बच्चों से बातचीत के दौरान कुछ शब्दों की तरफ ध्यान आकर्ष्ट हुआ जैसे- अनुशासन, आदत का बनना, भय रहित शिक्षण और स्कूली स्वायत्ता। इन शब्दों के साथ बच्चों से फिर मिलने की बात कह और उनका धन्यवाद कर मैं कक्षा से बाहर आया और शिक्षक से मिला। बहुत सी बातें स्कूल के सन्दर्भ में हुईं और इस बीच शिक्षक ने मुझे स्कूल मैनेजमेण्ट कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक में आने का आग्रह किया।

ठीक एक सप्ताह बाद में पुनः स्कूल पहुँचा। लेकिन इस बार एक संकुल समन्वयक भी मेरे साथ हो लिए। यह देखने के लिए स्कूल मैनेजमेण्ट कमेटी और स्कूल में कार्यरत शिक्षक ऐसा क्या खास कर रहे हैं कि सब ओर चर्चा है। ठीक दस बजे बैठक शुरू हुई। 170 अभिभावक इस बैठक में शामिल हो चुके थे, इनमें महिलाओं की संख्या अधिक थी। कुछ और आ ही रहे थे। लोगों की उपस्थिति को दर्ज करने के लिए दो छात्र एक पंजिका लेकर घूम रहे थे। बैठक की सभी व्यवस्था विद्यार्थियों के सुपुर्द थी। इनका साथ दे रहे थे गाँव के कुछ युवक जो सम्भवत: इसी विद्यालय से पढ़े थे। दोनों शिक्षक साथी बारी-बारी से कार्यक्रम का संचालन कर रहे थे। बैठक में जिला पंचायत सदस्य, खण्ड शिक्षा अधिकारी सहित विधायक प्रतिनिधि भी मौजूद थे। कुछ देर घोषणाओं का दौर चला। लेकिन सबसे प्रभावशाली बात यह लगी कि अभिभावकों ने स्वयं की पहल से विद्यालय के लिए दरी, कम्प्यूटर, व्हाईट बोर्ड आदि खरीदा था। जनप्रतिनिधियों से पुस्‍तकालय के लिए पुस्तकें उपलब्ध कराने की बात हो चुकी थी। बैठक के दौरान बच्चो ने चाय-बिस्कुट भी बाँटें, पानी भी सभी को पिलाया। दो सौ के करीब लोगों के समूह को बच्चों की टोली व्यवस्थित रूप से देख रही थीं। इन कार्यों को करने में बच्चों की दक्षता झलक रही है। उनका आत्मविश्वास भी बढ़ रहा है। किसी कार्यक्रम को कुशलता के साथ करने की दक्षता भी बढ़ रही है।

इस बीच स्कूल मैनेजमेण्ट कमेटी के अध्यक्ष ने एक प्रस्ताव रखा जिसे सभी ने सराहा। क्या था यह प्रस्ताव? प्रस्ताव रखा गया था और मुझे लग रहा था क्या ऐसा हो सकता है? सरकारी शिक्षा व्यवस्था के प्रति जन सामान्य का नजरिया बदल रहा है यह कहने की जरूरत नहीं थी क्योंकि यह सब होता हुआ दिख रहा था। प्रस्ताव था बच्चों द्वारा स्कूल परिसर को स्वच्छ रखने के सन्दर्भ में। बच्चों के साथ यदि बारी-बारी से दो-दो की संख्या में अभिभावक भी रोजाना प्रार्थना सत्र में शामिल रहें और साथ ही स्वच्छता में भी।

अच्‍छी बात यह है कि यह केवल प्रस्‍ताव तक सीमित नहीं रहा। यह वास्‍तव में लागू भी हुआ। इससे दो लाभ हुए ,22 समूह बने। प्रत्येक समूह में दो लोग शामिल थे। बारी-बारी से यह स्कूल आने लगे, बच्चों के साथ झाड़ू-पोछें से लेकर कक्षा-कक्ष की स्वच्छता में योगदान करने लगे। अभिभावक का भरोसा बनाने में और स्कूल को एक नई दिशा देने में दोनों शिक्षकों की मेहनत और उनकी रचनावादिता का महत्वपूर्ण योगदान है। मैं इस दृश्य को अपनी आँखों के सामने घटता देख रहा था। वाकई यह बदलाव की ओर जाता हुआ एक सफल प्रयोग है जो अब धीरे-धीरे कई सुधारों के साथ शिक्षा के साथ लोकजीवन का व्यवहार बनने लगा है।


बिपिन जोशी, अज़ीम प्रेमजी फाउण्‍डेशन, अल्‍मोड़ा, उत्‍तराखण्‍ड

टिप्पणियाँ

pramodkumar का छायाचित्र

बढिया

pramodkumar का छायाचित्र

विद्‍यालय की स्वच्छता में समुदाय का सहयोग लेने में सफल होना बडी बात है। यह दिखाता है कि शिक्षक अपना काम पूरी ईमानदारी के साथ कर रहे हैं। बधाई

jram11 का छायाचित्र

कबाड़ से जुगाड़ करके गमले का प्रयोग एक शिक्षक की अहम भागीदारी को दिखाता है जहां ईमानदारी हैं अपने कर्म के प्रति वहाँ नई सोच जरूर समुदाय को जोड़ती हैं और येसा ही है । बधाई ।

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