किसी 'खास' की जानकारी भेजें। एक शिक्षक जिसने जिद की कुछ बदलने की

यह विवरण एक युवा एवं उत्साही शिक्षक सूरजभान चौधरी का है जो समाज में बदलाव लाने के लिए पहल कर रहे हैं। वे वर्तमान में राजकीय प्राथमिक झोपडि़या में 20 मार्च 2015 से कार्यरत हैं। 

विद्यालय परिसर

विद्यालय परिसर की बात की जाए तो स्कूल में तीन कमरे हैं। स्कूल में बच्चों का कुल नामांकन 37 है जिसमें 18 छात्र व 19 छात्राएँ हैं। इस विद्यालय में दो शिक्षक सूरजभान चौधरी एवं मोहनलाल हरिवत कार्यरत हैं। विद्यालय में भौतिक सुविधाओं में तो बच्चों के बैठने के लिए दरी पट्टी ,कुछ कुर्सियाँ, एक अलमारी के अलावा स्कूल में हैण्डपम्प ,छात्र व छात्राओं के लिए शौचालय बने हुए हैं। शिक्षक का कहना है कि अन्‍य सुविधाओं को विकसित करने के लिए अभी प्रयास जारी हैं। 

शिक्षक के बारे में

सूरजभान एक युवा शिक्षक हैं जो विद्यार्थियों की शैक्षिक गुणवत्ता बढ़ाने के लिए निरन्तर प्रयास करते रहते हैं। इनके विद्यालय के बच्चों के शिक्षा स्तर को इन्हाेंने कठोर मेहनत व लगन से उच्च स्तर तक पहुँचाया है। शिक्षा व ज्ञान की अलख जगाकर विद्यालय के शैक्षिक स्तर को बढ़ाने के लिए नवाचार व नई-नई शिक्षण विधियों व शिक्षण प्रक्रियाओं पर गहनता से कार्य कर रहे हैं। इसके साथ ही वह अकादमिक पक्ष के साथ-साथ सामाजिक पक्ष में भी कुछ कार्य कर रहे हैं। इसे इनकी जिद कहें या पहल, ये समाज में कुछ बदलाव लाने की इच्छा रखते हैं। 

शिक्षक की स्वयं की बात एवं अकादमिक प्रयास

शिक्षक विद्यालय में अँग्रेजी भाषा में बच्चों के साथ कार्य कर रहे हैं। विद्यार्थियों का अँग्रेजी भाषा में स्तर बढ़ाने के लिए शिक्षक व अजीम प्रेमजी फाउण्‍डेशन की श्रीमती मनीषा शर्मा के द्वारा मिलकर कार्य किया गया तथा सत्र के अन्त में विद्यार्थियों को अँग्रेजी की पुस्तक समझ के साथ पढ़ पाने के लक्ष्य में सफलता अर्जित की। इसके लिए विद्यार्थियों के स्तर को बढ़ाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया गया। वैज्ञानिक दृष्टिकोण को ध्यान में रखकर विद्यार्थियों के शारीरिक एवं मानसिक विकास का प्रयास किया गया। विद्यार्थियों को सहायक सामग्री के माध्यम से कार्य कराया गया जिससे परिणाम बहुत बेहतर रहे। सहायक सामग्री निर्माण में संदर्भ व्‍यक्ति का द्वारा सहयोग रहा।

सर्वप्रथम विद्यार्थियों में अँग्रेजी भाषा के सीखने के प्रति एक माहौल निर्माण किया गया और बच्चों को इस भाषा को सीखने में सहज बनाया गया। इसके बाद बच्चों को naming card activity से अपना परिचय देना सिखाया गया। बच्चों के साथ flash cards  के माध्यम से alphabet की पहचान व  fruits, animal,flowers,birds  के बारे मे बताया गया। बच्चों के साथ कुछ महीनों तक इस पर कार्य कराने के बाद simple sentence formation  पर कार्य किया गया।

विद्यार्थियों को गतिविधि से कार्य कराने में बहुत मजा आया और विद्यार्थियों ने रुचि लेकर कार्य किया इसके साथ- साथ साधारण वाक्यों को पढ़ना भी सीखा। 3 साल के अथक प्रयासों से आज कक्षा 1 से 5 तक के छात्र एवं छात्राएँ स्वयं अँग्रेंजी मे अपना परिचय दे पाते हैं। इसके अलावा किताब पढ़ भी लेते हैं। विद्यार्थियों में आत्मविश्‍वास के साथ बेझिझक प्रश्‍न पूछने, अपनी बात को सभी के सामने रख पाने आदि प्रवृतियों का विकास हुआ है। इस अनवरत प्रयास से विद्यार्थियों में शैक्षिक स्तर में अत्यन्त सुधार हुआ है तथा शैक्षिक स्तर में बढोतरी हुई है। विद्यार्थियों में अँग्रेजी भाषा के प्रति रुचि उत्पन्न हुई है। अज़ीम प्रेमजी फाउण्‍डेशन के सहयोग से समय-समय पर विद्यार्थियों के स्तरानुसार शिक्षण सहायक साम्रगी का निर्माण, माहौल निर्माण पर चर्चा, फोन पर बच्चों के सन्दर्भ में बातचीत व योजना बनवाने मे मदद रही है, जो विद्यार्थियों के लिए बहुत उपयोगी साबित हो रहा है। इस नवाचार प्रयोग व अनुसंधान से विद्यार्थी व शिक्षक जगत अत्यन्त लाभान्वित होगा। 

अकादमिक कार्य के दौरान आई चुनौतियाँ

विद्यालय में बिजली की असुविधा, चारदीवारी अपूर्ण होना, बच्चों के परिवेश में अँग्रेजी भाषा का माहौल न होना, स्थानीय लोगों में शिक्षा के प्रति जागरूकता की कमी तथा विद्यार्थियों के घर जाने के बाद पढ़ाई के लिए समुचित व घरेलू माहौल की कमी महसूस की गई। इन चुनौतियों को दरकिनार कर बच्चों को सिखाने पर ज्यादा जोर दिया गया। स्थानीय लोगों से भी जाकर बातचीत की गई।

शिक्षक की सामाजिक पहल

शिक्षक में बच्चों के अकादमिक स्तर को बदलने के साथ-साथ समाज को बदलने को एक जोश/उत्साह देखा गया। शिक्षक की बातें सुनकर लगता है कि समाज में कुछ चीजों को लेकर बदलाव करना चाहते हैं। इसी पर उनके द्वारा सामाजिक क्षेत्र में जागरूकता लाने के लिए एक पहल की गई और आगे भी इसके लिए प्रयासरत हैं। शिक्षक मृत्युभोज विरोधी सत्याग्रह आन्दोलन ‘मृत्युभोज अभिशाप, समझें व समझाएँ आप’  से जुड़े हैं तथा समाज में जागरूकता व शिक्षा की अलख जगा रहे हैं। इस आन्दोलन से जुड़कर  गाँव-गाँव मे जाकर बैठक आयोजित करना और इसके बारे में बताने से लगभग 1000 से अधिक लोगों ने मृत्युभोज नही खाने का संकल्प लिया गया तथा मृत्युभोज का सामाजिक रूप से बहिष्कार किया गया। मृत्युभोज के अलावा अन्य कुरीतियों जैसे – शादी मे ज्यादा पैसा खर्च न करना, दहेज देना, बालिकाओं को शिक्षा से जोड़ना,बाल विवाह रोकना आदि पर भी समाज में चेतना आई। इन कुरूतियों के विरूद्ध किवाडा,कोथून ,नटवाडा, डारडाहिन्द आदि गाँवों मे विशाल महापंचायतें आयोजित हुईं तथा यह आन्दोलन तेजी से आगे बढ़  रहा है।


प्रस्‍तुति : मनीषा शर्मा, सन्‍दर्भ व्‍यक्ति, अज़ीम प्रेमजी फाउण्‍डेशन, जिला संस्‍थान टोंक, राजस्‍थान

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