शिक्षा विमर्श के जुलाई-अगस्‍त,2016 अंक राजस्‍थान की नई पाठ्यपुस्‍तकों की समीक्षा पर केन्द्रित है। कई विद्वानों तथा विषय विशेषज्ञों ने इसका जायजा लिया है।
शिक्षा विमर्श के मई-जून, 2016 अंक में । परिप्रेक्ष्‍य * मुझे मेरी आजादी चाहिए, रास्‍ते का नक्‍शा बताने की तकलीफ न करें : रोहित धनकर। शिक्षा का समाजशास्‍त्र * जातिवाद और शिक्षा : अमन मदान । पुनर्चिंतन * शेखीबाज मक्‍खी नक्‍शे के जरिए कहानी की तहों में उतरने की एक कोशिश : रविकांत । लेख * बहुभाषिता पूरी पाठ्यचर्या के लिए महत्‍वपूर्ण है : रमाकांत अग्निहोत्री। बच्‍चों के लिए मौखिक कहानियों की परम्‍परा : प्रभात । श्रद्धांजलि * जॉन सिंह - दिगन्‍तर के फाउण्‍डर प्रेसिडेंट : रोहित धनकर। उम्‍मीदों के संरक्षक ‘जॉन’ नहीं रहे : रमेश थानवी,विनोद जोशी,धर्मेन्‍द्र कंवर, कमल एवं रविकांत। कठिन समय का भरोसा – जॉन : रीना दास
शिक्षा का समाजशास्‍त्र * शिक्षा और भारत की वर्गीय संरचना : अमन मदान । व्‍याख्‍यान * ज्ञान के निमार्ण व उत्‍पादन पर शिक्षाशास्‍त्र का प्रभाव : रोहित धनकर । शोध * धारावाहिक, बच्‍चे और टेलीविजन : एक अंत:क्रिया : मिली भटनागर । अनुभव * एक स्‍कूल मैनेजर की डायरी के कुछ पन्‍ने: आपका शुक्रिया : फ़राह फ़ारूख़ी। संदर्भ * शिक्षा को लेकर कुछ विचार : रिचा चौहान,जया मिश्रा एवं क्रिस्‍टोफर खाल्‍खो । पुस्‍तक समीक्षा * भूगोल लोगों के बारे में होता है : मनीष चौहान । परख * शिक्षक का मूल्‍यांकन : एक पेचीदा प्रश्‍न : शिवरतन थानवी । अनुभव * यह कैसा सम्‍मान है ? : महेश कुमार शर्मा । बजट सार * शिक्षा का अधिकार एवं के‍न्‍द्रीय बजट : 2016-17 : नेसार अहमद । अनुभव * कितना कुछ सिखाते हैं बच्‍चे : दिलीप चुघ
शिक्षा विमर्श के जनवरी-फरवरी, 2016 अंक में । शिक्षा का समाजशास्‍त्र * वर्गीय विषमता के सिद्धान्‍त व शिक्षा : अमन मदान । परिप्रेक्ष्‍य * नए दौर में स्‍कूली शिक्षिकाएँ – कुछ प्रारम्‍भिक विचार : नंदिनी मांजरेकर । साक्षात्‍कार * शिक्षा के उद्देश्‍य एवं मूल्‍य शिक्षा : शारदा जैन से विश्‍वंभर की बातचीत । अनुभव * एक स्‍कूल मैनेजर की डायरी के कुछ पन्‍ने–सत्‍ता,सियासत की तहें और स्‍कूली संगठन : फराह फ़ारूख़ी । बालसाहित्‍य समीक्षा * बच्‍चों के गुलज़ार : पल्‍लव । बहस * शोषण को वैधानिकता – एक उदाहरण : वीरेन्‍द्र सिंह रावत, फिरोज अहमद और मनोज चाहिल । अवलोकन * भाषा शिक्षण - सीखने के कुछ अवसर कुछ : अनुपमा तिवाड़ी
शिक्षा विमर्श का मई-जून, 2015 अंक शैक्षिक मूल्‍यांकन पर केन्द्रित है।
शिक्षा विमर्श के जुलाई-अगस्‍त, 2015 अंक में व्‍याख्‍यान * कितना सर्जन, कितना विसर्जन : अनुपम मिश्र । शिक्षा का समाजशास्‍त्र * शिक्षा और सामाजिक स्‍तरीकरण-एक परिचय : अमन मदान । अनुभव * एक स्‍कूल मैनेजर की डायरी के कुछ पन्‍ने : फ़राह फ़ारूखी । सन्‍दर्भ * पाठ भवन में इतिहास शिक्षण : निर्मल के. महतो । बहस * क्‍या शिक्षा एक सांस्‍कृति‍क कार्यवाही है? : निरंजन सहाय बालसाहित्‍य समीक्षा * बच्‍चों के चित्र, बड़ों की फि़क्र : पल्‍लव । नीति विमर्श * दुगर्ति की राह पर शिक्षा : रोहित धनकर । निजीकरण की राह में बढ़ते कदम : नेसार अहमद
शिक्षा विमर्श के मार्च-अप्रैल, 2015 अंक में ।। व्‍याख्‍यान * लड़कियों का बचपन और उनकी शिक्षा : कृष्‍णकुमार ।। शिक्षा का समाजशास्‍त्र * औपचारिक संगठनों के माध्‍यम से शिक्षा : अमन मदान ।। बहस : की-बोर्ड बनाम कलम : एन.चेमिन ।। पुस्‍तक समीक्षा * नागरिक साहस के निमार्ण की चुनौतियाँ : रविकान्‍त ।। अध्‍ययन * गैर-सहायता प्राप्‍त निजी स्‍कूलों में शिक्षा का अधिकार एवं समावेशन : बेंगलूरु और दिल्‍ली में किया गया एक खोजपरक अध्‍ययन : अर्चना मेहेंडले, राहुल मुखोपाध्‍याय एवं एनी नामला ।। शोध सार * शिक्षा से वंचना की स्थितियाँ : राजाराम भादू ।। बालसाहित्‍य * बालसाहित्‍य की विषयवस्‍तु : प्रभात
शिक्षा विमर्श के जनवरी-फरवरी,2015 अंक में परिप्र‍ेक्ष्‍य * महिला शिक्षा के समक्ष समसामयिक समस्‍याएँ : भ्रामक लक्ष्‍य की दिशा में : नंदिनी मांजरेकर। साक्षात्‍कार * निजी स्‍कूल की फीस का निधार्रण, मुनाफाखोरी पर लगाम की कोशिश : जस्टिस शिवकुमार शर्मा से निशी खण्‍डेलवाल की बातचीत । विश्‍लेषण * शिक्षा बचाओ आन्‍दोलन : मिसाल बौद्धिक दरिद्रता की : संजीव कुमार । शिक्षा का समाजशास्‍त्र * पूँजीवाद और शिक्षा : कुछ मौलिक मुद्दे : अमन मदान । अनुभव : एक स्‍कूल मैनेजर की डायरी के कुछ पन्‍ने : फ़राह फ़ारूकी । पुस्‍तक समीक्षा * शिक्षा की चिंता करता एक कथाकार : पल्‍लव
शिक्षा विमर्श के नवम्‍बर-दिसम्‍बर 2014 अंक में ...... शिक्षा का समाजशास्‍त्र * शिक्षा,बाजार का विकास और सामाजिक संघर्ष : अमन मदान । सन्‍दर्भ * डायरी लेखन से शिक्षा : शिवरतन थानवी । परिप्रेक्ष्‍य * शिक्षा के उद्देश्‍यों पर पुनर्विचार : क्रिस्‍टोफर विंच । अनुभव * एक स्‍कूल मैनेजर की डायरी के कुछ पन्‍ने (तेरहवीं किस्‍त) : फ़राह फ़ारूख़ी । अनुभव * उलझे पेचों को सुलझाने की एक दास्‍तान : कब आऊँ? : रविकान्‍त आलेख * जनशिक्षा के पैराकार डॉ. भीमराव अम्‍बेडकर : निरंजन सहाय । सामयिक * आखिर ‘बालक’ कौन? कानूनी उलझनें और बच्‍चों का भविष्‍य : कंचन शर्मा । बहस–एक * गैर जिम्‍मेदाराना फैसले और शिक्षा का पेंडुलम : रोहित धनकर । बहस-दो * बोर्ड परीक्षाओं के खौफ में बचपन : राजीव गुप्‍ता
समाजशास्‍त्र * जटिल समाजों में शिक्षा : अमन मदान । साक्षात्‍कार * मु‍सलमानों की शिक्षा : राधिका चतुर्वेदी की फरीदा खान से बातचीत । शोध * शिक्षा का अधिकार : प्रियंका, योगेन्‍द्र एवं सुधीर । अनुभव * एक स्‍कूल मैनेजर की डायरी के कुछ पन्‍ने (बारहवीं किस्‍त) : फ़राह फ़ारूख़ी । लेख * स्‍कूली शिक्षा में भाषा के कुछ सवाल : मनोज चाहिल। बहस * प्रार्थना पर एक बहस : विजय विशाल

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