लर्निंग कर्व : सीखने-सिखाने के नवाचारी तौर-तरीके

Description: 
सीखने-सिखाने के नवाचारी तरीकों,पर केन्द्रित लर्निंग कर्व के इस अंक में - पाठ्यपुस्तकों से लिए गए तरीके नहीं बल्कि ऐसी तकनीकें, तरकीबें हैं, जो समयसिद्ध और कारगर रही आई हैं। ये एकदम व्यावहारिक हैं और भारत की अधिकांश कक्षाओं में पाई जाने वाली साधारण से साधारण परिस्थितियों में भी इन्हें किया जा सकता है। अध्यापन की इन विधियों को आजमाने के लिए किसी विशेष उपकरण की जरूरत नहीं। विषय चाहे एक-दूसरे से कितने ही अलग क्यों न हों, पर इन सबको जोड़ने वाला सूत्र एक ही है - कुछ अलग करना, कुछ नया करना - जिसके चलते बच्चे सीखने की प्रक्रिया में इस कदर रम जाते हैं कि वे उम्मीद से ज्यादा करने की ठान लेते हैं। इस अंक में देश भर से आए अलग-अलग स्तरों पर विभिन्न विषय पढ़ाने वाले अध्यापकों के लेख शामिल हैं।

 

 अंक इस लिंक पर उपलब्‍ध है।
 

अंक में शामिल सामग्री की एक झलक इस सूची में देखी जा सकती है:

खण्ड अ : मानविकी

’’क्या कर सकते हैं ?’’  से ’’कर सकते हैं! ’’ तक की यात्रा : गौरी मिराषी और पारुल पटेल

अध्यापन से मुक्ति : मीनाक्षी उमेश

जिम्मेदार नागरिकता की ओर: सेवाग्राम के आनन्द निकेतन में नागरिक शास्त्र की शिक्षा : सुषमा शर्मा

सीखना-सिखाने पर मॉण्टेसरी पद्धति का प्रभाव : उमा शंकर

इतिहास का सृजन - इतिहास की कक्षा में अन्वेषण को प्रेरित करना : श्रीपर्णा तम्हाणे

‘नवाचार‘ एक शिक्षक के नाते : ऋषिकेष बी. एस.

भाषा का संगीत-संगीत की भाषा : नलिनी रावल

भाषा षिक्षण में मेरे प्रयोग: प्रॉजेक्ट विधि से अँग्रेजी पढ़ाना : निवेदिता बेदादुर 

रचनात्मक शिक्षण एवं तृप्ति : एन. नागराजू

स्कूल की ओर दौड़ते बच्चे और अभिभावक : सुजित सिन्हा 

क्या आत्मनियंत्रण सीखा जा सकता है, बजाय थोपने के ? : यामिनी पाटिल 

कर्नाटक के प्राथमिक स्कूलों में नली-कली : पद्मजा एम. आर.

 

खण्ड ब : विज्ञान

क्या मानव वानरों से विकसित हुए हैं? : विकासवाद के प्रति एक विवेचनात्मक दृष्टिकोण : सिन्धु मथाई

गणित की रचनात्मक भाषा : स्नेहा टाइटस 

ज्ञान का माध्यम-ताष का खेल ब्रिज : अमरेश देशपाण्डे  

चार गणितीय क्रियाओं की कहानी : रेणु भाटिया,स्मिता माल्या  

गणित को ऐसे भी पढ़ा सकते हैं : एच.के.शुभा 

भौतिकी को गणेश का प्रतिदान : ज्योति त्यागराजन 

क्या मैं मदद कर सकती हूँ? रसायनशास्‍त्र  को प्रभावी तरीके से पढ़ाना : चन्द्रिका मुरलीधर 

जब शिक्षक एक सुगमकर्त्ता होता है : निशा बुटोलिया  

भूगोल में कुछ अवधारणाओं का अभिनव शिक्षण : तपस्या साहा 

सीखने की नई ऋतु : यामिनी झा  

विज्ञान शिक्षण में भावनात्मक दृष्टिकोण : श्रीनिवासन कृष्णन 

विज्ञान सीखने की प्रॉजेक्ट-आधारित पद्धतियों का महत्व : प्रियंका  

आओ प्रयोग करें: एक अभिनव विज्ञान कार्यशाला के अनुभव : शारंगौड़ा, रमेश एवं परिमलाचार्य एस. अग्निहोत्री

हैलो दीदी : नीरजा राघवन

 

खण्ड स : सीखने का आनन्द 

शिक्षण का नवाचारी तरीका : मैत्रैयी  

भूगोल की कक्षा का मेरा एक अनुभव : तपस्या साहा 

जीव विज्ञान की कक्षा में डिसेक्‍शन का अनुभव : अनन्या रामगोपाल  

 

 

19179 registered users
7446 resources