इस अंक में विमर्श के अन्‍तर्गत प्रस्‍तुत हैं साझी समझ, साझे प्रयास * वन्‍दना सिंह । बच्‍चे की शिक्षा और पालक * केवलानन्‍द काण्‍डपाल। अभिभावक, जो सोचते हैं * ऋषभ कुमार मिश्र । बस इतनी सी बात * श्रवण कुमार । बच्‍चे, अभिभावक और शिक्षक * निशी के लेख। प्रसंगवश के अन्‍तर्गत प्रस्‍तुत हैं शिक्षा में माँ होना एक जिम्‍मेदारी है * विध्‍धुलता । एक माँ की पीड़ा * रुखसाना बेगम । रिश्‍ता जो नाजुक है * निशु खण्‍डलेवाल । आधा सच * नेहा यादव। पढ़ने की लगन * जया राठौड़। सचेत पालक की बात * ज्‍योति चोर्डिया। और ताला खुल गया * प्रमोद दीक्षित ‘मलय’। बच्‍चे,शिक्षक और समुदाय* कल्‍याण सिंह मनकोटी । पत्र बेटे के शिक्षक के नाम * अब्राहम लिंकन । शिखा यादव की कविता * उड़ान ।
'खोजें अौर जानें ' का अंक 11 विद्यालयों में बनाई जाने वाली बाल संसद के अनुभवों पर केन्द्रित है।
'खोजें और जानें' का अंक 10 'स्‍कूल : मजा या सजा' पर केन्द्रित है। हमारे विद्यालय बरसों से बच्‍चों के लिए सजा के केन्‍द्र ही बने रहे हैं। सजा केवल शारीरिक ही नहीं होती, वह मानसिक औरआत्‍मसम्‍मान को चोट पहुँचाने वाली भी होती है। सजा तनाव के रूप में भी होती, अलगाव के रूप में भी और अपमान के रूप में भी। 'खोजें और जानें' के इस अंक में सजा के इन पहुलूओं पर विचार करने की कोशिश की गई है।
‘खोजें और जानें’ का अप्रैल,2014 अंक ‘हमारे मन में अध्‍यापक की अवधारणा’ पर केन्द्रित है।
विद्या भवन सोसायटी तथा अज़ीम प्रेमजी विश्‍वविद्यालय द्वारा संयुक्‍त रूप से प्रकाशित त्रैमासिक पत्रिका ‘खोजा’ (खोजें और जानें) का आठवाँ अंक समावेशी शिक्षा के कुछ और मुद्दों पर केन्द्रित है।
‘खोजें और जानें’ का अक्‍टूबर,2013 का अंक ‘समावेशी’ शिक्षा की चुनौतियों पर केन्द्रित है। इस अंक में समावेशन के विभिन्‍न पक्षों पर डॉ.केवलानंद कांडपाल, हृदयकांत दीवान, अब्‍दुल कलाम, मारन चिन्‍नाकुट्टी, लालाराम जाट, विलास जानवे के आलेख हैं। विश्‍व विजया सिंह, अंजना राव, महिमा शर्मा और सुमन आठले समावेशी शिक्षा से जुड़े अपने अनुभव सबके साथ साझा कर रही हैं। घनश्‍याम रैगर और श्रीमती पंकज शर्मा कुछ बुनियादी बातें बता रहे हैं। उमा शांडिल्‍य का आत्‍मकथ्‍य बताता है कि वास्‍तव में समावेशी शिक्षा की चुनौतियाँ क्‍या हैं। शिक्षिका और युवा कवियत्री रेखा चमोली की कविता ‘सजा’ इसका एक और पक्ष सामने रखती है।
अज़ीम प्रेमजी विश्‍वविद्यालय तथा विद्या भवन सोसायटी द्वारा प्रकाशित पत्रिका ‘खोजें और जानें’ का अंक-6 प्रकाशित हो गया है। इस अंक का मुख्‍य विषय ‘अभिव्‍यक्ति’ है। अभिव्‍यक्ति के कई तरीके होते हैं। ये तरीके बच्‍चों में किस तरह के कौशल का विकास करते हैं, यह पड़ताल करने की कोशिश इस अंक में की गई है। अंक में मनोज कुमार, रेखा चमोली, निशि खंडेलवाल,मोहम्‍मद उमर तथा मनोहर मनु के उपयोगी लेख भी हैं।
राजस्‍थान की शैक्षिक संस्‍था विद्याभवन सोसायटी तथा अज़ीम प्रेमजी विश्‍वविद्यालय मिलकर शैक्षिक पत्रिका 'खोजें और जानें' पत्रिका का प्रकाशन कर रहे हैं। यह पत्रिका पहले 'खोजबीन' नाम से विद्याभवन सोसायटी द्वारा प्रकाशित की जाती रही है। पत्रिका पाँचवां अंक प्रकाशित हो गया है। इस अंक में प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ना-लिखना सिखाने को लेकर आने वाली समस्‍याओं पर समझ बनाने का प्रयत्‍न किया गया है। अंक की सामग्री का अन्‍दाजा इस सूची से लगाया जा सकता है- पढ़ना लिखना : कौशल बनाम समझ । हाशिए में शिक्षा : अफसाना बानो । पढ़ना कैसे सिखाएँ : देवयानी भारद्वाज । अँग्रेजी से अनबन : देवयानी भारद्वाज । गणित पर संवाद : ऋचा गोस्‍वामी । सृजनात्‍मक लेखन : विश्‍व विजया सिंह । अंग्रेजी –सीखना सिखाना : मधुलिका कोठारी । दिनेश कर्नावट की कहानी : मैकॉले का जिन्‍न । बिपिन कुमार शर्मा की कविता : लिखने की कला ।
राजस्‍थान की शैक्षिक संस्‍था विद्याभवन सोसायटी तथा अज़ीमप्रेमजी विश्‍वविद्यालय मिलकर शैक्षिक पत्रिका 'खोजें और जानें' पत्रिका का प्रकाशन कर रहे हैं। यह पत्रिका पहले 'खोजबीन' नाम से विद्याभवन सोसायटी द्वारा प्रकाशित की जाती रही है। इस नए नाम से और नए स्‍वरूप में पत्रिका का चौथा अंक हाल ही में प्रकाशित हुआ है। यह अंक सामाजिक विज्ञान शिक्षण पर है।
राजस्‍थान की शैक्षिक संस्‍था विद्याभवन सोसायटी तथा अज़ीमप्रेमजी विश्‍वविद्यालय मिलकर शैक्षिक पत्रिका 'खोजें और जानें' पत्रिका का प्रकाशन कर रहे हैं। यह पत्रिका पहले 'खोजबीन' नाम से विद्याभवन सोसायटी द्वारा प्रकाशित की जाती रही है। इस नए नाम से और नए स्‍वरूप में पत्रिका का तीसरा अंक हाल ही में प्रकाशित हुआ है।इसमें बालिका शिक्षा पर विशेष सामग्री दी गई है।
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