कक्षा 9 -10

हिंदी प्रदेशो में संख्यावाचक शब्दों के उच्चारण और लेखन में एकरूपता का अभाव दिखाई देता है। शिक्षा मंत्रालय द्वारा प्रकाशित “ए बेसिक ग्रामर ऑफ मॉडर्न हिंदी” में भी इस एकरूपता का अभाव था। अतः निदेशालय में 5-6 फरवरी ,1980 को आयोजित भाषा विज्ञानियों की बैठक में इस पर गम्भीरतापूर्वक विचार करने के बाद इनका जो मानक रूप स्वीकार हुआ, वह इस प्रकार है।

एक से सौ तक संख्यावाचक शब्दों का मानक रूप
एक, दो, तीन, चार, पाँच।
छह, सात, आठ, नौ, दस।।

ग्‍यारह, बारह, तेरह, चौदह, पन्द्रह।
सोलह, सत्रह, अठारह, उन्नीस, बीस।।

यह बात अच्छी हो या बुरी, मानव समाजों में स्कूली व्यवस्थाएँ अब स्थापित हो चुकी हैं। घर में ही स्कूलिंग को छोड़ दें तो स्कूल चाहे मुख्य धारा का हो या वैकल्पिक, बच्चे घर और माता-पिता से दूर वयस्कों के एक और समूह के पास जाते हैं, जिन्हें शिक्षक कहते हैं और यहाँ वे एक ऐसी गतिविधि के लिए जाते हैं जिसे हम शिक्षा कहते हैं। स्कूलों में शिक्षा कमोबेश स्पष्ट लक्ष्यों के साथ की जाने वाली गतिविधि है। स्कूलों ने ज्ञानार्जन के इस प्रोजेक्ट के एक बड़े हिस्से को (व्यावसायिक तथा आर्थिक मायनों में) अपने व्यापार के तौर पर ले लिया है। स्कूल व्यक्तियों को भविष्य में किसी पेशे के लिए त

इस वीडियो में  'जादुई नदियाँ, मन्दिरऔर फूल' पहेली का उत्‍तर है। जैसा हमने कहा था, सबसे पहले हम यहां पर 3 मंदिर व नदियों के लिये फूलों की संख्‍या को बीजगणितीय तरीके से निकालने का प्रयास कर रहे है, फिर 2 मंदिर, 3 मंदिर , 4 मंदिर की पहेली को हल करने के बाद उसके उत्‍तरों से निकले पैटर्न को देखेंगे। और इस पैटर्न का सामान्‍यीकरण करके हम एक सूत्र बनाने की ओर बढ़ेंगे।

 

कोरोना वायरस का फैलता संक्रमण तरह-तरह की आंशकाओं को जन्म दे रहा है। इसे लेकर अवैज्ञानिक सूचनाएँ/अफवाहें भी फ़ैलाई जा रही हैं। ऐसे में बच्चों और बड़ों दोनों को कोरोना वायरस और इससे फैलने वाली बीमारी के बारे में सही-सही जानकारी उपलब्ध कराने की जरूरत है। इस जरूरत को देखते हुए

चूँकि कोरोनो वायरस बीमारी 2019 (COVID-19) के बारे में चर्चा हो रही है। बच्‍चे भी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि वे स्‍वयं, उनका परिवार, उनके दोस्‍त इससे बीमार न हो जाएँ। माता-पिता, परिवार के सदस्य, स्कूल के कर्मचारी और अन्य भरोसेमंद वयस्क बच्चों की मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। क्‍योंकि बच्‍चे ऐसा समझते हैं कि उक्‍त सब लोग ईमानदार, सही बात करने वाले हैं और वे उनकी चिंता या भय को कम करते हैं। CDC

रमाकान्त अग्निहोत्री

भारत के संविधान की उद्देशिका को मालवी लोक शैली के भजन के रूप में इस वीडियो में प्रस्‍तुत किया गया है। रोचक है। कक्षा में भी इसका उपयोग किया जा सकता है।

रमाकान्त अग्निहोत्री

रमाकान्त अग्निहोत्री

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